भोजशाला मंदिर है: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट का ऐतिहासिक फैसला, 2003 का नमाज आदेश रद्द

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भोजशाला मंदिर है: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट का ऐतिहासिक फैसला, 2003 का नमाज आदेश रद्द

सारांश

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने दशकों पुराने भोजशाला विवाद में बड़ा फैसला सुनाते हुए परिसर को माँ सरस्वती का प्राचीन मंदिर माना और 2003 का नमाज आदेश रद्द कर दिया। हिंदू पक्ष को पूजा का अधिकार मिला; मुस्लिम पक्ष वैकल्पिक भूमि के लिए सरकार से अर्जी दे सकता है।

मुख्य बातें

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर बेंच ने 15 मई को भोजशाला परिसर को माँ वाग्देवी (सरस्वती) का प्राचीन मंदिर घोषित किया।
जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और जस्टिस आलोक अवस्थी की खंडपीठ ने 7 अप्रैल 2003 का नमाज आदेश पूरी तरह रद्द किया।
अदालत ने हिंदुओं को परिसर में पूजा-अर्चना का अधिकार प्रदान किया।
मुस्लिम पक्ष को धार में वैकल्पिक भूमि के लिए सरकार को प्रत्यावेदन देने का विकल्प दिया गया।
ऐतिहासिक साहित्यिक साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने माना कि यह स्थान प्राचीन संस्कृत शिक्षा केंद्र था।

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर बेंच ने 15 मई 2026 को धार स्थित भोजशाला परिसर को माँ वाग्देवी (सरस्वती) का प्राचीन मंदिर घोषित करते हुए एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया। जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और जस्टिस आलोक अवस्थी की खंडपीठ ने 7 अप्रैल 2003 के उस सरकारी आदेश को भी निरस्त कर दिया, जिसके तहत मुसलमानों को इस परिसर में नमाज अदा करने की अनुमति दी गई थी।

फैसले का सार

अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि भोजशाला परिसर और कमल मौला मस्जिद के विवादित क्षेत्र का धार्मिक स्वरूप मूलतः एक मंदिर का है, जिसमें देवी सरस्वती को समर्पित पूजास्थल स्थित है। कोर्ट ने कहा, 'भोजशाला परिसर और कमल मौला मस्जिद का विवादित इलाका एक संरक्षित स्मारक माना गया है। भोजशाला परिसर और कमल मौला मस्जिद के विवादित इलाके का धार्मिक स्वरूप भोजशाला का है, जिसमें देवी सरस्वती का मंदिर है।'

हाईकोर्ट ने यह भी माना कि ऐतिहासिक साहित्यिक साक्ष्यों से यह सिद्ध होता है कि यह स्थान प्राचीन काल में संस्कृत शिक्षा का एक प्रमुख केंद्र था और यहाँ देवी सरस्वती की उपासना होती थी।

हिंदू पक्ष को मिले अधिकार

खंडपीठ ने हिंदू पक्ष की उन याचिकाओं को स्वीकार किया, जिनमें भोजशाला परिसर को हिंदुओं को वापस दिलाने और मुसलमानों को परिसर में नमाज पढ़ने से रोकने की माँग की गई थी। अदालत ने हिंदुओं को इस परिसर में पूजा-अर्चना करने का अधिकार भी प्रदान किया।

हिंदू पक्ष के अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन ने फैसले के बाद मीडिया से कहा, 'भोजशाला केस में हाईकोर्ट का बहुत अहम और ऐतिहासिक फैसला आया है। कोर्ट ने भोजशाला परिसर को एक हिंदू मंदिर का परिसर घोषित किया है। कोर्ट ने हिंदुओं को पूजा-पाठ करने का अधिकार भी दिया है।'

मुस्लिम पक्ष के लिए विकल्प

अदालत ने मुस्लिम पक्ष को यह निर्देश दिया कि वे वैकल्पिक भूमि के लिए सरकार को एक प्रत्यावेदन (representation) दे सकते हैं। धार में उन्हें वैकल्पिक ज़मीन दिए जाने के प्रस्ताव पर सरकार विचार करेगी। अधिवक्ता जैन के अनुसार, हाईकोर्ट ने 7 अप्रैल 2003 के उस आदेश को पूरी तरह खारिज कर दिया है, जिसके तहत परिसर में नमाज की अनुमति दी गई थी।

