मध्यप्रदेश: सीएम मोहन यादव ने लॉन्च किया सीएम किसान हेल्पलाइन 155253, कृषक कल्याण वर्ष में 16 विभाग एकजुट

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मध्यप्रदेश: सीएम मोहन यादव ने लॉन्च किया सीएम किसान हेल्पलाइन 155253, कृषक कल्याण वर्ष में 16 विभाग एकजुट

सारांश

मध्यप्रदेश सरकार ने कृषक कल्याण वर्ष 2026 के तहत सीएम किसान हेल्पलाइन 155253 लॉन्च की, 16 विभागों के 1,627 अधिकारियों को एकजुट किया और गेहूं उपार्जन ₹2,625 प्रति क्विंटल तय किया। डिजिटल डैशबोर्ड, नदी जोड़ो परियोजनाएँ और एग्री वेस्ट मैनेजमेंट मिलकर किसानों की आय बढ़ाने की बड़ी कोशिश है।

Key Takeaways

सीएम किसान हेल्पलाइन (टोल फ्री 155253) का शुभारंभ 30 अप्रैल 2026 को भोपाल में हुआ। कृषक कल्याण वर्ष 2026 में 16 विभागों के 1,627 अधिकारी समन्वित रूप से किसान सशक्तिकरण में जुटे। राज्य सरकार गेहूं उपार्जन ₹2,625 प्रति क्विंटल की दर से कर रही है; दूध पर ₹7-8 प्रति लीटर अधिक मूल्य मिल रहा है। केन-बेतवा और पीकेसी (पार्वती-कालीसिंध-चंबल) परियोजनाओं की लागत का 90% केंद्र सरकार वहन कर रही है। सिंचाई विस्तार से किसान अब वर्ष में 2 के स्थान पर 3 फसलें लेने में सक्षम। मुख्यमंत्री किसान कल्याण डैशबोर्ड और पैक्स सदस्यता वृद्धि महाअभियान भी लॉन्च किए गए।

मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 30 अप्रैल 2026 को भोपाल के रवींद्र भवन में आयोजित कृषि कर्मयोगी उन्मुखीकरण कार्यशाला में सीएम किसान हेल्पलाइन (टोल फ्री नंबर 155253) सहित कई डिजिटल पहलों का शुभारंभ किया। कृषक कल्याण वर्ष 2026 के तहत राज्य के 16 विभाग समन्वित रूप से किसानों की आय वृद्धि और सशक्तिकरण के लिए कार्यरत हैं।

कार्यशाला में क्या-क्या लॉन्च हुआ

इस अवसर पर तीन प्रमुख सूचना प्रौद्योगिकी आधारित प्रणालियों की शुरुआत की गई — मुख्यमंत्री किसान कल्याण डैशबोर्ड, पैक्स समितियों में सदस्यता वृद्धि महाअभियान और सीएम किसान हेल्पलाइन। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने स्वयं हेल्पलाइन से जुड़कर कृषि संबंधी जानकारी प्राप्त की और इसकी उपयोगिता का अवलोकन किया।

कृषि सचिव निशांत वरवड़े ने बताया कि इस कार्यशाला में राज्य के सभी 55 जिलों, विकासखंड, क्लस्टर स्तर और ग्राम पंचायतों से कृषि से जुड़े 16 विभागों के 1,627 चुनिंदा अधिकारियों और कर्मचारियों को आमंत्रित किया गया। इनमें कृषि विभाग, सहकारिता, मत्स्य पालन, उद्यानिकी, कृषि विज्ञान केंद्र, मार्केटिंग फेडरेशन, बीज निगम और कृषि अभियांत्रिकी विभाग शामिल हैं।

किसानों के लिए प्रमुख घोषणाएँ

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि इस वर्ष राज्य सरकार किसानों से ₹2,625 प्रति क्विंटल की दर से गेहूं उपार्जित कर रही है। इसके अतिरिक्त, उड़द की फसल पर भी समर्थन मूल्य के साथ अतिरिक्त लाभ देने की शुरुआत की गई है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में किसानों को प्रति लीटर दूध पर पहले की तुलना में ₹7 से ₹8 तक अधिक मूल्य मिल रहा है, जो नेशनल डेयरी डेवलपमेंट बोर्ड (NDDB) के सहयोग से संभव हुआ है।

गौरतलब है कि नहरों और विद्युत सुविधाओं के विस्तार से अब किसान वर्ष में 2 के स्थान पर 3 फसलें लेने में सक्षम हो रहे हैं। एग्री वेस्ट मैनेजमेंट के तहत मक्के के डंठल, गेहूं और धान की नरवाई से भूसा बनाकर किसान अतिरिक्त आय अर्जित कर रहे हैं।

नदी जोड़ो परियोजनाएँ और सिंचाई विस्तार

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में मध्यप्रदेश को तीन नदी जोड़ो परियोजनाओं की सौगात मिली है। केन-बेतवा लिंक परियोजना से बुंदेलखंड लाभान्वित होगा, जबकि पार्वती-कालीसिंध-चंबल (पीकेसी) परियोजना से मध्यप्रदेश और राजस्थान के अनेक जिलों को सिंचाई सुविधा मिलेगी। केंद्र सरकार ने इन परियोजनाओं की लागत का 90 प्रतिशत वहन किया है।

