झालावाड़ में सूदखोर गिरफ्तार: 3 साल में ₹5.86 करोड़ की अवैध वसूली, 521 खाली चेक और 178 स्टैंप पेपर जब्त

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झालावाड़ में सूदखोर गिरफ्तार: 3 साल में ₹5.86 करोड़ की अवैध वसूली, 521 खाली चेक और 178 स्टैंप पेपर जब्त

सारांश

झालावाड़ के अकलेरा में पुलिस ने एक सुनियोजित सूदखोरी रैकेट का भंडाफोड़ किया। आरोपी सुगनचंद ने तीन साल में ₹5.86 करोड़ की अवैध वसूली की — पहले छोटे कर्ज देकर भरोसा जीता, फिर 'डांडी ब्याज' से बकाया कई गुना बढ़ाया और गुर्गों के नेटवर्क से पीड़ितों को डराया।

Key Takeaways

अकलेरा पुलिस ने 30 अप्रैल 2026 को सूदखोर सुगनचंद (44) को गिरफ्तार किया। तीन साल में कुल ₹5.86 करोड़ की अवैध ब्याज वसूली — 2023 में ₹1.46 करोड़, 2024 में ₹1.83 करोड़, 2025 में ₹2.56 करोड़। जब्त सामग्री में 521 खाली चेक , 178 स्टैंप पेपर , 14 लोन रजिस्टर , 143 डायरी और 2,916 हिसाब पर्चियाँ शामिल। आरोपी पर हत्या की कोशिश, मारपीट और धोखाधड़ी समेत कई पूर्व आपराधिक मामले दर्ज। एसपी अमित कुमार के निर्देश पर गठित विशेष टीम अब साथियों और अन्य पीड़ितों की तलाश में जुटी।

राजस्थान के झालावाड़ जिले की अकलेरा पुलिस ने 30 अप्रैल 2026 को एक कुख्यात सूदखोर को गिरफ्तार किया, जो कथित तौर पर 'ब्याज पर ब्याज' (डांडी ब्याज) की शोषणकारी प्रथा के जरिए कमजोर लोगों को कर्ज के दुष्चक्र में फंसाता था। पुलिस ने आरोपी के पास से ₹5.86 करोड़ के अवैध वित्तीय लेन-देन के रिकॉर्ड, 521 दस्तखत किए हुए खाली चेक और 178 स्टैंप पेपर समेत भारी मात्रा में दस्तावेज जब्त किए हैं।

मामले की शुरुआत कैसे हुई

28 अप्रैल 2026 को अक्लेरा के आदर्श नगर निवासी घनश्याम शर्मा ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। शर्मा ने आरोप लगाया कि आरोपी ने उन्हें कर्ज के जाल में फंसाया, लगातार बकाया राशि बढ़ाता रहा और विरोध करने पर धमकियाँ देकर मानसिक रूप से प्रताड़ित किया। शिकायत के आधार पर मामला दर्ज कर जाँच शुरू की गई।

विशेष टीम का गठन और गिरफ्तारी

मामले की गंभीरता को देखते हुए झालावाड़ के पुलिस अधीक्षक (एसपी) अमित कुमार और अतिरिक्त एसपी भगचंद मीणा के निर्देश पर एक विशेष टीम बनाई गई, जिसकी निगरानी डिप्टी एसपी बृजेश कुमार जाट ने की। थाना प्रभारी (एसएचओ) धर्मराज के नेतृत्व में टीम ने खुफिया जानकारी के आधार पर कार्रवाई करते हुए आरोपी सुगनचंद (44 वर्ष) को गिरफ्तार किया। सुगनचंद मूल रूप से खुरी का रहने वाला है और वर्तमान में अक्लेरा की नई बस्ती में रह रहा था।

कैसे चलता था सूदखोरी का रैकेट

प्रारंभिक जाँच के अनुसार, आरोपी पहले भरोसा जीतने के लिए छोटे-छोटे कर्ज देता था और फिर उन पर 'डांडी ब्याज' लगाकर बकाया राशि कई गुना बढ़ा देता था। देरी होने पर अतिरिक्त जुर्माना भी लगाया जाता था। वसूली के लिए 10-12 साथियों का एक नेटवर्क कर्जदारों को डराने-धमकाने का काम करता था। वित्तीय रिकॉर्ड से पता चलता है कि 2023 में ₹1.46 करोड़, 2024 में ₹1.83 करोड़ और 2025 में ₹2.56 करोड़ की अवैध वसूली हुई — तीन वर्षों में कुल ₹5.86 करोड़

