भारत-यूएई के बीच 7 बड़े समझौते: ऊर्जा, रक्षा और तकनीक में साझेदारी, $5 अरब निवेश का ऐलान

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भारत-यूएई के बीच 7 बड़े समझौते: ऊर्जा, रक्षा और तकनीक में साझेदारी, $5 अरब निवेश का ऐलान

सारांश

पीएम मोदी की यूएई यात्रा महज शिष्टाचार भेंट नहीं थी — सात ठोस समझौते, $5 अरब का निवेश और आठ एक्सफ्लॉप सुपरकंप्यूटर क्लस्टर की घोषणा इसे एक रणनीतिक छलाँग बनाती है। ऊर्जा से लेकर रक्षा और तकनीक तक, भारत-यूएई साझेदारी अब एक नए स्तर पर पहुँच गई है।

मुख्य बातें

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की यूएई यात्रा के दौरान 15 मई 2026 को 7 बड़े समझौतों पर हस्ताक्षर हुए।
ISPRL और ADNOC के बीच रणनीतिक सहयोग समझौता — भारत की ऊर्जा सुरक्षा और पेट्रोलियम भंडार विस्तार के लिए।
C-DAC और G42 के सहयोग से 8 एक्सफ्लॉप सुपरकंप्यूटर क्लस्टर स्थापित होंगे।
गुजरात के वाडिनार में जहाज मरम्मत और समुद्री बुनियादी ढाँचा क्लस्टर प्रस्तावित।
यूएई ने भारत के बुनियादी ढाँचे और वित्तीय संस्थानों में $5 अरब निवेश की घोषणा की।
रक्षा साझेदारी ढाँचे में रक्षा निर्माण, साइबर सुरक्षा और समुद्री सुरक्षा शामिल।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 15 मई 2026 को संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) की अपनी संक्षिप्त यात्रा के दौरान हुए समझौतों को ऐतिहासिक बताया और कहा कि ये समझौते दोनों देशों के रिश्तों को नई ऊँचाई देंगे। इस यात्रा में भारत और यूएई ने ऊर्जा सुरक्षा, रक्षा निर्माण, एडवांस कंप्यूटिंग, समुद्री बुनियादी ढाँचे और निवेश से जुड़े सात महत्वपूर्ण समझौतों पर हस्ताक्षर किए।

मुख्य समझौते और उनका दायरा

सबसे अहम समझौता इंडियन स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिज़र्व्स लिमिटेड (ISPRL) और अबू धाबी नेशनल ऑयल कंपनी (ADNOC) के बीच हुआ, जिसका उद्देश्य भारत के रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार का विस्तार करना और ऊर्जा सुरक्षा को सुदृढ़ करना है। इसके तहत एलएनजी और एलपीजी बुनियादी ढाँचे में सहयोग के नए रास्ते भी खुलेंगे।

दोनों देशों ने दीर्घकालिक एलपीजी आपूर्ति के लिए भी एक अलग रणनीतिक समझौते पर हस्ताक्षर किए, जो वैश्विक ऊर्जा बाज़ार की अस्थिरता के बीच भारत की आपूर्ति श्रृंखला को स्थिरता देगा।

रक्षा और समुद्री क्षेत्र में सहयोग

रक्षा क्षेत्र में दोनों देशों ने एक रणनीतिक रक्षा साझेदारी ढाँचे पर सहमति जताई, जिसमें रक्षा निर्माण, सैन्य प्रशिक्षण, समुद्री सुरक्षा, साइबर सुरक्षा, नवाचार और सुरक्षित संचार प्रणालियाँ शामिल हैं। यह भारत की 'मेक इन इंडिया' रक्षा नीति के अनुरूप है।

गुजरात के वाडिनार में एक प्रस्तावित जहाज मरम्मत और समुद्री बुनियादी ढाँचा क्लस्टर भी इस यात्रा का प्रमुख परिणाम रहा। इससे भारत को जहाज निर्माण और मरम्मत के क्षेत्र में वैश्विक केंद्र बनाने की दिशा में मदद मिलेगी। इसके साथ ही जहाज मरम्मत क्षेत्र में कौशल विकास के लिए भी एक अलग समझौता किया गया।

तकनीक और कंप्यूटिंग में नई छलाँग

तकनीकी क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि यह रही कि भारत के सेंटर फॉर डेवलपमेंट ऑफ एडवांस कंप्यूटिंग (C-DAC) और यूएई की प्रमुख तकनीकी कंपनी G42 के सहयोग से आठ एक्सफ्लॉप सुपरकंप्यूटर क्लस्टर स्थापित करने पर सहमति बनी। यह भारत की कृत्रिम बुद्धिमत्ता और उच्च-प्रदर्शन कंप्यूटिंग क्षमताओं को नई ऊँचाई देगा।

