चाबहार बंदरगाह भारत-ईरान सहयोग का 'सुनहरा द्वार': ईरानी विदेश मंत्री अराघची
सारांश
मुख्य बातें
ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने शुक्रवार, 15 मई 2026 को नई दिल्ली में कहा कि चाबहार बंदरगाह भारत और ईरान के बीच रणनीतिक सहयोग का जीवंत प्रतीक है और यह मध्य एशिया, काकेशस तथा यूरोप तक पहुँच का 'सुनहरा द्वार' बनेगा। उन्होंने विश्वास जताया कि भारत इस बंदरगाह पर अपना काम जारी रखेगा, भले ही अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण विकास की गति कुछ धीमी हुई है।
मुख्य घटनाक्रम
नई दिल्ली में आयोजित ब्रिक्स विदेश मंत्रियों की बैठक के बाद मीडिया से बातचीत में अराघची ने कहा, 'चाबहार बंदरगाह भारत और ईरान के सहयोग का एक प्रतीक है और हमें खुशी है कि इसके विकास में भारतीयों ने अहम भूमिका निभाई है। यह अभी अमेरिका के प्रतिबंधों की वजह से थोड़ा धीमा हो गया है, लेकिन मुझे पूरा विश्वास है कि यह बंदरगाह भारत के लिए मध्य एशिया, काकेशस और आगे यूरोप तक पहुँच का एक सुनहरा द्वार बनेगा।'
उन्होंने यह भी जोड़ा, 'यह एक बहुत ही रणनीतिक बंदरगाह है, जो हमारे लिए, भारत के लिए और कई अन्य देशों के लिए महत्वपूर्ण है। मेरा मानना है कि भारत अपनी अच्छी छवि के साथ इस क्षेत्र में शांति, कूटनीति और सुरक्षा को बढ़ावा देने में बड़ी भूमिका निभा सकता है।'
अमेरिकी प्रतिबंधों का असर
गौरतलब है कि पिछले सितंबर में भारत के विदेश मंत्रालय (MEA) ने कहा था कि वह अमेरिका के उस फैसले के प्रभाव की समीक्षा कर रहा है, जिसमें चाबहार परियोजना से जुड़ी प्रतिबंध छूट समाप्त करने की बात कही गई थी। अमेरिका ने 2018 में दी गई इस छूट को वापस लेने की घोषणा की थी। अमेरिकी विदेश विभाग के अनुसार, इस निर्णय के बाद बंदरगाह संचालन से जुड़े पक्षों पर 'ईरान फ्रीडम एंड काउंटर-प्रोलिफरेशन एक्ट' (IFCA) के तहत प्रतिबंध लग सकते हैं।
भारत-ईरान का दीर्घकालिक समझौता
भारत और ईरान ने चाबहार बंदरगाह के संचालन के लिए दस वर्षीय समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। इस करार के अंतर्गत भारत ने बंदरगाह के बुनियादी ढाँचे के विकास हेतु 25 करोड़ डॉलर की ऋण सुविधा देने की प्रतिबद्धता जताई है। यह ऐसे समय में आया है जब भारत अपनी कनेक्टिविटी रणनीति में मध्य एशिया को केंद्रीय स्थान दे रहा है।
रेल संपर्क की योजना
इसके अतिरिक्त, भारत और ईरान मिलकर चाबहार बंदरगाह को ईरान के रेलवे नेटवर्क से जोड़ने की योजना पर काम कर रहे हैं। इसके लिए करीब 700 किलोमीटर लंबी रेल लाइन बनाकर इसे ज़ाहेदान शहर से जोड़ा जाएगा, जो अफगानिस्तान और मध्य एशिया के लिए एक महत्वपूर्ण प्रवेश बिंदु है।
क्षेत्रीय महत्व और भारत की भूमिका
अराघची ने यह भी रेखांकित किया कि भारत फारस की खाड़ी के लगभग सभी देशों — चाहे वे खाड़ी के उत्तर में हों या दक्षिण में — का मित्र है। उन्होंने कहा कि ईरान इस क्षेत्र में भारत की किसी भी सकारात्मक और रचनात्मक भूमिका की सराहना करता है। चाबहार के पूर्ण विकास से न केवल भारत, बल्कि यूरोप और मध्य एशिया को भी हिंद महासागर तक वैकल्पिक पहुँच मिलेगी।