मध्यप्रदेश: सीएम मोहन यादव ने लॉन्च किया सीएम किसान हेल्पलाइन 155253, कृषक कल्याण वर्ष में 16 विभाग एकजुट
सारांश
Key Takeaways
मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 30 अप्रैल 2026 को भोपाल के रवींद्र भवन में आयोजित कृषि कर्मयोगी उन्मुखीकरण कार्यशाला में सीएम किसान हेल्पलाइन (टोल फ्री नंबर 155253) सहित कई डिजिटल पहलों का शुभारंभ किया। कृषक कल्याण वर्ष 2026 के तहत राज्य के 16 विभाग समन्वित रूप से किसानों की आय वृद्धि और सशक्तिकरण के लिए कार्यरत हैं।
कार्यशाला में क्या-क्या लॉन्च हुआ
इस अवसर पर तीन प्रमुख सूचना प्रौद्योगिकी आधारित प्रणालियों की शुरुआत की गई — मुख्यमंत्री किसान कल्याण डैशबोर्ड, पैक्स समितियों में सदस्यता वृद्धि महाअभियान और सीएम किसान हेल्पलाइन। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने स्वयं हेल्पलाइन से जुड़कर कृषि संबंधी जानकारी प्राप्त की और इसकी उपयोगिता का अवलोकन किया।
कृषि सचिव निशांत वरवड़े ने बताया कि इस कार्यशाला में राज्य के सभी 55 जिलों, विकासखंड, क्लस्टर स्तर और ग्राम पंचायतों से कृषि से जुड़े 16 विभागों के 1,627 चुनिंदा अधिकारियों और कर्मचारियों को आमंत्रित किया गया। इनमें कृषि विभाग, सहकारिता, मत्स्य पालन, उद्यानिकी, कृषि विज्ञान केंद्र, मार्केटिंग फेडरेशन, बीज निगम और कृषि अभियांत्रिकी विभाग शामिल हैं।
किसानों के लिए प्रमुख घोषणाएँ
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि इस वर्ष राज्य सरकार किसानों से ₹2,625 प्रति क्विंटल की दर से गेहूं उपार्जित कर रही है। इसके अतिरिक्त, उड़द की फसल पर भी समर्थन मूल्य के साथ अतिरिक्त लाभ देने की शुरुआत की गई है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में किसानों को प्रति लीटर दूध पर पहले की तुलना में ₹7 से ₹8 तक अधिक मूल्य मिल रहा है, जो नेशनल डेयरी डेवलपमेंट बोर्ड (NDDB) के सहयोग से संभव हुआ है।
गौरतलब है कि नहरों और विद्युत सुविधाओं के विस्तार से अब किसान वर्ष में 2 के स्थान पर 3 फसलें लेने में सक्षम हो रहे हैं। एग्री वेस्ट मैनेजमेंट के तहत मक्के के डंठल, गेहूं और धान की नरवाई से भूसा बनाकर किसान अतिरिक्त आय अर्जित कर रहे हैं।
नदी जोड़ो परियोजनाएँ और सिंचाई विस्तार
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में मध्यप्रदेश को तीन नदी जोड़ो परियोजनाओं की सौगात मिली है। केन-बेतवा लिंक परियोजना से बुंदेलखंड लाभान्वित होगा, जबकि पार्वती-कालीसिंध-चंबल (पीकेसी) परियोजना से मध्यप्रदेश और राजस्थान के अनेक जिलों को सिंचाई सुविधा मिलेगी। केंद्र सरकार ने इन परियोजनाओं की लागत का 90 प्रतिशत वहन किया है।
यह ऐसे समय में आया है जब बुंदेलखंड क्षेत्र लंबे समय से जल संकट और कृषि संकट से जूझता रहा है। पीकेसी परियोजना पर सहमति के लिए राजस्थान के 15 जिलों के लोग मध्यप्रदेश सरकार के प्रति आभार व्यक्त कर रहे हैं।
कृषि मंत्री और अधिकारियों की प्रतिक्रिया
कृषि मंत्री एदल सिंह कंषाना ने कहा कि हर जिले में कृषि मेले आयोजित किए जा रहे हैं और मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने उसी दिन गेहूं उपार्जन केंद्रों का औचक निरीक्षण भी किया। उन्होंने कहा कि सभी कृषि कर्मयोगियों के सहयोग से किसान हितैषी योजनाओं को जमीनी स्तर पर उतारा जा रहा है।
कृषि सचिव निशांत वरवड़े ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने लोकसेवकों को 'कर्मयोगी' की संज्ञा दी है और इसी भावना से अधिकारियों को किसानों की समस्याओं का बिना देरी समाधान करने के लिए प्रेरित किया जा रहा है।
आगे की राह
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने युवाओं को खेती की ओर आकर्षित करने पर विशेष बल दिया और इज़राइल के कृषि मॉडल का उदाहरण देते हुए कहा कि सीमित संसाधनों में भी आधुनिक तकनीक से खेती को लाभकारी व्यवसाय बनाया जा सकता है। कृषि कर्मयोगी उन्मुखीकरण कार्यशाला में अलग-अलग सत्रों के माध्यम से अधिकारियों को नवीन तकनीकों और नवाचारों से अवगत कराया जा रहा है, जिससे किसानों तक योजनाओं का लाभ तेज़ी से पहुँच सके।