ई20 पेट्रोल: दो दशकों के परीक्षण और विचार-विमर्श का नतीजा, पेट्रोलियम मंत्रालय ने दिया पूरा ब्यौरा
सारांश
मुख्य बातें
पेट्रोलियम मंत्रालय ने शुक्रवार, 10 जुलाई 2026 को स्पष्ट किया कि ई10 से ई20 (20 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल) की ओर किया गया बदलाव वर्षों के जमीनी परीक्षण, मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों के साथ गहन विचार-विमर्श और चरणबद्ध नीतिगत प्रयासों का परिणाम है। मंत्रालय ने यह भी रेखांकित किया कि एथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम की नींव पिछली सरकारों के कार्यकाल में रखी गई थी।
एथेनॉल मिश्रण का ऐतिहासिक सफर
मंत्रालय के बयान के अनुसार, 2001 में एथेनॉल मिश्रण का पायलट कार्यक्रम शुरू हुआ था। 2004 में इसकी औपचारिक घोषणा की गई और 2006 तक कई राज्यों में ई5 (5 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रण) लागू कर दिया गया। इसके बाद यूपीए सरकार के दौरान जनवरी 2013 में इस कार्यक्रम की नीतिगत रूपरेखा को भारत के राजपत्र में अधिसूचित किया गया। मंत्रालय ने कहा कि ये सभी तथ्य सार्वजनिक रिकॉर्ड में दर्ज हैं।
गौरतलब है कि भारत ने 10 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 5 प्रतिशत मिश्रण का लक्ष्य रखा था, लेकिन 2014 तक वास्तविक मिश्रण स्तर केवल 1.5 प्रतिशत पर ही अटका रहा। मंत्रालय ने माना कि उस समय असली चुनौती एथेनॉल के ईंधन के रूप में उपयोग पर नहीं, बल्कि पर्याप्त उत्पादन क्षमता विकसित करने पर थी।
उत्पादन क्षमता और नीतिगत सुधार
उस दौर में भारत लगभग पूरी तरह गन्ने पर निर्भर था, जो एक मौसमी फसल है, और सालाना एथेनॉल उत्पादन क्षमता मात्र 400 करोड़ लीटर थी — जो मामूली मिश्रण लक्ष्यों के लिए भी अपर्याप्त थी। इस कमी को दूर करने के लिए मई 2018 में 'बायोफ्यूल पर राष्ट्रीय नीति' लागू की गई, जिसके तहत बड़े पैमाने पर एथेनॉल उत्पादन के लिए पूरे इकोसिस्टम को विकसित करने का काम शुरू हुआ।
मंत्रालय के बयान के अनुसार, पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय, खाद्य और सार्वजनिक वितरण विभाग, सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय, भारी उद्योग मंत्रालय और भारतीय रेलवे सहित कई विभागों ने आपसी तालमेल के साथ फीडस्टॉक बढ़ाने, इंफ्रास्ट्रक्चर निर्माण, तकनीकी सहयोग और निवेश को प्रोत्साहित करने के लिए काम किया।
निवेश और आपूर्ति श्रृंखला का विस्तार
अगस्त 2021 में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया, जब आईओसीएल, बीपीसीएल और एचपीसीएल जैसी ऑयल मार्केटिंग कंपनियों ने एथेनॉल की कमी वाले क्षेत्रों में डेडिकेटेड एथेनॉल प्लांट (डीईपी) स्थापित करने के लिए 'एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट' जारी किए। इन परियोजनाओं में दीर्घकालिक खरीद समझौते, एस्क्रो मैकेनिज्म के जरिए तीन-तरफा वित्तपोषण व्यवस्था और केवल एथेनॉल ब्लेंडेड पेट्रोल कार्यक्रम के लिए अनिवार्य आपूर्ति जैसी विशेषताएं शामिल थीं।
जून 2021 में नीति आयोग ने ऑटोमोबाइल कंपनियों, तेल कंपनियों और कृषि विशेषज्ञों के साथ व्यापक परामर्श के बाद एथेनॉल मिश्रण का विस्तृत रोडमैप जारी किया। इस रोडमैप में पर्यावरण और ऊर्जा सुरक्षा लाभों के साथ-साथ ग्रामीण आय और कृषि अर्थव्यवस्था पर सकारात्मक प्रभाव का भी उल्लेख किया गया। जैसे-जैसे उत्पादन क्षमता बढ़ी, यह स्पष्ट हो गया कि देश जल्द ही लगभग 1,200 करोड़ लीटर एथेनॉल उत्पादन करने में सक्षम होगा — जो 10 प्रतिशत मिश्रण के लिए आवश्यक 500-600 करोड़ लीटर से कहीं अधिक था।
वाहन उद्योग की प्रतिक्रिया और जमीनी साक्ष्य
ई20 लागू करने से पहले ऑटोमोबाइल कंपनियों, तकनीकी विशेषज्ञों और परीक्षण एजेंसियों के साथ कई दौर की विस्तृत बातचीत की गई। मारुति सुजुकी ने वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान 2.84 करोड़ गाड़ियों की सर्विसिंग की, जिनमें 1.5 करोड़ पुरानी, नॉन-ई20 सर्टिफाइड गाड़ियाँ शामिल थीं। कंपनी ने ई20 से जुड़ी जंग, असामान्य टूट-फूट या पुर्जों की उम्र कम होने जैसी कोई समस्या दर्ज नहीं की। हीरो मोटोकॉर्प ने भी इसी तरह के सकारात्मक अनुभव की पुष्टि की।
गुणवत्ता नियंत्रण और आगे की राह
मंत्रालय ने उपभोक्ताओं को सोशल मीडिया पर फैल रही भ्रामक जानकारी से सतर्क रहने की सलाह दी। एथेनॉल और मिश्रित पेट्रोल कड़े बीआईएस मानकों का पालन करते हैं और डिस्टिलरी से लेकर डिपो तथा रिटेल आउटलेट तक हर चरण में गुणवत्ता जांच की जाती है। मंत्रालय ने राज्यों के मुख्य सचिवों को निर्देश दिया है कि वे नियमों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करें और मिलावट के किसी भी मामले में कड़ी कार्रवाई करें। मंत्रालय के अनुसार, ईंधन गुणवत्ता से समझौते पर जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई जाएगी। यह कार्यक्रम अब अपने अगले चरण में प्रवेश कर चुका है, जहाँ क्रियान्वयन और निगरानी की परीक्षा होगी।