भोजशाला मंदिर है, हिंदुओं का पूजा अधिकार बरकरार: MP हाईकोर्ट; CM मोहन यादव और मंत्री लोधी ने बताया ऐतिहासिक फैसला

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भोजशाला मंदिर है, हिंदुओं का पूजा अधिकार बरकरार: MP हाईकोर्ट; CM मोहन यादव और मंत्री लोधी ने बताया ऐतिहासिक फैसला

सारांश

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने धार भोजशाला को मंदिर घोषित कर हिंदुओं के पूजा अधिकार को बहाल किया। CM मोहन यादव और मंत्री धर्मेंद्र लोधी ने इसे ऐतिहासिक बताया और सामाजिक सौहार्द की अपील की। वाग्देवी प्रतिमा को विदेश से वापस लाने का संकल्प भी लिया गया।

मुख्य बातें

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने धार भोजशाला को मंदिर घोषित किया और हिंदुओं के पूजा अधिकार को बरकरार रखा।
जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और जस्टिस आलोक अवस्थी की खंडपीठ ने शुक्रवार को यह फैसला सुनाया।
अदालत ने विवादित स्थल पर वर्षों से चली आ रही प्रशासनिक व्यवस्था को रद्द कर दिया।
मुख्यमंत्री मोहन यादव और मंत्री धर्मेंद्र सिंह लोधी ने फैसले को ऐतिहासिक बताते हुए स्वागत किया।
CM ने वाग्देवी की विदेश में स्थित प्रतिमा को कानूनी प्रक्रिया से वापस लाने का संकल्प लिया।
दोनों नेताओं ने प्रदेशवासियों से सामाजिक सौहार्द बनाए रखने की अपील की।

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने शुक्रवार को धार भोजशाला विवाद में एक अहम फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया कि भोजशाला एक मंदिर है और हिंदू समुदाय का वहाँ पूजा करने का अधिकार कभी समाप्त नहीं हुआ। अदालत ने विवादित स्थल पर वर्षों से चली आ रही प्रशासनिक व्यवस्था को भी रद्द कर दिया। इस फैसले के बाद मध्य प्रदेश की राजनीति और धार्मिक संगठनों में प्रतिक्रियाओं का दौर तेज़ हो गया है।

अदालत का फैसला: मुख्य बिंदु

जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और जस्टिस आलोक अवस्थी की खंडपीठ ने यह निर्णय सुनाया। अदालत ने माना कि राजा भोज ने वाग्देवी के स्थान के माध्यम से इस स्थल की ऐतिहासिक और धार्मिक महत्ता को स्थापित किया था। खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि हिंदू समुदाय के पूजा के अधिकार को किसी प्रशासनिक आदेश से समाप्त नहीं किया जा सकता।

मंत्री धर्मेंद्र सिंह लोधी की प्रतिक्रिया

मध्य प्रदेश सरकार के मंत्री धर्मेंद्र सिंह लोधी ने फैसले पर उत्साह जताते हुए कहा, 'यह ऐतिहासिक फैसला है। भोजशाला को लेकर कोर्ट का फैसला आया है, इससे हम उत्साहित हैं।' उन्होंने कहा कि भोजशाला को सनातन की प्रतीक बताया जाता रहा है और यह माँ सरस्वती की भोजशाला है, जिसका निर्माण पूर्वजों ने कराया था। लोधी ने कहा कि इस फैसले के बाद नियमित रूप से पूजा-पाठ करने में आसानी होगी।

मुख्यमंत्री मोहन यादव का स्वागत और अपील

मुख्यमंत्री मोहन यादव ने भोपाल में मीडिया से बातचीत में फैसले का स्वागत करते हुए कहा, 'न्यायालय ने माना कि राजा भोज ने वाग्देवी के स्थान के माध्यम से इस स्थल की महत्ता को विकसित किया था। मैं इस फैसले का स्वागत करता हूँ और प्रदेशवासियों को इसकी बधाई देता हूँ।' उन्होंने यह भी कहा कि लोकतंत्र में सबसे बड़ा स्थान न्यायालय का है और वे इस निर्णय को स्वीकार करते हैं।