यह ऐसे समय में आया है जब बुंदेलखंड क्षेत्र लंबे समय से जल संकट और कृषि संकट से जूझता रहा है। पीकेसी परियोजना पर सहमति के लिए राजस्थान के 15 जिलों के लोग मध्यप्रदेश सरकार के प्रति आभार व्यक्त कर रहे हैं।

कृषि मंत्री और अधिकारियों की प्रतिक्रिया

कृषि मंत्री एदल सिंह कंषाना ने कहा कि हर जिले में कृषि मेले आयोजित किए जा रहे हैं और मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने उसी दिन गेहूं उपार्जन केंद्रों का औचक निरीक्षण भी किया। उन्होंने कहा कि सभी कृषि कर्मयोगियों के सहयोग से किसान हितैषी योजनाओं को जमीनी स्तर पर उतारा जा रहा है।

कृषि सचिव निशांत वरवड़े ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने लोकसेवकों को 'कर्मयोगी' की संज्ञा दी है और इसी भावना से अधिकारियों को किसानों की समस्याओं का बिना देरी समाधान करने के लिए प्रेरित किया जा रहा है।

आगे की राह

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने युवाओं को खेती की ओर आकर्षित करने पर विशेष बल दिया और इज़राइल के कृषि मॉडल का उदाहरण देते हुए कहा कि सीमित संसाधनों में भी आधुनिक तकनीक से खेती को लाभकारी व्यवसाय बनाया जा सकता है। कृषि कर्मयोगी उन्मुखीकरण कार्यशाला में अलग-अलग सत्रों के माध्यम से अधिकारियों को नवीन तकनीकों और नवाचारों से अवगत कराया जा रहा है, जिससे किसानों तक योजनाओं का लाभ तेज़ी से पहुँच सके।

Point of View

लेकिन असली कसौटी क्रियान्वयन की होगी। मध्यप्रदेश में पिछले वर्षों में भी कई किसान हेल्पलाइन और पोर्टल लॉन्च हुए, जिनकी जमीनी उपयोगिता सीमित रही। 16 विभागों के 1,627 अधिकारियों का समन्वय प्रशंसनीय है, परंतु बिना जवाबदेही तंत्र और स्वतंत्र निगरानी के, यह आँकड़े कागज़ी उपलब्धि बनकर रह सकते हैं। गेहूं उपार्जन दर और दूध मूल्य में वृद्धि ठोस कदम हैं — इन्हें मापने योग्य किसान आय सूचकांक से जोड़ा जाए तो नीति की विश्वसनीयता और बढ़ेगी।
NationPress
30/04/2026

Frequently Asked Questions

सीएम किसान हेल्पलाइन का नंबर क्या है और इससे क्या मदद मिलेगी?
सीएम किसान हेल्पलाइन का टोल फ्री नंबर 155253 है। इसके ज़रिए किसानों को कृषि संबंधी त्वरित मार्गदर्शन और सहायता उपलब्ध होगी।
मध्यप्रदेश में कृषक कल्याण वर्ष 2026 क्या है?
कृषक कल्याण वर्ष 2026 मध्यप्रदेश सरकार की वह पहल है जिसमें वर्ष 2026 को किसानों के सशक्तिकरण और आय वृद्धि के लिए समर्पित किया गया है। इसमें कृषि, उद्यानिकी, सहकारिता, पशुपालन सहित 16 विभाग एकजुट होकर कार्य कर रहे हैं।
मध्यप्रदेश में इस वर्ष गेहूं का समर्थन मूल्य क्या है?
राज्य सरकार इस वर्ष किसानों से ₹2,625 प्रति क्विंटल की दर से गेहूं उपार्जित कर रही है। इसके अलावा उड़द की फसल पर भी समर्थन मूल्य के साथ अतिरिक्त लाभ देने की शुरुआत की गई है।
केन-बेतवा और पीकेसी परियोजना से मध्यप्रदेश को क्या फायदा होगा?
केन-बेतवा लिंक परियोजना से बुंदेलखंड क्षेत्र को सिंचाई सुविधा मिलेगी, जबकि पार्वती-कालीसिंध-चंबल (पीकेसी) परियोजना से मध्यप्रदेश और राजस्थान के अनेक जिले लाभान्वित होंगे। केंद्र सरकार ने इन परियोजनाओं की लागत का 90 प्रतिशत वहन किया है।
कृषि कर्मयोगी उन्मुखीकरण कार्यशाला में कितने अधिकारी शामिल हुए?
इस कार्यशाला में मध्यप्रदेश के सभी 55 जिलों, विकासखंड, क्लस्टर स्तर और ग्राम पंचायतों से 16 विभागों के 1,627 चुनिंदा अधिकारियों और कर्मचारियों को आमंत्रित किया गया। कार्यशाला में अलग-अलग सत्रों के माध्यम से नवीन तकनीकों पर मंथन किया गया।
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