महाराष्ट्र एसआईआर: सपा विधायक रईस शेख ने एमवीए से माँगी राज्यस्तरीय टास्क फोर्स, वोट चोरी की चेतावनी
सारांश
मुख्य बातें
समाजवादी पार्टी (सपा) के विधायक रईस शेख ने 15 मई 2026 को महाविकास अघाड़ी (एमवीए) के शीर्ष नेताओं को पत्र लिखकर महाराष्ट्र में मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान मतदाताओं की सुरक्षा के लिए एक राज्यस्तरीय टास्क फोर्स गठित करने की अपील की है। उन्होंने चेतावनी दी कि समय रहते कदम न उठाए गए तो सत्ताधारी दल द्वारा 'वोट चोरी' को रोकना असंभव हो जाएगा।
एसआईआर की पृष्ठभूमि और महाराष्ट्र की स्थिति
भारतीय चुनाव आयोग (ECI) ने हाल ही में 16 राज्यों और 3 केंद्र शासित प्रदेशों में एसआईआर के तीसरे चरण की घोषणा की है। इसके तहत बूथ लेवल अधिकारी (बीएलओ) 30 जून से 29 जुलाई के बीच मतदाताओं के घर-घर जाएँगे। रईस शेख के अनुसार, महाराष्ट्र में एसआईआर का मानचित्रण तो पूरा हो चुका है, लेकिन वास्तविक कार्य अभी केवल 66 प्रतिशत ही पूरा हुआ है।
बिहार और पश्चिम बंगाल से सबक
शेख ने अपने पत्र में अन्य राज्यों के अनुभवों का हवाला दिया। उनके अनुसार, एसआईआर प्रक्रिया के कारण बिहार में 68 लाख और पश्चिम बंगाल में 91 लाख मतदाता मताधिकार से वंचित रह गए। उन्होंने कहा कि इस प्रक्रिया से सबसे अधिक आदिवासी, दलित, अल्पसंख्यक और कमज़ोर वर्गों के मतदाता प्रभावित हो रहे हैं।
हाल ही में संपन्न पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों के आँकड़ों का उल्लेख करते हुए शेख ने कहा कि जिन 147 निर्वाचन क्षेत्रों में एसआईआर के ज़रिए 25 हज़ार तक नाम हटाए गए थे, उनमें भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने 95 सीटें और तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने 51 सीटें जीतीं। अंततः BJP को 207 सीटें और TMC को केवल 80 सीटें मिलीं। उनका आरोप है कि पश्चिम बंगाल में BJP की जीत में एसआईआर की निर्णायक भूमिका रही।
टास्क फोर्स की माँग और एमवीए से अपील
शेख ने पत्र में लिखा कि इंडिया अलायंस की पार्टियाँ अभी अलग-अलग पार्टी स्तर पर शिविर और प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित कर रही हैं, जो पर्याप्त नहीं है। उन्होंने माँग की कि एमवीए की एक राज्यस्तरीय एसआईआर टास्क फोर्स बनाई जाए, जिसमें गठबंधन के सभी घटक दलों के प्रतिनिधि शामिल हों। यह टास्क फोर्स राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी और केंद्रीय चुनाव आयोग के साथ समन्वय करे।
मतदाताओं को जागरूक करने की ज़रूरत
विधायक शेख ने ज़ोर दिया कि मतदाताओं को तकनीकी पहलुओं की जानकारी देना ज़रूरी है — जैसे बीएलओ को कौन-से दस्तावेज़ देने हैं, नए मतदाताओं के लिए आवेदन प्रक्रिया क्या है और आपत्ति दर्ज कराने का तरीका क्या है। गठबंधन के बूथ लेवल एजेंट (बीएलए) को प्रशिक्षित करना इस टास्क फोर्स की प्राथमिक जिम्मेदारी होगी।
आगे क्या होगा
एमवीए नेतृत्व की ओर से अभी तक इस पत्र पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। बीएलओ का घर-घर दौरा 30 जून से शुरू होना है, जिससे पहले गठबंधन के लिए संगठित तैयारी का समय सीमित है। यह देखना महत्त्वपूर्ण होगा कि एमवीए इस अपील पर कितनी तेज़ी से कदम उठाता है।