क्या भोजशाला परिसर में कड़ी सुरक्षा के बीच नमाज अदा की गई?

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क्या भोजशाला परिसर में कड़ी सुरक्षा के बीच नमाज अदा की गई?

सारांश

धार के भोजशाला परिसर में सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद मुस्लिम समुदाय ने शांति से नमाज अदा की। सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए थे, जिसमें 8000 से अधिक जवान तैनात थे। यह घटना सह-अस्तित्व और आपसी सम्मान का प्रतीक है, जो धार्मिक सहिष्णुता की दिशा में एक सकारात्मक कदम है।

Key Takeaways

  • सुप्रीम कोर्ट के आदेश के तहत नमाज अदा की गई।
  • कड़ी सुरक्षा व्यवस्था में 8000 से अधिक जवान तैनात थे।
  • दोनों समुदायों के लिए अलग-अलग स्थान तय किए गए थे।
  • यह घटना धार्मिक सहिष्णुता का एक सकारात्मक उदाहरण है।
  • मलिकाना हक का विवाद अभी भी विचाराधीन है।

धार, 23 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। सुप्रीम कोर्ट के अंतरिम आदेश के अंतर्गत, शुक्रवार को मध्य प्रदेश के धार जिले में स्थित विवादित भोजशाला–कमल मौला मस्जिद परिसर में मुस्लिम समुदाय ने शांतिपूर्वक जुमे की नमाज अदा की।

नमाज लगभग 20 मिनट तक चली और इसे सुप्रीम कोर्ट द्वारा निर्धारित समय के अनुसार दोपहर 1 से 3 बजे के बीच आयोजित किया गया। कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के तहत, प्रशासन ने मुस्लिम प्रतिनिधियों को सुरक्षित परिसर तक पहुँचाया, जहाँ उन्हें बख्तरबंद वाहनों में ले जाया गया।

कोर्ट के निर्देशों के अनुसार, दोनों समुदायों के लिए परिसर में अलग-अलग स्थान और आने-जाने के मार्ग निर्धारित किए गए थे। पुलिस के अनुसार, नमाज के बाद सभी लोगों को सुरक्षित रूप से परिसर से बाहर ले जाया गया।

हिंदुओं की याचिका पर गुरुवार को चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस विपुल एम. पंचोली की पीठ ने बसंत पंचमी पर हिंदू समुदाय को सरस्वती पूजा करने की अनुमति दी थी। वहीं, मुस्लिम समुदाय को नमाज अदा करने के लिए दो घंटे की समय सीमा दी गई।

अदालत ने आपसी सम्मान, सहनशीलता और स्थानीय प्रशासन के साथ सहयोग पर जोर दिया, ताकि इस 11वीं सदी के एएसआई संरक्षित स्मारक में शांति बनी रहे। यह वही स्थान है जिसे हिंदू समुदाय लंबे समय से सरस्वती मंदिर और मुस्लिम समुदाय ने कमल मौला मस्जिद के रूप में पहचानते आए हैं।

बसंत पंचमी के अवसर पर धार में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। शहर में 8000 से अधिक पुलिस और अर्धसैनिक बलों की तैनाती की गई थी, जिसमें वरिष्ठ अधिकारी, महिला पुलिसकर्मी और रैपिड एक्शन फोर्स की टुकड़ियां शामिल थीं। इसके अलावा, बीस से अधिक एआई ड्रोन द्वारा हवाई निगरानी भी की गई।

पूरे इलाके की 3डी मैपिंग कर चौबीसों घंटे निगरानी सुनिश्चित की गई। यह संतुलित व्यवस्था लंबे कानूनी संघर्ष के बाद की गई, जिसमें सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश सरकार के द्वारा दिए गए शांतिपूर्ण व्यवस्था बनाए रखने के आश्वासन को रिकॉर्ड पर लिया।

हिंदू श्रद्धालुओं ने सुबह के समय केसरिया सजावट के साथ फूल चढ़ाकर सरस्वती पूजा की। वहीं, मुस्लिम पक्ष ने निर्धारित समय के अनुसार अपनी धार्मिक गतिविधियां पूरी कीं। इसे इस संवेदनशील स्थल पर आपसी सह-अस्तित्व की दिशा में एक सकारात्मक कदम माना जा रहा है। अधिकारी स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं, जबकि इस स्थान से जुड़ा मलिकाना हक का बड़ा विवाद अभी मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में विचाराधीन है।

Point of View

तो यह समाज के लिए एक सकारात्मक संदेश है। हालांकि, इस स्थान से जुड़ा विवाद अभी भी कानूनी प्रक्रिया में है, लेकिन इस दिन की शांति निश्चित रूप से एक अच्छी पहल है।
NationPress
11/03/2026

Frequently Asked Questions

भोजशाला परिसर में नमाज कब अदा की गई?
नमाज 23 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट के आदेश के तहत अदा की गई।
भोजशाला परिसर में कितने जवान तैनात थे?
8000 से अधिक पुलिस और अर्धसैनिक बलों की तैनाती की गई थी।
क्या नमाज के लिए कोई समय सीमा निर्धारित की गई थी?
हाँ, मुस्लिम समुदाय के लिए नमाज अदा करने के लिए दो घंटे की समय सीमा निर्धारित की गई थी।
इस स्थल पर सुरक्षा के क्या इंतजाम किए गए थे?
सुरक्षा के कड़े इंतजाम के तहत पुलिस, महिला पुलिसकर्मी, रैपिड एक्शन फोर्स और ड्रोन निगरानी का उपयोग किया गया।
इस घटना का सामाजिक महत्व क्या है?
यह घटना आपसी सह-अस्तित्व और धार्मिक सहिष्णुता का प्रतीक है।
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