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सीबीआई ने साइबर अपराध के बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर पर छापेमारी क्यों की? फर्जी मैसेज भेजकर ठगने के मामले में तीन गिरफ्तार

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सीबीआई ने साइबर अपराध के बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर पर छापेमारी क्यों की? फर्जी मैसेज भेजकर ठगने के मामले में तीन गिरफ्तार

सारांश

केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने ऑपरेशन चक्र-5 के तहत साइबर अपराधियों के खिलाफ छापेमारी की है। यह कार्रवाई एक संगठित गिरोह के खिलाफ है, जो लाखों फिशिंग एसएमएस भेजकर लोगों को ठग रहा था। क्या यह कार्रवाई साइबर ठगी का अंत करेगी?

मुख्य बातें

सीबीआई ने साइबर अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई की है।
लाखों फिशिंग एसएमएस भेजने वाले गिरोह का पर्दाफाश हुआ है।
तीन लोग गिरफ्तार किए गए हैं।
अवैध सिम कार्ड का उपयोग किया गया था।
सीबीआई की कार्रवाई साइबर सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है।

नई दिल्ली, 15 दिसंबर (राष्ट्र प्रेस)। केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने ऑपरेशन चक्र-5 के तहत साइबर अपराधियों के विरुद्ध एक महत्वपूर्ण कार्रवाई की है। जांच एजेंसी ने एक ऐसे संगठित गिरोह का खुलासा किया है, जो पूरे देश में लाखों फिशिंग एसएमएस भेजकर लोगों को ठगने का कार्य कर रहा था।

इन फर्जी मैसेज में नकली डिजिटल गिरफ्तारी, आसान लोन, निवेश के झूठे अवसर और अन्य धोखाधड़ी के लालच दिए जाते थे। इस मामले में अब तक तीन व्यक्तियों- सोनवीर सिंह, मनीष उप्रेती और हिमालय को गिरफ्तार किया गया है।

सीबीआई ने रोजाना लोगों के फोन पर आने वाले उन संदिग्ध एसएमएस की गहनता से जांच की। इस दौरान पता चला कि एनसीआर और चंडीगढ़ क्षेत्र में एक गिरोह सक्रिय है, जो साइबर ठगों को बल्क एसएमएस भेजने की सुविधा प्रदान कर रहा था। हैरानी की बात यह है कि विदेशी अपराधी भी इस सुविधा का उपयोग करके भारतीय नागरिकों को ठग रहे थे।

जांच में खुलासा हुआ कि नियमों का उल्लंघन करते हुए करीब 21,000 सिम कार्ड प्राप्त किए गए थे। इन सिम को एक ऑनलाइन प्लेटफॉर्म द्वारा नियंत्रित किया जाता था, जिससे हर दिन लाखों फर्जी मैसेज भेजे जाते थे। इन संदेशों का उद्देश्य लोगों की व्यक्तिगत जानकारी और बैंक विवरण चुराना था। ठग लोग नकली लोन, निवेश और अन्य लाभ का लालच देकर लोगों को फंसाते थे।

दूरसंचार विभाग की सहायता से और संचार साथी पोर्टल जैसी जानकारियों का उपयोग करके सीबीआई ने एक प्राइवेट कंपनी लॉर्ड महावीर सर्विसेज इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के खिलाफ मामला दर्ज किया। आरोप है कि यही कंपनी यह अवैध प्रणाली चला रही थी, जिससे ठगों को पूरे देश में फर्जी मैसेज भेजने की अनुमति मिल रही थी।

सीबीआई ने दिल्ली, नोएडा और चंडीगढ़ में कई स्थानों पर छापेमारी की। इन छापों में एक पूरा सक्रिय सिस्टम बरामद हुआ, जिसमें सर्वर, संचार उपकरण, यूएसबी हब, डोंगल और हजारों सिम कार्ड शामिल थे। इस सेटअप से रोजाना लाखों धोखाधड़ी वाले मैसेज भेजे जा रहे थे।

छापेमारी के दौरान सीबीआई ने महत्वपूर्ण डिजिटल सबूत, बेहिसाब नकद और क्रिप्टोकरेंसी भी जब्त की। प्रारंभिक जांच से कुछ टेलीकॉम कंपनियों के चैनल पार्टनर और कर्मचारियों की संलिप्तता सामने आई है, जिन्होंने अवैध तरीके से सिम कार्ड उपलब्ध कराने में सहायता की।

सीबीआई का कहना है कि यह कार्रवाई संगठित साइबर क्राइम के खिलाफ उनकी मजबूत प्रतिबद्धता को प्रदर्शित करती है। एजेंसी अब साइबर अपराध के तकनीकी आधार पर सीधे हमले कर रही है। अन्य एजेंसियों के साथ मिलकर और उन्नत इंटेलिजेंस का उपयोग करके सीबीआई उन अपराधियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई जारी रखेगी, जो प्रौद्योगिकी का गलत इस्तेमाल करके आम लोगों को ठगते हैं। सीबीआई का लक्ष्य है कि ऐसे अपराधियों को कानून की सजा अवश्य मिले।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि आम लोगों को भी सुरक्षित रखने में सहायक होगी।
RashtraPress
1 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सीबीआई ने कब और कहाँ छापेमारी की?
सीबीआई ने 15 दिसंबर को दिल्ली, नोएडा और चंडीगढ़ में छापेमारी की।
कितने लोगों को गिरफ्तार किया गया है?
इस मामले में अब तक तीन लोगों को गिरफ्तार किया गया है।
इस गिरोह का मुख्य उद्देश्य क्या था?
इस गिरोह का मुख्य उद्देश्य लोगों से व्यक्तिगत जानकारी और बैंक डिटेल्स चुराना था।
सीबीआई ने किस कंपनी के खिलाफ मामला दर्ज किया है?
सीबीआई ने लॉर्ड महावीर सर्विसेज इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के खिलाफ मामला दर्ज किया है।
सीबीआई की यह कार्रवाई क्यों महत्वपूर्ण है?
यह कार्रवाई संगठित साइबर क्राइम के खिलाफ सीबीआई की मजबूत प्रतिबद्धता को दर्शाती है।
राष्ट्र प्रेस
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