डीएफएस का बैंकों को निर्देश: फर्जी खातों की पहचान के लिए RBI का 'MuleHunter.AI' टूल तुरंत अपनाएं
सारांश
Key Takeaways
वित्तीय सेवा विभाग (डीएफएस) के सचिव ने 30 अप्रैल 2026 को बैंकों को निर्देश दिया कि वे भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) द्वारा विकसित 'MuleHunter.AI' टूल को तत्काल अपनाएं, ताकि साइबर वित्तीय धोखाधड़ी में इस्तेमाल होने वाले फर्जी खातों की समय पर पहचान और रोकथाम सुनिश्चित की जा सके। यह निर्देश नई दिल्ली में आयोजित एक उच्च स्तरीय बैठक के बाद जारी किया गया, जिसमें कई केंद्रीय एजेंसियों और बैंकिंग संस्थाओं के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए।
बैठक में कौन-कौन शामिल हुए
डीएफएस सचिव ने हैदराबाद पुलिस आयुक्त वी.सी. सज्जनार, भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C), केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI), RBI, भारतीय डिजिटल भुगतान अवसंरचना कंपनी और विभिन्न बैंकों के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक की अध्यक्षता की। बैठक में डिजिटल वित्तीय धोखाधड़ी और साइबर अपराधियों द्वारा फर्जी खातों के बढ़ते दुरुपयोग की विस्तृत समीक्षा की गई।
ऑपरेशन ऑक्टोपस की सीख पर केंद्रित रही चर्चा
बैठक का प्रमुख केंद्र बिंदु हैदराबाद पुलिस द्वारा हाल ही में संचालित 'ऑपरेशन ऑक्टोपस' और उससे मिली प्रमुख सीखें रहीं। इस अभियान के तहत फर्जी बैंक खातों के एक बड़े नेटवर्क का भंडाफोड़ किया गया था। डीएफएस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट में बताया कि साइबर-आधारित वित्तीय धोखाधड़ी से निपटने और ग्राहक सुरक्षा बढ़ाने के लिए समन्वित प्रयासों को मज़बूत करने पर विशेष जोर दिया गया।
सहयोग और त्वरित प्रतिक्रिया पर बल
बैठक में कानून प्रवर्तन एजेंसियों और बैंकों के बीच घनिष्ठ सहयोग, वास्तविक समय में खुफिया जानकारी साझा करने और त्वरित प्रतिक्रिया तंत्र स्थापित करने पर बल दिया गया। गौरतलब है कि साइबर धोखाधड़ी के मामलों में देरी से मिलने वाली सूचना अक्सर अपराधियों को रकम निकालने का मौका दे देती है, जिससे पीड़ितों को नुकसान उठाना पड़ता है।
राज्य स्तर पर जागरूकता की सलाह
डीएफएस सचिव ने राज्य स्तरीय बैंकर्स समितियों को सलाह दी कि वे बैंकों द्वारा साइबर वित्तीय धोखाधड़ी रोकने के लिए उठाए गए कदमों से राज्य पुलिस अधिकारियों को अवगत कराएं और व्यापक जन जागरूकता अभियान चलाएं। हैदराबाद पुलिस आयुक्त सज्जनार ने बताया कि उन्होंने पिछले सप्ताह बैंकिंग प्रणाली में महत्वपूर्ण सुधारों का सुझाव दिया था, और उनके अनुसार देश भर में सक्रिय संगठित गिरोहों को खत्म करने के लिए ऐसे सुधार अनिवार्य हैं।
आगे क्या होगा
MuleHunter.AI टूल को बड़े पैमाने पर अपनाने से बैंकों की यह क्षमता बढ़ेगी कि वे संदिग्ध लेनदेन पैटर्न को स्वचालित रूप से चिह्नित कर सकें। यह ऐसे समय में आया है जब भारत में डिजिटल भुगतान का विस्तार तेज़ी से हो रहा है और साइबर अपराधी इसी का फायदा उठाकर फर्जी खातों के ज़रिए धन शोधन कर रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि AI-आधारित निगरानी और एजेंसियों के बीच रियल-टाइम डेटा साझाकरण मिलकर इस चुनौती से प्रभावी ढंग से निपट सकते हैं।