सीबीआई ने ‘डिजिटल अरेस्ट’ साइबर ठगी के मामले में चार्जशीट दायर की, आरोपी गिरफ्तार
सारांश
Key Takeaways
- सीबीआई ने ‘डिजिटल अरेस्ट’ मामले में चार्जशीट पेश की।
- आरोपी को गिरफ्तार किया गया है।
- सतर्क रहें, धोखाधड़ी से बचें।
- कोई भी संदिग्ध कॉल पर भरोसा न करें।
- फर्जी योजनाओं के प्रति सजग रहें।
नई दिल्ली, 4 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने दिल्ली में घटित ‘डिजिटल अरेस्ट’ साइबर ठगी मामले में एक संदिग्ध और उसकी कंपनी के खिलाफ चार्जशीट प्रस्तुत की है।
यह मामला सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश के तहत सीबीआई को जांच के लिए सौंपा गया था। आरोपी पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है और वर्तमान में वह न्यायिक हिरासत में है।
जांच में यह स्पष्ट हुआ है कि आरोपी और उसकी कंपनी के बैंक खाते का उपयोग ठगी की राशि प्राप्त करने के लिए किया गया था। यह धनराशि एक वरिष्ठ नागरिक को निशाना बनाकर किए गए ‘डिजिटल अरेस्ट’ नामक साइबर धोखाधड़ी से संबंधित थी।
इस घटना में आरोपी और उसके सहयोगियों ने स्वयं को कानून प्रवर्तन एजेंसियों और न्यायिक अधिकारियों के रूप में प्रस्तुत किया और फर्जी नोटिस और वीडियो कॉल के माध्यम से पीड़ित को भयभीत कर लगभग 23 करोड़ रुपये की ठगी की थी।
जांच एजेंसियों के अनुसार, इसी बैंक खाते का उपयोग देश के विभिन्न हिस्सों में कम से कम दो अन्य साइबर ठगी मामलों में भी किया गया था। इस खाते के माध्यम से अपराध से प्राप्त धन को जमा किया जाता था, जिसे बाद में ‘म्यूल खातों’ के नेटवर्क के जरिए निकाल लिया जाता था।
सीबीआई ने कहा है कि वह उन सभी व्यक्तियों और संगठनों के खिलाफ कठोर कदम उठा रही है, जो बैंकिंग प्रणाली का दुरुपयोग करके साइबर अपराधियों की सहायता करते हैं।
इसके अलावा, सीबीआई ने आम जन को चेतावनी दी है कि वे ‘डिजिटल अरेस्ट’ जैसी किसी भी धोखाधड़ी से सजग रहें। एजेंसी ने स्पष्ट किया है कि ऐसी कोई कानूनी प्रक्रिया नहीं है। नागरिकों से अपील की गई है कि ऐसे किसी भी कॉल या संदेश पर विश्वास न करें और न ही भयभीत हों।
सीबीआई ने यह भी सलाह दी है कि लोग फर्जी निवेश योजनाओं और सरकारी या कानून प्रवर्तन एजेंसियों के नाम पर आने वाले संदिग्ध कॉल्स से सावधान रहें। किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत संबंधित अधिकारियों या साइबर अपराध पोर्टल पर दी जानी चाहिए।