$5 अरब का निवेश और आर्थिक संबंध

यूएई ने भारत के बुनियादी ढाँचे और वित्तीय संस्थानों में $5 अरब के निवेश की घोषणा की, जो दोनों देशों के आर्थिक संबंधों को और गहरा करेगी। यह ऐसे समय में आया है जब भारत वैश्विक निवेशकों को आकर्षित करने के लिए कई मोर्चों पर सक्रिय है।

पीएम मोदी की प्रतिक्रिया और आगे की राह

प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए इस यात्रा के परिणामों को 'महत्वपूर्ण' बताया। उन्होंने लिखा, 'ये महत्वपूर्ण समझौते भारत-यूएई मित्रता को और मजबूती देंगे।' गौरतलब है कि भारत और यूएई के बीच पहले से ही व्यापक आर्थिक भागीदारी समझौता (CEPA) लागू है, और इन नए समझौतों से द्विपक्षीय संबंधों का दायरा रणनीतिक क्षेत्रों तक और विस्तृत हो गया है। इन समझौतों के क्रियान्वयन की प्रगति आने वाले महीनों में दोनों देशों के सहयोग की वास्तविक परीक्षा होगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल क्रियान्वयन का है — भारत-यूएई CEPA के बाद भी द्विपक्षीय व्यापार की गति उतनी तेज़ नहीं रही जितनी अपेक्षित थी। एक्सफ्लॉप सुपरकंप्यूटर और वाडिनार क्लस्टर जैसी परियोजनाएँ महत्वाकांक्षी हैं, लेकिन इनके लिए समयसीमा और वित्तपोषण ढाँचे का अभी खुलासा नहीं हुआ है। $5 अरब के निवेश की घोषणा उत्साहजनक है, पर यह प्रतिबद्धता है या वास्तविक अनुबंध — यह स्पष्ट नहीं। रणनीतिक रक्षा ढाँचे में साइबर सुरक्षा और सुरक्षित संचार का समावेश बताता है कि यह साझेदारी पारंपरिक हथियार-खरीद से आगे बढ़ रही है, जो भारत की बहु-ध्रुवीय विदेश नीति के अनुरूप है।
RashtraPress
15 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारत और यूएई के बीच 15 मई 2026 को कौन-से 7 समझौते हुए?
इन समझौतों में ISPRL-ADNOC रणनीतिक पेट्रोलियम सहयोग, दीर्घकालिक एलपीजी आपूर्ति समझौता, रक्षा साझेदारी ढाँचा, वाडिनार समुद्री क्लस्टर, जहाज मरम्मत कौशल विकास, C-DAC और G42 के बीच सुपरकंप्यूटर क्लस्टर समझौता, तथा यूएई का $5 अरब निवेश प्रतिबद्धता शामिल हैं।
यूएई का $5 अरब निवेश भारत में किन क्षेत्रों में होगा?
यूएई ने भारत के बुनियादी ढाँचे और वित्तीय संस्थानों में $5 अरब निवेश की घोषणा की है। इससे दोनों देशों के आर्थिक संबंध और गहरे होंगे, हालाँकि विशिष्ट परियोजनाओं का विवरण अभी सार्वजनिक नहीं किया गया है।
C-DAC और G42 का सुपरकंप्यूटर समझौता क्या है?
भारत के सेंटर फॉर डेवलपमेंट ऑफ एडवांस कंप्यूटिंग (C-DAC) और यूएई की तकनीकी कंपनी G42 के सहयोग से 8 एक्सफ्लॉप सुपरकंप्यूटर क्लस्टर स्थापित किए जाएँगे। यह भारत की उच्च-प्रदर्शन कंप्यूटिंग और कृत्रिम बुद्धिमत्ता क्षमताओं को बड़े पैमाने पर मजबूत करेगा।
वाडिनार समुद्री क्लस्टर से भारत को क्या फायदा होगा?
गुजरात के वाडिनार में प्रस्तावित जहाज मरम्मत और समुद्री बुनियादी ढाँचा क्लस्टर 'मेक इन इंडिया' पहल को मजबूती देगा और भारत को जहाज निर्माण व मरम्मत के क्षेत्र में वैश्विक केंद्र बनाने में मदद करेगा। इससे समुद्री कार्यबल के कौशल विकास के नए अवसर भी पैदा होंगे।
भारत-यूएई रक्षा साझेदारी ढाँचे में क्या शामिल है?
इस ढाँचे में रक्षा निर्माण, सैन्य प्रशिक्षण, समुद्री सुरक्षा, साइबर सुरक्षा, नवाचार और सुरक्षित संचार प्रणालियाँ शामिल हैं। यह साझेदारी पारंपरिक हथियार-खरीद से आगे बढ़कर तकनीकी और रणनीतिक सहयोग पर केंद्रित है।
राष्ट्र प्रेस
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