चाबहार बंदरगाह भारत का 'सुनहरा द्वार': ईरानी विदेश मंत्री अराघची का जयशंकर से मुलाकात के बाद बयान
सारांश
मुख्य बातें
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने 15 मई 2025 को नई दिल्ली में भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर के साथ हुई बातचीत को 'सार्थक' बताते हुए कहा कि चाबहार बंदरगाह भारत के लिए मध्य एशिया, काकेशस और यूरोप तक पहुँच का 'सुनहरा द्वार' बनेगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य में सुरक्षा की अपनी ऐतिहासिक जिम्मेदारी निभाता रहेगा और सभी मित्र राष्ट्रों के व्यापार की रक्षा करेगा।
जयशंकर से बातचीत: क्षेत्रीय सुरक्षा पर जोर
अराघची ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा, 'हमने क्षेत्रीय घटनाक्रमों पर चर्चा की और यह स्पष्ट किया कि ईरान होर्मुज में सुरक्षा के रक्षक के तौर पर अपनी ऐतिहासिक जिम्मेदारी हमेशा निभाएगा। ईरान सभी मित्र राष्ट्रों का एक भरोसेमंद साझेदार है, जो अपने व्यापार की सुरक्षा के लिए उस पर भरोसा कर सकते हैं।' उन्होंने कहा कि तेहरान भारत के साथ अपने संबंधों को अत्यंत महत्व देता है और दोनों देशों की फारस की खाड़ी से जुड़े मुद्दों पर समान चिंताएँ एवं हित हैं।
होर्मुज जलडमरूमध्य पर ईरान का रुख
अराघची ने होर्मुज स्ट्रेट के संबंध में स्पष्ट किया कि यह सामान्य वाणिज्यिक जहाजों के लिए पूरी तरह खुला रहेगा। उन्होंने कहा कि जो जहाज इस मार्ग से गुजरना चाहते हैं, उन्हें ईरानी सेना से संपर्क करना होगा क्योंकि वहाँ कुछ बारूदी सुरंगें और रुकावटें मौजूद हैं। हालाँकि, उन्होंने यह भी कहा कि ईरान के साथ संघर्ष में शामिल देशों के जहाजों को इस जलमार्ग में प्रवेश की अनुमति नहीं होगी। गौरतलब है कि यह जलमार्ग वैश्विक तेल आपूर्ति और समुद्री व्यापार के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।
चाबहार बंदरगाह: भारत-ईरान सहयोग का प्रतीक
चाबहार बंदरगाह को अराघची ने भारत और ईरान के द्विपक्षीय सहयोग का प्रतीक बताया। उन्होंने स्वीकार किया कि अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण इसका विकास कुछ धीमा हुआ है, लेकिन उन्हें पूरा विश्वास है कि यह बंदरगाह आगे चलकर भारत के लिए मध्य एशिया, काकेशस और यूरोप तक पहुँच का प्रमुख द्वार बनेगा। यह ऐसे समय में आया है जब भारत अंतर्राष्ट्रीय उत्तर-दक्षिण परिवहन गलियारे (INSTC) को सक्रिय करने की दिशा में काम कर रहा है, जिसमें चाबहार की केंद्रीय भूमिका है।
भारत के लिए रणनीतिक महत्व
चाबहार बंदरगाह भारत को पाकिस्तान को दरकिनार कर अफगानिस्तान और मध्य एशियाई देशों तक पहुँचने का वैकल्पिक मार्ग देता है। भारत ने इस बंदरगाह के विकास में अहम निवेश किया है और यह भारतीय विदेश नीति की एक प्रमुख प्राथमिकता रही है। अराघची की यह यात्रा ऐसे समय में हुई है जब भारत-ईरान संबंध अमेरिकी प्रतिबंधों के बावजूद व्यावहारिक संतुलन बनाए रखने की कोशिश में हैं।
आगे की राह
दोनों देशों के बीच इस उच्चस्तरीय संवाद से संकेत मिलता है कि भारत-ईरान द्विपक्षीय संबंध क्षेत्रीय तनाव के बावजूद सक्रिय बने हुए हैं। चाबहार के विकास की गति और होर्मुज में सुरक्षा की स्थिति आने वाले महीनों में इस साझेदारी की दिशा तय करेगी।