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क्या भोजशाला पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले से दो समुदायों में टकराव की संभावना है? : मौलाना रजवी

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क्या भोजशाला पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले से दो समुदायों में टकराव की संभावना है? : मौलाना रजवी

सारांश

मौलाना शहाबुद्दीन रजवी ने भोजशाला और कमाल मौला मस्जिद विवाद पर सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के प्रति अपनी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि यह निर्णय विवाद को और बढ़ा सकता है। क्या वास्तव में यह निर्णय समुदायों के बीच टकराव का कारण बन सकता है?

मुख्य बातें

भोजशाला विवाद: धार्मिक गतिविधियों के अधिकारों का विवाद।
कोर्ट का आदेश: सूर्योदय तक पूजा, उसके बाद नमाज।
संभावित टकराव: समुदायों के बीच टकराव की आशंका।
धार्मिक सहिष्णुता: सभी समुदायों को मिलकर समाधान निकालने की आवश्यकता।
शंकराचार्य विवाद: प्रयागराज स्नान विवाद पर मौलाना रजवी की प्रतिक्रिया।

बरेली, 23 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना शहाबुद्दीन रजवी ने मध्य प्रदेश के धार जिले की कमाल मौला मस्जिद और भोजशाला विवाद पर सुप्रीम कोर्ट के हालिया आदेश पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्‍होंने चिंता व्यक्त की कि कोर्ट का यह निर्णय विवाद को समाप्त करने के बजाय और बढ़ा सकता है।

उन्होंने प्रार्थना की कि किसी भी प्रकार की अप्रिय स्थिति उत्पन्न न हो और शांति बनी रहे।

मौलाना रजवी ने समाचार एजेंसी राष्ट्र प्रेस से बातचीत में कहा कि यह विवाद कई वर्षों से जारी है और मामला न्यायालय में विचाराधीन रहा है। सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में आदेश दिया है कि सूर्योदय तक पूजा की जा सकती है, जिसके बाद नमाज अदा की जाएगी।

कोर्ट ने फिलहाल पूजा और नमाज जैसे धार्मिक कार्यों की अनुमति दी है, लेकिन इस स्थल के मालिकाना हक पर अभी तक कोई अंतिम निर्णय नहीं आया है।

मौलाना रजवी ने आशंका जताई कि सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से विवाद और बढ़ सकता है। उन्होंने कहा कि जब दो समुदाय के लोग एक ही स्थान पर धार्मिक गतिविधियों के लिए एकत्र होंगे, तो टकराव की स्थिति बन सकती है।

वास्तव में, मध्य प्रदेश के धार में भोजशाला मामले में बसंत पंचमी के अवसर पर पूजा-अर्चना और शुक्रवार की नमाज पर रोक को लेकर विवाद सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा था। इस मामले की अहम सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि बसंत पंचमी के दिन भोजशाला में पूजा और शुक्रवार की नमाज दोनों की अनुमति होगी। अदालत ने दोनों धार्मिक गतिविधियों के लिए समय-सीमा निर्धारित करने का आदेश भी दिया, ताकि कोई टकराव न हो।

इसके अतिरिक्त, मौलाना शहाबुद्दीन रजवी ने शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती से जुड़े प्रयागराज स्नान विवाद पर भी अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि प्रयागराज में स्नान को लेकर उत्पन्न विवाद को समाप्त होना चाहिए। रजवी ने कहा कि शंकराचार्य एक धर्मगुरु हैं और उनका सम्मान पूरे देश में है। मेला प्रबंधन द्वारा जारी नोटिस से उनके सम्मान को ठेस पहुंची है, लेकिन इस मामले में शंकराचार्य ने अपना उत्तर भी दे दिया है।

मौलाना रजवी ने कहा कि एक धर्मगुरु होने के नाते शंकराचार्य को इस मुद्दे को यहीं समाप्त कर देना चाहिए और धरना-प्रदर्शन खत्म कर अपने धार्मिक कार्यक्रमों में लग जाना चाहिए। उन्होंने उल्लेख किया कि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री स्वयं शंकराचार्य से आग्रह कर चुके हैं, ऐसे में अब इस विवाद को और आगे नहीं बढ़ाना चाहिए।

संपादकीय दृष्टिकोण

यह स्पष्ट है कि इस विवाद का समाधान केवल संवाद और सहिष्णुता के माध्यम से ही किया जा सकता है। सभी समुदायों को एक साथ बैठकर इस मुद्दे का हल निकालने की आवश्यकता है।
RashtraPress
30 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भोजशाला विवाद क्या है?
भोजशाला विवाद मध्य प्रदेश के धार में कमाल मौला मस्जिद और भोजशाला के धार्मिक अधिकारों को लेकर है।
सुप्रीम कोर्ट का हालिया निर्णय क्या है?
सुप्रीम कोर्ट ने सूर्योदय से पहले पूजा की अनुमति दी है, इसके बाद नमाज अदा की जाएगी।
मौलाना रजवी का इस पर क्या कहना है?
मौलाना रजवी ने आशंका जताई है कि यह निर्णय विवाद को और बढ़ा सकता है।
राष्ट्र प्रेस
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