विवाद की पृष्ठभूमि

गौरतलब है कि भोजशाला-कमल मौला मस्जिद विवाद दशकों पुराना है। हिंदू संगठनों का दावा रहा है कि यह परिसर 11वीं शताब्दी के परमार वंशीय राजा भोज द्वारा निर्मित सरस्वती मंदिर है, जिसे बाद में मस्जिद में परिवर्तित किया गया। यह ऐसे समय में आया है जब देश में धार्मिक स्थलों से जुड़े कई विवाद न्यायालयों में विचाराधीन हैं। यह फैसला उन याचिकाओं पर आया है, जो वर्षों से लंबित थीं।

आगे क्या होगा

इस फैसले को उच्चतम न्यायालय में चुनौती दिए जाने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। मुस्लिम पक्ष अभी तक अपनी आगे की कानूनी रणनीति सार्वजनिक नहीं की है। सरकार को वैकल्पिक भूमि के प्रस्ताव पर निर्णय लेना होगा। यह फैसला भोजशाला परिसर के प्रशासन और पहुँच के तरीके को बुनियादी रूप से बदल देगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह अंतिम शब्द नहीं है — सर्वोच्च न्यायालय तक जाने की राह खुली है। असली सवाल यह है कि क्या वैकल्पिक भूमि का प्रस्ताव व्यावहारिक रूप से लागू होगा, या यह केवल कागज़ पर रहेगा। देश में धार्मिक स्थलों से जुड़े विवादों की बढ़ती संख्या यह भी दर्शाती है कि न्यायालय पर इस तरह के संवेदनशील मामलों का बोझ बढ़ रहा है, जबकि विधायी स्तर पर कोई स्थायी नीति-ढाँचा अभी तक नहीं बना है।
RashtraPress
15 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भोजशाला पर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट का फैसला क्या है?
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर बेंच ने 15 मई को भोजशाला परिसर को माँ वाग्देवी (सरस्वती) का प्राचीन मंदिर घोषित किया है। अदालत ने हिंदुओं को पूजा का अधिकार दिया और 2003 का नमाज आदेश रद्द कर दिया।
2003 का नमाज आदेश क्या था और उसे क्यों रद्द किया गया?
7 अप्रैल 2003 को जारी एक सरकारी आदेश के तहत मुसलमानों को भोजशाला परिसर में नमाज पढ़ने की अनुमति दी गई थी। हाईकोर्ट ने इसे इस आधार पर रद्द किया कि परिसर का धार्मिक स्वरूप मूलतः एक हिंदू मंदिर का है।
भोजशाला विवाद क्या है और इसकी पृष्ठभूमि क्या है?
भोजशाला धार, मध्य प्रदेश में स्थित एक ऐतिहासिक परिसर है। हिंदू पक्ष इसे 11वीं सदी के परमार राजा भोज द्वारा निर्मित सरस्वती मंदिर मानता है, जबकि मुस्लिम पक्ष इसे कमल मौला मस्जिद के रूप में देखता है। यह विवाद दशकों से न्यायालयों में चल रहा था।
मुस्लिम पक्ष के लिए अब क्या विकल्प है?
हाईकोर्ट ने मुस्लिम पक्ष को निर्देश दिया है कि वे धार में वैकल्पिक भूमि के लिए सरकार को प्रत्यावेदन दे सकते हैं। सरकार इस अनुरोध पर विचार करेगी। मुस्लिम पक्ष इस फैसले को सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती देने का विकल्प भी रखता है।
इस फैसले का क्या महत्व है?
यह फैसला भोजशाला के प्रशासन और धार्मिक उपयोग को बुनियादी रूप से बदल देता है — हिंदुओं को पूजा का अधिकार मिला और मुसलमानों की नमाज पर रोक लगी। यह देश के प्रमुख धार्मिक स्थल विवादों में से एक में एक निर्णायक न्यायिक हस्तक्षेप है।
राष्ट्र प्रेस
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