क्या घोसी में मतदाता सूची में बदलाव हुआ है? सपा ने मुख्य निर्वाचन अधिकारी को ज्ञापन सौंपा
सारांश
मुख्य बातें
लखनऊ, 8 दिसंबर (राष्ट्र प्रेस)। समाजवादी पार्टी ने मऊ जनपद की घोसी विधानसभा में मतदाता सूची में बदलाव और बीएलओ पर दबाव डालने के गंभीर आरोप लगाए हैं। पार्टी ने उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी से त्वरित जांच और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
सपा का कहना है कि मतदाता स्थलों पर दो भिन्न मतदाता सूचियां उपलब्ध कराना एसआईआर प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल खड़ा कर रहा है। समाजवादी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष श्याम लाल पाल ने मुख्य निर्वाचन अधिकारी को ज्ञापन सौंपते हुए आरोप लगाया कि मऊ जनपद की घोसी विधानसभा में 2003 की मतदाता सूची को बदलकर 7 दिसंबर 2025 को बीएलओ को दूसरी सूची दी गई। इसे गंभीर लापरवाही मानते हुए उन्होंने संपूर्ण प्रकरण की जांच और दोषी अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।
ज्ञापन में कहा गया कि घोसी विधानसभा के मतदाता स्थल संख्या 75 में मूल मतदाता सूची में 488 नाम थे, जबकि 7 दिसंबर 2025 को बीएलओ को उपलब्ध कराई गई सूची में 1318 मतदाता दर्ज थे। बीएलओ पर सभी मतदाताओं से गणना प्रपत्र भरवाने और उन्हें बीएलओ ऐप में अपलोड करने का दबाव बनाया जा रहा है, जिससे अचानक बढ़े 830 मतदाताओं के प्रपत्र भरने में कठिनाइयाँ आ रही हैं।
सपा ने बताया कि मतदेय स्थल संख्या 3, 4, 6, 7, 8, 9, 10, 11, 12, 15, 18, 20, 21, 28, 31, 38, 34, 35, 44, 46, 48, 49, 57, 59, 62, 71, 73, 74, 75, 76, 77, 81, 84, 85, 95, 96, 97, 98, 99, 100, 102, 104, 109, 110, 113, 114, 115, 116, 118, 119, 120, 122, 123, 124, 125, 126, 128, 130, 132, 134, 135, 136, 137, 138, 139, 140, 141, 142, 144, 145, 146, 147, 148, 150, 151, 152, 170, 171, 172, 175, 177, 178, 179, 180, 181, 182, 183, 184, 185, 186, 187, 188, 189, 190, 191, 192, 193, 194, 195, 196, 197, 198, 199, 200, 202, 203, 204, 205, 206, 208, 210, 212, 230, 232, 233, 234, 235, 236, 237, 238, 240, 241, 242, 243, 244, 245, 246, 247, 248, 249, 250, 253, 254, 255, 256, 257, 258, 259, 260, 261, 262, 263, 265, 266, 267, 268, 269, 270, 271, 272, 273, 274, 275, 276, 277, 278 सहित अनेक केंद्रों पर भी यही स्थिति पाई गई है और बीएलओ को दूसरी सूची थमा दी गई।
ज्ञापन सौंपते हुए सपा नेता केके श्रीवास्तव और राधेश्याम सिंह ने कहा कि यह गंभीर अनियमितता है, और एसआईआर प्रक्रिया को पारदर्शी तथा विश्वसनीय बनाने के लिए त्वरित कार्रवाई आवश्यक है।