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राजस्थान: सुंदरा गांव में नर्मदा जल का ऐतिहासिक आगमन, जीवन में बदलाव

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राजस्थान: सुंदरा गांव में नर्मदा जल का ऐतिहासिक आगमन, जीवन में बदलाव

सारांश

राजस्थान के बाड़मेर जिले के सुंदरा गांव में नर्मदा नदी का पानी पहुंचा है, जो आजादी के बाद पहली बार घरों में स्वच्छ पेयजल की उपलब्धता को सुनिश्चित करता है। यह बदलाव जन स्वास्थ्य, महिलाओं की स्थिति और जीवन गुणवत्ता में सुधार लाएगा।

मुख्य बातें

सुंदरा गांव में नल के माध्यम से स्वच्छ पेयजल की उपलब्धता हुई है।
नर्मदा जल का आगमन, विकास का प्रतीक है।
513 करोड़ की लागत से 200 से अधिक गांवों को पेयजल मिलेगा।
परियोजना ने क्षेत्र में जल संकट का समाधान किया है।
यह बदलाव महिलाओं के जीवन में सुधार लाने की उम्मीद जगाता है।

जयपुर, 10 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। एक ऐतिहासिक पल में, राजस्थान के बाड़मेर जिले के सुंदरा गांव में, जो भारत-पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय सीमा पर स्थित है, आजादी के बाद पहली बार घरों में नल के माध्यम से स्वच्छ पेयजल की उपलब्धता हुई है।

शुक्रवार को, अधिकारियों ने इस उपलब्धि की पुष्टि की, जो न केवल एक मूलभूत सुविधा की शुरुआत है, बल्कि दशकों की कठिनाइयों का समापन और आशा एवं सम्मान के नए अध्याय की शुरूआत भी है।

1734 में स्थापित सुंदरा, कभी देश की सबसे बड़ी ग्राम पंचायतों में से एक थी, जो लगभग 1,345 वर्ग किलोमीटर में फैली हुई थी।

जिला मुख्यालय से लगभग 170 किलोमीटर दूर स्थित इस दूरस्थ रेगिस्तानी इलाके में, जीवन लंबे समय से चरम परिस्थितियों और भीषण जल संकट से प्रभावित रहा है।

इस क्षेत्र का भूजल पारंपरिक रूप से अत्यधिक खारा रहा है, जिससे यह मानव और पशुधन दोनों के लिए अनुपयुक्त हो गया है।

सरकार द्वारा स्थापित ट्यूबवेल भी राहत प्रदान करने में विफल रहे, जिससे निवासियों को पीने योग्य पानी लाने के लिए पड़ोसी गांवों से 15 से 20 किलोमीटर की यात्रा करनी पड़ती है।

यह गांव 1965 और 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्धों के दौरान विस्थापन की विरासत झेल रहा है, जब इसकी सीमावर्ती स्थिति के कारण निवासियों को विस्थापित किया गया था।

तब से, समुदाय ने प्राकृतिक और भू-राजनीतिक दोनों चुनौतियों का सामना किया है। लंबे समय से चले आ रहे जल संकट का समाधान अब नर्मदा नहर-आधारित पेयजल परियोजना के माध्यम से किया गया है।

नर्मदा नदी पर बने सरदार सरोवर बांध का पानी 728 किलोमीटर की असाधारण दूरी तय करके सुंदरा पहुंचा है। लगभग 513 करोड़ रुपए की अनुमानित लागत से कार्यान्वित इस परियोजना का उद्देश्य 200 से अधिक गांवों को पेयजल उपलब्ध कराना है।

प्रमुख अवसंरचनाओं में 16 केंद्रीय जल भंडार, 80 से अधिक ऊंचे सेवा जलाशय और कई पंपिंग स्टेशन शामिल हैं।

रेत के टीलों पर पाइपलाइन बिछाने, बिजली की कमी और सीमावर्ती क्षेत्रों में सुरक्षा संबंधी प्रतिबंधों जैसी चुनौतियों के बावजूद, यह परियोजना सफल हो चुकी है।

सुंदरा के निवासियों के लिए नल के पानी की उपलब्धता एक क्रांतिकारी बदलाव है। बुजुर्ग ग्रामीणों को पहली बार अपने घर के दरवाजे पर स्वच्छ पेयजल मिल रहा है।

इस बदलाव से जन स्वास्थ्य में उल्लेखनीय सुधार होने, महिलाओं पर बोझ कम होने और जीवन की समग्र गुणवत्ता में वृद्धि होने की उम्मीद है।

सुंदरा में नर्मदा जल का आगमन समावेशी विकास का एक सशक्त प्रतीक है, जो दर्शाता है कि निरंतर प्रयास, योजना और नवाचार के माध्यम से सुदूरतम क्षेत्रों को भी रूपांतरित किया जा सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि यह एक नई उम्मीद और विकास की दिशा में कदम बढ़ाने का प्रतीक भी है। नर्मदा जल का आगमन, विकास के लिए एक सकारात्मक संकेत है।
RashtraPress
21 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सुंदरा गांव में पानी की समस्या कब खत्म हुई?
सुंदरा गांव में पानी की समस्या का समाधान नर्मदा नहर-आधारित परियोजना के माध्यम से हाल ही में हुआ है।
इस परियोजना की लागत क्या है?
इस परियोजना की अनुमानित लागत लगभग 513 करोड़ रुपए है।
क्या नर्मदा जल का उपयोग अन्य गांवों में भी होगा?
हाँ, इस परियोजना का उद्देश्य 200 से अधिक गांवों को पेयजल उपलब्ध कराना है।
सुंदरा गांव का इतिहास क्या है?
सुंदरा गांव 1734 में स्थापित हुआ और यह कभी देश की सबसे बड़ी ग्राम पंचायतों में से एक था।
इस परियोजना से स्थानीय लोगों पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
इस परियोजना से जन स्वास्थ्य में सुधार, महिलाओं पर बोझ में कमी तथा जीवन की गुणवत्ता में वृद्धि की उम्मीद है।
राष्ट्र प्रेस
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