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क्या पश्चिम बंगाल में एसआईआर प्रक्रिया में राजनीतिक हस्तक्षेप को रोका जा सकेगा?

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क्या पश्चिम बंगाल में एसआईआर प्रक्रिया में राजनीतिक हस्तक्षेप को रोका जा सकेगा?

सारांश

क्या चुनाव आयोग की यह पहल राजनीतिक हस्तक्षेप को रोकने में सफल होगी? जानें पश्चिम बंगाल में एसआईआर प्रक्रिया के ताजा घटनाक्रम के बारे में।

मुख्य बातें

सीईओ के कार्यालय को राजनीतिक हस्तक्षेप रोकने का निर्देश दिया गया है।
सुनवाई सत्रों में निष्पक्षता बनाए रखने पर जोर दिया गया है।
राज्य के अन्य राजनीतिक दलों को समान अवसर देने का ख्याल रखा गया है।

कोलकाता, 3 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। भारत निर्वाचन आयोग (ईसीआई) ने शनिवार को पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) के कार्यालय को निर्देश दिया कि राज्य में मतदाता सूची के मसौदे पर चल रही सुनवाई सत्रों के दौरान बूथ-स्तरीय एजेंटों (बीएलए) या किसी भी राजनीतिक दल के प्रतिनिधियों का हस्तक्षेप न हो।

ये सुनवाई पश्चिम बंगाल में तीन चरणों वाली विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया के दूसरे चरण का हिस्सा हैं।

भारत निर्वाचन आयोग का यह निर्देश हुगली और कूच बिहार जिलों में हाल ही में हुई घटनाओं के मद्देनजर आया है, जहां राज्य मंत्रिमंडल के एक वरिष्ठ सदस्य सहित तृणमूल कांग्रेस के तीन विधायकों के हस्तक्षेप के बाद सुनवाई सत्रों को कथित तौर पर बाधित किया गया और जबरन बंद कराया गया।

सूत्रों के अनुसार, विधायकों ने सुनवाई सत्रों के दौरान अपनी पार्टी के बीएलए की उपस्थिति और प्रवेश की मांग की, जिसके कारण व्यवधान उत्पन्न हुआ।

आयोग ने सीईओ कार्यालय को यह निर्देश भी दिया है कि वह जिला मजिस्ट्रेटों और जिला निर्वाचन अधिकारियों को निर्देश दे कि किसी भी जिले में इसी तरह के हस्तक्षेप या सुनवाई सत्रों को जबरन रोकने के प्रयासों के मामले में आवश्यक कार्रवाई करें।

सीईओ कार्यालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, "सीईओ कार्यालय को दिए गए अपने निर्देश में आयोग ने कहा है कि सुनवाई प्रक्रिया में निष्पक्षता, तटस्थता और पारदर्शिता बनाए रखने के लिए किसी भी दल के बीएलए या राजनीतिक हस्तक्षेप को समाप्त करना आवश्यक है।"

इस सप्ताह की शुरुआत में, ईसीआई ने स्पष्ट किया था कि मसौदा मतदाता सूची से संबंधित दावों और आपत्तियों पर चल रहे सुनवाई सत्रों में तृणमूल कांग्रेस की दल बीएलए को अनुमति देने की मांग को क्यों खारिज कर दिया गया था।

आयोग ने कहा कि तृणमूल कांग्रेस की ऐसी मांग को स्वीकार करने से उसे राज्य में पंजीकृत अन्य राजनीतिक दलों, जिनमें छह राष्ट्रीय दल और दो राज्य दल शामिल हैं, को भी इसी तरह की भागीदारी की अनुमति देनी होगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

जिसे सभी राज्यों में लागू किया जाना चाहिए।
RashtraPress
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारत निर्वाचन आयोग का यह निर्देश क्यों आया?
यह निर्देश हाल ही में हुगली और कूच बिहार जिलों में विधायकों के हस्तक्षेप के कारण आया है।
एसआईआर प्रक्रिया क्या है?
एसआईआर प्रक्रिया विशेष गहन पुनरीक्षण की एक प्रक्रिया है, जिसमें मतदाता सूची की समीक्षा की जाती है।
क्या राजनीतिक दलों को सुनवाई सत्रों में भाग लेने की अनुमति है?
नहीं, आयोग ने निर्देश दिया है कि राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों का हस्तक्षेप नहीं होना चाहिए।
राष्ट्र प्रेस
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