यादव ने सभी पक्षों से सामाजिक सौहार्द बनाए रखने की अपील की। उन्होंने अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के समय के सामाजिक सौहार्द का उदाहरण देते हुए कहा कि मध्य प्रदेश भी ऐसा दूसरा उदाहरण बन सकता है। उन्होंने कहा कि आपसी भाईचारे के तहत एक स्थायी समाधान निकाला जाए।

वाग्देवी प्रतिमा वापसी का संकल्प

मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि वाग्देवी की जो प्रतिमा विदेश में है, उसे कानून के अनुसार वापस लाने का प्रयास किया जाएगा। उन्होंने संकेत दिया कि भविष्य में ऐसे ऐतिहासिक स्थलों को और गौरवान्वित करने की दिशा में ठोस कदम उठाए जाएंगे।

आगे क्या होगा

हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद धार भोजशाला में नियमित पूजा की व्यवस्था का मार्ग प्रशस्त होने की संभावना है। गौरतलब है कि यह स्थल वर्षों से विवाद का केंद्र रहा है, जहाँ हिंदू और मुस्लिम दोनों समुदाय अपने-अपने धार्मिक अधिकारों का दावा करते रहे हैं। फैसले के बाद प्रशासन की नई व्यवस्था किस रूप में लागू होगी, यह आने वाले दिनों में स्पष्ट होगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि मध्य प्रदेश की सांप्रदायिक राजनीति में एक नया अध्याय है — जो अयोध्या के बाद देश के दूसरे बड़े धार्मिक विवाद को न्यायिक समाधान की ओर ले जाने का दावा करता है। लेकिन जब CM मोहन यादव 'सामाजिक सौहार्द' की अपील करते हैं और साथ ही 'भविष्य में ऐसे स्थानों को गौरवान्वित करने' का संकल्प लेते हैं, तो यह दोहरा संदेश ध्यान खींचता है। मुस्लिम पक्ष की प्रतिक्रिया और संभावित कानूनी अपील पर मुख्यधारा की कवरेज अभी तक चुप है — जबकि यही वह बिंदु है जो इस विवाद का अगला मोड़ तय करेगा।
RashtraPress
15 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भोजशाला पर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट का फैसला क्या है?
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने फैसला दिया कि धार भोजशाला एक मंदिर है और हिंदू समुदाय का वहाँ पूजा करने का अधिकार कभी समाप्त नहीं हुआ। अदालत ने विवादित स्थल पर चली आ रही पुरानी प्रशासनिक व्यवस्था को भी रद्द कर दिया।
यह फैसला किस खंडपीठ ने सुनाया?
जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और जस्टिस आलोक अवस्थी की खंडपीठ ने शुक्रवार को यह फैसला सुनाया। यह मामला धार जिले में स्थित भोजशाला परिसर को लेकर वर्षों से चल रहा था।
CM मोहन यादव ने इस फैसले पर क्या कहा?
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि न्यायालय ने माना कि राजा भोज ने इस स्थल की महत्ता को वाग्देवी के माध्यम से विकसित किया था। उन्होंने प्रदेशवासियों को बधाई दी और सामाजिक सौहार्द बनाए रखने की अपील की।
भोजशाला विवाद क्या है और यह क्यों महत्वपूर्ण है?
धार जिले में स्थित भोजशाला परिसर को हिंदू समुदाय माँ सरस्वती का मंदिर मानता है, जबकि मुस्लिम समुदाय इसे कमाल मौला मस्जिद के रूप में देखता है। वर्षों से इस स्थल पर दोनों समुदायों के धार्मिक अधिकारों को लेकर विवाद चला आ रहा था, जिस पर अब हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया है।
वाग्देवी प्रतिमा को वापस लाने की बात क्यों हो रही है?
CM मोहन यादव ने कहा कि वाग्देवी की एक प्रतिमा विदेश में है और उसे कानूनी प्रक्रिया के अनुसार वापस लाने का प्रयास किया जाएगा। भोजशाला को माँ सरस्वती अर्थात वाग्देवी का स्थान माना जाता है, इसलिए यह प्रतिमा इस विवाद से सांस्कृतिक रूप से जुड़ी है।
राष्ट्र प्रेस
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