भोजशाला पर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट का ऐतिहासिक फैसला: परिसर हिंदू मंदिर, शुक्रवार की नमाज पर रोक

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भोजशाला पर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट का ऐतिहासिक फैसला: परिसर हिंदू मंदिर, शुक्रवार की नमाज पर रोक

सारांश

मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने धार की भोजशाला को हिंदू मंदिर स्थल घोषित कर दिया — ASI की 2,100 पृष्ठों की रिपोर्ट के बाद चार साल की कानूनी लड़ाई का अंत। 2003 की नमाज-अनुमति अधिसूचना निरस्त, ब्रिटिश संग्रहालय से सरस्वती प्रतिमा वापसी पर सरकार को विचार का निर्देश।

मुख्य बातें

मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने 15 मई 2026 को धार स्थित भोजशाला परिसर को हिंदू मंदिर स्थल घोषित किया।
ASI की 2,100 पृष्ठों की सर्वे रिपोर्ट निर्णय का आधार बनी; मामला 2022 में दायर हुआ था।
शुक्रवार की नमाज की अनुमति देने वाली 7 अप्रैल 2003 की ASI अधिसूचना पूरी तरह निरस्त।
मुस्लिम पक्ष को वैकल्पिक स्थान के लिए सरकार से आवेदन का विकल्प दिया गया।
न्यायालय ने ब्रिटिश संग्रहालय में रखी माँ सरस्वती की प्रतिमा वापसी पर सरकार से विचार करने को कहा।
जैन समाज की याचिका भी न्यायालय ने खारिज की।

मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने शुक्रवार, 15 मई 2026 को धार स्थित भोजशाला परिसर को हिंदू मंदिर स्थल घोषित करते हुए एक महत्वपूर्ण निर्णय सुनाया। न्यायालय ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) की 2,100 पृष्ठों की सर्वे रिपोर्ट के आधार पर यह फैसला दिया, साथ ही मुस्लिम पक्ष द्वारा हर शुक्रवार अदा की जाने वाली नमाज पर पूर्ण रोक लगा दी।

मुख्य घटनाक्रम

यह मामला 2022 में इंदौर स्थित मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय में दायर किया गया था। याचिकाकर्ताओं ने तर्क दिया था कि भोजशाला परिसर ऐतिहासिक रूप से माँ सरस्वती और माँ वाग्देवी का मंदिर स्थल है, जो संस्कृत शिक्षा का प्राचीन केंद्र रहा है। चार वर्षों की कानूनी प्रक्रिया के बाद न्यायालय ने यह निर्णय सुनाया।

इस मामले में पैरवी करने वाले अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन ने पत्रकारों से बातचीत में कहा, 'राम मंदिर के फैसले के बाद आज इस देश की न्यायपालिका ने एक बहुत ही ऐतिहासिक फैसला सुनाया है।' उन्होंने बताया कि ASI की विस्तृत रिपोर्ट ने न्यायालय को परिसर के मंदिर-स्वरूप की पुष्टि करने में निर्णायक भूमिका निभाई।

नमाज और ASI अधिसूचना पर निर्णय

उच्च न्यायालय ने 7 अप्रैल 2003 की ASI अधिसूचना — जो परिसर में शुक्रवार की नमाज की अनुमति देती थी — को पूरी तरह निरस्त कर दिया है। अधिवक्ता जैन के अनुसार, जब तक उच्च न्यायालय का यह फैसला प्रभावी रहेगा, परिसर में नमाज अदा नहीं की जाएगी।

न्यायालय ने मुस्लिम पक्ष को यह विकल्प दिया है कि यदि वे नमाज के लिए वैकल्पिक स्थान चाहते हैं तो सरकार के समक्ष आवेदन कर सकते हैं, और सरकार उस आवेदन पर भूमि आवंटन पर विचार करेगी। गौरतलब है कि इस निर्णय से धार जिले में धार्मिक स्थल विवाद का एक लंबा अध्याय समाप्त हुआ है।

ब्रिटिश संग्रहालय में रखी प्रतिमा पर निर्देश

न्यायालय ने एक उल्लेखनीय टिप्पणी में सरकार से ब्रिटिश संग्रहालय में संरक्षित माँ सरस्वती की प्रतिमा को वापस लाने पर विचार करने को कहा है। यह प्रतिमा कथित तौर पर मूलतः भोजशाला परिसर से संबंधित है। अधिवक्ता जैन ने इसे फैसले का एक महत्वपूर्ण पहलू बताया।

जैन समाज की याचिका खारिज

न्यायालय ने इस मामले में दायर जैन समाज की याचिका को भी खारिज कर दिया है। अधिवक्ता जैन ने स्पष्ट किया कि परिसर पर केवल हिंदू पक्ष का दावा न्यायालय द्वारा स्वीकार किया गया है।

आगे क्या होगा

यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में धार्मिक स्थलों से जुड़े विवाद न्यायालयों में विचाराधीन हैं। मुस्लिम पक्ष के इस निर्णय को उच्चतर न्यायालय में चुनौती देने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। परिसर में अब पूर्ण रूप से हिंदू पूजा-अर्चना की अनुमति होगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो संस्थागत स्थिति में आमूल बदलाव दर्शाता है। मुस्लिम पक्ष के लिए वैकल्पिक भूमि का प्रावधान सुझाना न्यायालय की संतुलन-साधने की कोशिश है, लेकिन इसकी व्यावहारिक स्वीकार्यता अभी परखी जानी बाकी है। उच्चतम न्यायालय में संभावित अपील इस निर्णय की अंतिमता को अनिश्चित बनाए रखती है।
RashtraPress
15 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भोजशाला पर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट का फैसला क्या है?
मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने 15 मई 2026 को धार स्थित भोजशाला परिसर को हिंदू मंदिर स्थल घोषित किया है। न्यायालय ने ASI की 2,100 पृष्ठों की सर्वे रिपोर्ट के आधार पर यह निर्णय सुनाया और परिसर में शुक्रवार की नमाज पर पूर्ण रोक लगा दी।
भोजशाला में नमाज पर रोक क्यों लगाई गई?
उच्च न्यायालय ने 7 अप्रैल 2003 की ASI अधिसूचना — जो शुक्रवार की नमाज की अनुमति देती थी — को पूरी तरह निरस्त कर दिया। न्यायालय ने परिसर के चरित्र को हिंदू मंदिर का माना, इसलिए नमाज की अनुमति समाप्त हो गई।
भोजशाला मामला कब और कहाँ दायर हुआ था?
यह याचिका 2022 में इंदौर स्थित मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय में दायर की गई थी। याचिकाकर्ताओं ने दावा किया था कि भोजशाला परिसर माँ सरस्वती और माँ वाग्देवी का ऐतिहासिक मंदिर स्थल है और संस्कृत शिक्षा का प्राचीन केंद्र रहा है।
ब्रिटिश संग्रहालय और भोजशाला का क्या संबंध है?
अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन के अनुसार, उच्च न्यायालय ने सरकार से ब्रिटिश संग्रहालय में रखी माँ सरस्वती की प्रतिमा को वापस लाने पर विचार करने को कहा है। यह प्रतिमा कथित तौर पर मूलतः भोजशाला परिसर से संबंधित मानी जाती है।
मुस्लिम पक्ष के लिए अब क्या विकल्प है?
न्यायालय ने मुस्लिम पक्ष को सुझाव दिया है कि यदि वे नमाज के लिए वैकल्पिक स्थान चाहते हैं तो सरकार के समक्ष आवेदन कर सकते हैं। सरकार उस आवेदन पर भूमि आवंटन पर विचार करेगी।
राष्ट्र प्रेस
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