पटना हाईकोर्ट ने वायु और ध्वनि प्रदूषण पर बीएसपीसीबी और पुलिस को दी फटकार

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पटना हाईकोर्ट ने वायु और ध्वनि प्रदूषण पर बीएसपीसीबी और पुलिस को दी फटकार

सारांश

पटना हाईकोर्ट ने प्रदूषण पर कड़ी नाराजगी जताते हुए अधिकारियों की विफलता पर सवाल उठाए। कोर्ट ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि प्रदूषण नियंत्रण के लिए सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए।

Key Takeaways

  • पटना हाईकोर्ट ने प्रदूषण पर कड़ी नाराजगी व्यक्त की।
  • बीएसपीसीबी और पुलिस के कार्यों की जांच हुई।
  • अदालत ने कड़े निर्देश दिए हैं।
  • उल्लंघन की स्थिति में त्वरित कार्रवाई का आदेश दिया गया।
  • सभी एसएचओ को अनुपालन रिपोर्ट पेश करने का निर्देश।

पटना, 10 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। पटना हाईकोर्ट ने शुक्रवार को शहर में वायु और ध्वनि प्रदूषण के बढ़ते स्तर पर गहरी चिंता व्यक्त की और अधिकारियों को मौजूदा नियमों के अनुपालन में विफलता पर कड़ी फटकार लगाई।

सुनवाई के दौरान, जस्टिस राजीव रॉय की अध्यक्षता वाली एकल न्यायाधीश पीठ ने यह स्पष्ट किया कि बिहार राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (बीएसपीसीबी) शहर में प्रदूषण की समस्या को हल करने में पूर्णतः असफल रहा है।

बीएसपीसीबी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता शिवेंद्र किशोर ने एक 'की गई कार्रवाई की रिपोर्ट' प्रस्तुत की, जिसमें कहा गया कि शादी के हॉल को नोटिस जारी किए गए और निर्माण स्थलों पर हरे जाल लगाने का निर्देश दिया गया।

हालांकि, न्याय मित्र अजय कुमार ने इन दावों पर संदेह व्यक्त किया, और बताया कि नगर निकायों को भेजे गए संदेशों का कोई ठोस रिकॉर्ड नहीं है।

कोर्ट ने पुलिस के कार्यों की भी जांच की। रूपसपुर पुलिस स्टेशन ने जानकारी प्राप्त करने में देरी का हवाला दिया, जबकि कदमकुआं पुलिस स्टेशन ने स्वीकार किया कि एक डीजे ऑपरेटर के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई थी, लेकिन संबंधित वाहन की पंजीकरण जानकारी उपलब्ध नहीं थी।

अदालत ने असंतोष व्यक्त करते हुए पूछा कि संबंधित पुलिस अधिकारियों के खिलाफ अवमानना की कार्यवाही क्यों नहीं की जानी चाहिए।

राज्य के वकील प्रशांत प्रताप के अनुरोध पर, अदालत ने निर्देशों का पालन करने के लिए अंतिम अवसर दिया।

कंकड़बाग, पीरबहोर, आलमगंज, रूपसपुर, गांधी मैदान और बुद्धा कॉलोनी के पुलिस स्टेशनों से प्राप्त रिपोर्टें असंतोषजनक पाई गईं, और अदालत ने संबंधित स्टेशन हाउस अधिकारियों (एसएचओ) को कड़ी फटकार लगाई।

अदालत ने जोर देकर कहा कि लाउडस्पीकर अधिनियम, 1955 और ध्वनि प्रदूषण नियमों को केवल कागजों पर नहीं, बल्कि वास्तव में लागू होना चाहिए।

कड़े निर्देश देते हुए, अदालत ने आदेश दिया कि शादी के जुलूसों (बारातों) और अन्य आयोजनों के दौरान डीजे और लाउडस्पीकरों की वीडियोग्राफी की जानी चाहिए, बिना जुलूस में बाधा डाले। उल्लंघन पाए जाने पर तुरंत कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए।

सभी छह एसएचओ को 19 जून को अनुपालन रिपोर्ट के साथ अदालत में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने का निर्देश दिया गया है।

अदालत ने अधिकारियों को 'प्रदूषण के लिए दौड़' जागरूकता अभियान आयोजित करने का निर्देश दिया और राजीव नगर और छपरा सदर में ध्वनि मानदंडों के उल्लंघन पर स्पष्टीकरण मांगा।

अदालत ने दोहराया कि लाउडस्पीकर अधिनियम के तहत, रात 10.00 बजे से सुबह 6.00 बजे के बीच बिना अनुमति के लाउडस्पीकर का उपयोग प्रतिबंधित है, और पुलिस को उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई का अधिकार है।

Point of View

यह स्पष्ट है कि प्रदूषण की समस्या गंभीर है और इसे संबोधित करने की आवश्यकता है। कोर्ट की टिप्पणियाँ इस बात का संकेत हैं कि सरकारी तंत्र को अपनी जिम्मेदारियों का सही ढंग से पालन करना चाहिए।
NationPress
12/04/2026

Frequently Asked Questions

पटना हाईकोर्ट ने अधिकारियों को क्यों फटकारा?
पटना हाईकोर्ट ने वायु और ध्वनि प्रदूषण के बढ़ते स्तर पर कड़ी नाराजगी जताते हुए अधिकारियों की विफलता पर फटकार लगाई।
क्या कार्रवाई की गई है?
अदालत ने अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए हैं कि प्रदूषण नियंत्रण के नियमों का सख्ती से पालन किया जाए।
किस तरह की कार्रवाई की जाएगी?
अदालत ने डीजे और लाउडस्पीकरों की वीडियोग्राफी करने और उल्लंघन की स्थिति में त्वरित कानूनी कार्रवाई का आदेश दिया है।
अदालत ने कब तक रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया?
अदालत ने सभी संबंधित एसएचओ को 19 जून तक अनुपालन रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया है।
इस मामले का नागरिकों पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
इस आदेश से प्रदूषण नियंत्रण में सुधार की उम्मीद है, जिससे नागरिकों का जीवन बेहतर होगा।
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