सीबीआई ने 1 मई से क्यूआर कोड लागू करने का किया ऐलान, साइबर ठगी और फर्जी नोटिसों के खिलाफ नया कदम
सारांश
मुख्य बातें
नई दिल्ली, 20 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने साइबर ठगी और नकली नोटिसों के मामलों को समाप्त करने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाने का निर्णय लिया है। 1 मई 2026 से सीबीआई द्वारा जारी सभी आधिकारिक नोटिसों पर एक विशेष क्यूआर कोड
सीबीआई के सूत्रों के अनुसार, प्रत्येक नोटिस पर एक अलग और अद्वितीय क्यूआर कोड होगा, जिसे स्कैन करके यह सुनिश्चित किया जा सकेगा कि नोटिस असली है या नहीं। इसके साथ ही, यह जानकारी भी मिलेगी कि नोटिस कब तक मान्य है। यदि नोटिस की वैधता समाप्त हो जाती है, तो उस नोटिस से संबंधित क्यूआर कोड अपने आप निष्क्रिय हो जाएगा, जिससे किसी भी प्रकार का दुरुपयोग नहीं किया जा सकेगा।
अधिकारी बताते हैं कि हाल के समय में साइबर अपराधियों द्वारा नकली नोटिस और फर्जी जांच एजेंसियों के माध्यम से लोगों को डराकर ठगी के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए, यह तकनीकी व्यवस्था लागू करने का निर्णय लिया गया है ताकि आम जनता आसानी से असली और नकली नोटिस में अंतर कर सके।
इसके अतिरिक्त, सीबीआई ने यह भी बताया है कि यदि किसी को कोई संदेह या शंका होती है, तो वे अब सीबीआई के नए कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) आधारित हेल्पबॉट 'अभय' की सहायता ले सकते हैं। इस हेल्पबॉट के माध्यम से लोग नोटिस पर दिए गए क्यूआर कोड को स्कैन करके उसकी सत्यता की जांच कर सकते हैं और तुरंत जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।
सीबीआई का मानना है कि इस नई प्रणाली से न केवल जांच प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ेगी, बल्कि आम नागरिकों का विश्वास भी मजबूत होगा। साथ ही, यह साइबर अपराधियों की गतिविधियों पर भी काफी हद तक नियंत्रण पाने में मदद करेगा।