जब्त किए गए दस्तावेज और सबूत

छापेमारी के दौरान पुलिस ने 178 स्टैंप पेपर (जिनमें से 38 पर दस्तखत थे और वे खाली थे), 521 दस्तखत किए हुए खाली चेक, 14 लोन रजिस्टर, 143 डायरी, 2,916 हिसाब की पर्चियाँ और जमीन-जायदाद के 26 सौदों से जुड़े दस्तावेज जब्त किए। अधिकारियों के अनुसार ये दस्तावेज एक बड़े अवैध ऋण नेटवर्क के ठोस सबूत हैं।

आरोपी का आपराधिक इतिहास और आगे की जाँच

पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, सुगनचंद पर हत्या की कोशिश, मारपीट, धोखाधड़ी और अन्य गंभीर अपराधों से जुड़े पूर्व मामले दर्ज हैं। अधिकारी अब उसके साथियों की पहचान करने, वित्तीय संपर्कों का पता लगाने और अन्य पीड़ितों को खोजने में जुटे हैं। पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि अवैध साहूकारी, अत्यधिक ब्याज वसूली या वित्तीय शोषण की किसी भी जानकारी को तुरंत पुलिस तक पहुँचाएँ।

Point of View

जिस पर औपचारिक बैंकिंग की पहुँच न होने के कारण कमजोर वर्ग सबसे ज्यादा निर्भर रहता है। 521 खाली चेक और 178 स्टैंप पेपर जैसे दस्तावेज बताते हैं कि यह महज एक व्यक्ति का धंधा नहीं, बल्कि एक सुनियोजित वित्तीय जाल था। सवाल यह है कि तीन साल तक ₹5.86 करोड़ की वसूली होती रही और तंत्र तब जागा जब एक पीड़ित ने साहस दिखाकर शिकायत की — यह निगरानी की खामी को भी रेखांकित करता है। जब तक ग्रामीण क्षेत्रों में सस्ते औपचारिक ऋण की पहुँच नहीं बढ़ती, ऐसे रैकेट पनपते रहेंगे।
NationPress
30/04/2026

Frequently Asked Questions

झालावाड़ में गिरफ्तार सूदखोर सुगनचंद पर क्या आरोप हैं?
सुगनचंद पर 'ब्याज पर ब्याज' (डांडी ब्याज) वसूलकर कर्जदारों को आर्थिक रूप से बर्बाद करने और साथियों के जरिए धमकी देने का आरोप है। पुलिस के अनुसार उसने 2023 से 2025 के बीच ₹5.86 करोड़ की अवैध वसूली की।
अकलेरा पुलिस ने छापेमारी में क्या-क्या जब्त किया?
पुलिस ने 521 दस्तखत किए हुए खाली चेक, 178 स्टैंप पेपर, 14 लोन रजिस्टर, 143 डायरी, 2,916 हिसाब पर्चियाँ और जमीन-जायदाद के 26 सौदों के दस्तावेज जब्त किए। अधिकारियों के अनुसार ये सभी एक बड़े अवैध ऋण नेटवर्क के सबूत हैं।
डांडी ब्याज क्या होता है और यह कैसे काम करता है?
डांडी ब्याज एक अवैध कंपाउंड इंटरेस्ट प्रणाली है जिसमें मूल राशि पर लगाए गए ब्याज पर फिर से ब्याज जोड़ा जाता है। इससे थोड़े समय में कर्ज कई गुना बढ़ जाता है और कर्जदार चाहकर भी उससे मुक्त नहीं हो पाता।
इस मामले की जाँच किस पुलिस टीम ने की?
एसपी अमित कुमार और अतिरिक्त एसपी भगचंद मीणा के निर्देश पर डिप्टी एसपी बृजेश कुमार जाट की निगरानी में विशेष टीम बनाई गई। एसएचओ धर्मराज के नेतृत्व में अकलेरा पुलिस ने यह ऑपरेशन अंजाम दिया।
क्या पुलिस अन्य पीड़ितों की भी जाँच कर रही है?
हाँ, अधिकारियों के अनुसार पुलिस अब आरोपी के साथियों की पहचान, उसके वित्तीय संपर्कों का पता लगाने और अन्य पीड़ितों को खोजने का काम कर रही है। नागरिकों से अपील की गई है कि वे अवैध साहूकारी की जानकारी पुलिस को दें।
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