ई20 पेट्रोल पर सरकार का संसद में जवाब: वैज्ञानिक परीक्षणों के बाद लागू, पुराने वाहनों पर कोई बड़ा नकारात्मक असर नहीं
सारांश
मुख्य बातें
केंद्र सरकार ने 30 जुलाई 2026 को लोकसभा में स्पष्ट किया कि एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल (ई20) को पूरे देश में चरणबद्ध रूप से लागू करने से पहले व्यापक वैज्ञानिक परीक्षण, फील्ड ट्रायल और सभी संबंधित पक्षों के साथ विस्तृत परामर्श किया गया था। सरकार के अनुसार, निर्धारित मानकों के तहत ई20 पेट्रोल पुराने और नए — दोनों प्रकार के वाहनों के लिए पूरी तरह सुरक्षित है।
मंत्री ने संसद में क्या बताया
पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस राज्य मंत्री सुरेश गोपी ने एक लिखित प्रश्न के उत्तर में बताया कि एथेनॉल ब्लेंडेड पेट्रोल (EBP) कार्यक्रम को नीति आयोग, ऑटोमोबाइल कंपनियों, ऑयल मार्केटिंग कंपनियों (OMC), ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया (ARAI), सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स (SIAM), इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ पेट्रोलियम (IIP) तथा अन्य तकनीकी संस्थानों के साथ वैज्ञानिक और परामर्श-आधारित प्रक्रिया के बाद लागू किया गया।
मंत्री ने रेखांकित किया कि यदि वाहन निर्माता परीक्षणों के परिणामों से संतुष्ट नहीं होते, तो वे न तो पुराने वाहनों के लिए ई20 को मंजूरी देते और न ही ऐसे वाहनों पर वारंटी जारी रखते।
परीक्षणों में क्या जाँचा गया
ARAI, SIAM, इंडियन ऑयल (IOCL), IIP और वाहन निर्माताओं ने ई20 ईंधन लागू करने से पहले व्यापक प्रयोगशाला परीक्षण और वास्तविक परिस्थितियों में फील्ड ट्रायल किए। इन परीक्षणों में इंजन की मजबूती, ड्राइविंग प्रदर्शन, स्टार्ट होने की क्षमता, जंग-रोधी क्षमता, विभिन्न पुर्जों की अनुकूलता, उत्सर्जन और ईंधन दक्षता जैसे सभी महत्वपूर्ण पहलुओं की जाँच की गई।
सरकार के अनुसार, इन सभी अध्ययनों में यह पुष्टि हुई कि निर्धारित मानकों के तहत ई20 पेट्रोल का उपयोग पूरी तरह सुरक्षित है। परीक्षणों में यह भी पाया गया कि पुराने वाहनों के प्रदर्शन में कोई उल्लेखनीय कमी नहीं आई और न ही इंजन या अन्य पुर्जों में असामान्य घिसावट देखी गई।
वाहन निर्माताओं का अनुभव और सर्विस डेटा
सरकार ने बताया कि भारत में हर दिन करीब 8 करोड़ वाहन पेट्रोल पंपों पर ईंधन भरवाते हैं, जिनमें लगभग 80 प्रतिशत पेट्रोल वाहन हैं। देश में पिछले साढ़े तीन वर्षों से E15+ मिश्रित पेट्रोल और करीब ढाई वर्षों से E19-E20 पेट्रोल का व्यापक उपयोग हो रहा है।
इस दौरान 20 करोड़ से अधिक दोपहिया वाहन और 3 करोड़ से ज़्यादा पेट्रोल कारें इन मिश्रित ईंधनों पर चल चुकी हैं, लेकिन एथेनॉल मिश्रण के कारण इंजन खराब होने या बड़े पैमाने पर वाहन खराब होने का कोई सत्यापित मामला सामने नहीं आया।
एक प्रमुख वाहन निर्माता ने वित्त वर्ष 2025-26 में 2.84 करोड़ वाहनों की सर्विसिंग की, जिनमें लगभग 1.5 करोड़ ऐसे वाहन भी शामिल थे जिन्हें मूल रूप से ई20 के लिए प्रमाणित नहीं किया गया था — और कंपनी ने इनमें ई20 के कारण किसी भी प्रकार की जंग, असामान्य घिसावट या पुर्जों की आयु कम होने की कोई शिकायत दर्ज नहीं की। इसी तरह एक अन्य वाहन निर्माता के दीर्घकालिक अध्ययन में 1.4 करोड़ ई20 ईंधन पर चलने वाले वाहनों में एथेनॉल से होने वाली किसी प्रकार की जंग का कोई प्रमाण नहीं मिला।
गौरतलब है कि सभी प्रमुख वाहन निर्माता ई20 ईंधन पर चलने वाले वाहनों पर वारंटी भी जारी रखे हुए हैं, जिसे सरकार इसकी सुरक्षा और विश्वसनीयता का प्रमाण मानती है।
ई20 के तकनीकी फायदे
SIAM और ARAI के अनुसार, ई20 ईंधन से वाहन की एक्सेलरेशन और राइड क्वालिटी बेहतर होती है, जबकि कार्बन उत्सर्जन में कमी आती है। सरकार ने बताया कि एथेनॉल का ऑक्टेन नंबर अधिक होता है, जिससे आधुनिक हाई-कम्प्रेशन इंजन बेहतर प्रदर्शन करते हैं। साथ ही इसकी ऊष्मा अवशोषण क्षमता अधिक होने के कारण ईंधन का दहन अधिक प्रभावी होता है, जिससे इंजन की कार्यक्षमता में भी सुधार होता है।
आगे की राह
यह ऐसे समय में आया है जब भारत अपने एथेनॉल सम्मिश्रण लक्ष्यों को लेकर वैश्विक स्तर पर एक मॉडल के रूप में उभर रहा है। सरकार के अनुसार, ई20 कार्यक्रम न केवल ईंधन आयात पर निर्भरता घटाने की दिशा में एक ठोस कदम है, बल्कि यह कृषि क्षेत्र के लिए अतिरिक्त आय का स्रोत भी बन रहा है। आने वाले वर्षों में एथेनॉल मिश्रण के और विस्तार की संभावना बनी हुई है।