पश्चिम बंगाल चुनाव बाद हिंसा रोकने के लिए चुनाव आयोग सतर्क, 4 मई मतगणना से पहले कड़ी निगरानी
सारांश
Key Takeaways
चुनाव आयोग (Election Commission of India) ने पश्चिम बंगाल में चुनाव के बाद होने वाली हिंसा को रोकने के लिए राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) के कार्यालय को स्थिति पर कड़ी नजर रखने का निर्देश दिया है। 30 अप्रैल को जारी इस निर्देश के बाद मुख्य चुनाव अधिकारी मनोज अग्रवाल ने जिला मजिस्ट्रेटों और पुलिस अधीक्षकों के साथ एक वर्चुअल बैठक की। यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब 4 मई को मतगणना होनी है और राज्य के विभिन्न जिलों से छिटपुट राजनीतिक झड़पों की खबरें आ रही हैं।
मुख्य घटनाक्रम
बुधवार को विधानसभा चुनावों का दूसरा और अंतिम चरण संपन्न होने के बाद राज्य के अलग-अलग जिलों में छिटपुट झड़पों की सूचनाएँ मिलीं। इसे देखते हुए CEO कार्यालय के एक सूत्र ने बताया कि आयोग ने पहले से ही आवश्यक एहतियाती कदम उठा लिए थे। आयोग के अधिकारियों के अनुसार, पुलिस ने पहले चरण से पहले लगभग दो हज़ार कथित 'बदमाशों' को गिरफ्तार किया था और दूसरे चरण से पहले भी लगभग उतने ही लोगों को हिरासत में लिया गया था।
गौरतलब है कि ये गिरफ्तार लोग पिछले चुनावों के दौरान कई इलाकों में भय का माहौल बनाने के लिए जाने जाते थे। इन कदमों के परिणामस्वरूप मतदान प्रक्रिया काफी हद तक शांतिपूर्ण रही। हालाँकि, अधिकारियों ने चेताया है कि यदि ये लोग जमानत पर रिहा होते हैं, तो फिर से अशांति फैलने का खतरा बना रह सकता है।
2021 की हिंसा की पृष्ठभूमि
2021 के विधानसभा चुनावों के बाद कोलकाता समेत राज्य के कई जिलों में व्यापक चुनाव-पश्चात हिंसा के आरोप सामने आए थे। कलकत्ता उच्च न्यायालय में हत्या, बलात्कार और आगजनी सहित विभिन्न अपराधों की करीब 1,979 शिकायतें दर्ज की गई थीं। उच्च न्यायालय के आदेश पर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने जाँच के बाद एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार की थी और न्यायालय ने राज्य सरकार से जवाब माँगा था।
हत्या और बलात्कार जैसे गंभीर मामलों में केंद्रीय जाँच ब्यूरो (CBI) को जाँच का आदेश भी दिया गया था। चुनाव-पश्चात हिंसा के कई मामले अभी भी विभिन्न न्यायालयों में लंबित हैं। यह ऐसे समय में आया है जब राष्ट्रीय स्तर पर चुनावी हिंसा एक संवेदनशील राजनीतिक मुद्दा बनी हुई है।
आयोग की तैयारी और निगरानी
CEO कार्यालय ने गुरुवार को जिला मजिस्ट्रेटों और पुलिस अधीक्षकों के साथ वर्चुअल बैठक कर स्थिति का जायजा लिया। मनोज अग्रवाल ने अधिकारियों को सतर्क रहने और किसी भी अप्रिय घटना पर तत्काल कार्रवाई करने के निर्देश दिए। आयोग के सूत्रों के अनुसार, यह निगरानी तंत्र 4 मई की मतगणना तक जारी रहेगा।
आम जनता पर असर
राज्य के उन जिलों में जहाँ 2021 में हिंसा की घटनाएँ हुई थीं, स्थानीय निवासियों में अभी भी आशंका बनी हुई है। सुरक्षा बलों की तैनाती और एहतियाती गिरफ्तारियों से आम मतदाताओं को कुछ राहत मिली है, लेकिन मतगणना के बाद की स्थिति पर सबकी नजर टिकी है।
आगे क्या होगा
चुनाव आयोग की निगरानी 4 मई को मतगणना तक और उसके बाद भी जारी रहने की संभावना है। लंबित न्यायिक मामलों के मद्देनजर किसी भी नई हिंसा की घटना पर न्यायालयों की प्रतिक्रिया भी महत्त्वपूर्ण होगी। यह देखना बाकी है कि क्या इस बार की एहतियाती कार्रवाइयाँ 2021 जैसी स्थिति को दोहराने से रोक पाएँगी।