10 जुलाई 2026
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ई20 पेट्रोल: दो दशकों के परीक्षण और विचार-विमर्श का नतीजा, पेट्रोलियम मंत्रालय ने दिया पूरा ब्यौरा

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ई20 पेट्रोल: दो दशकों के परीक्षण और विचार-विमर्श का नतीजा, पेट्रोलियम मंत्रालय ने दिया पूरा ब्यौरा

सारांश

ई20 पेट्रोल महज एक नीतिगत घोषणा नहीं — यह 2001 से शुरू हुई दो दशकों की यात्रा का पड़ाव है। पेट्रोलियम मंत्रालय ने शुक्रवार को पूरा ब्यौरा देते हुए स्पष्ट किया कि यह बदलाव जल्दबाजी नहीं, बल्कि चरणबद्ध योजना, बहु-मंत्रालयी समन्वय और जमीनी परीक्षण का परिणाम है।

मुख्य बातें

पेट्रोलियम मंत्रालय ने 10 जुलाई 2026 को स्पष्ट किया कि ई20 की ओर बदलाव 2001 में शुरू हुई प्रक्रिया का नतीजा है।
यूपीए सरकार के दौरान जनवरी 2013 में एथेनॉल मिश्रण नीति की रूपरेखा भारत के राजपत्र में अधिसूचित की गई थी।
2014 तक वास्तविक मिश्रण स्तर केवल 1.5 प्रतिशत था, जबकि लक्ष्य 5 प्रतिशत था।
मई 2018 में 'बायोफ्यूल पर राष्ट्रीय नीति' लागू होने के बाद उत्पादन क्षमता 400 करोड़ लीटर से बढ़कर लगभग 1,200 करोड़ लीटर तक पहुँची।
मारुति सुजुकी ने वित्त वर्ष 2025-26 में 2.84 करोड़ गाड़ियों की सर्विसिंग में ई20 से कोई तकनीकी समस्या नहीं पाई।
मंत्रालय ने राज्यों के मुख्य सचिवों को ईंधन मिलावट पर जीरो टॉलरेंस नीति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

पेट्रोलियम मंत्रालय ने शुक्रवार, 10 जुलाई 2026 को स्पष्ट किया कि ई10 से ई20 (20 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल) की ओर किया गया बदलाव वर्षों के जमीनी परीक्षण, मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों के साथ गहन विचार-विमर्श और चरणबद्ध नीतिगत प्रयासों का परिणाम है। मंत्रालय ने यह भी रेखांकित किया कि एथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम की नींव पिछली सरकारों के कार्यकाल में रखी गई थी।

एथेनॉल मिश्रण का ऐतिहासिक सफर

मंत्रालय के बयान के अनुसार, 2001 में एथेनॉल मिश्रण का पायलट कार्यक्रम शुरू हुआ था। 2004 में इसकी औपचारिक घोषणा की गई और 2006 तक कई राज्यों में ई5 (5 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रण) लागू कर दिया गया। इसके बाद यूपीए सरकार के दौरान जनवरी 2013 में इस कार्यक्रम की नीतिगत रूपरेखा को भारत के राजपत्र में अधिसूचित किया गया। मंत्रालय ने कहा कि ये सभी तथ्य सार्वजनिक रिकॉर्ड में दर्ज हैं।

गौरतलब है कि भारत ने 10 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 5 प्रतिशत मिश्रण का लक्ष्य रखा था, लेकिन 2014 तक वास्तविक मिश्रण स्तर केवल 1.5 प्रतिशत पर ही अटका रहा। मंत्रालय ने माना कि उस समय असली चुनौती एथेनॉल के ईंधन के रूप में उपयोग पर नहीं, बल्कि पर्याप्त उत्पादन क्षमता विकसित करने पर थी।

उत्पादन क्षमता और नीतिगत सुधार

उस दौर में भारत लगभग पूरी तरह गन्ने पर निर्भर था, जो एक मौसमी फसल है, और सालाना एथेनॉल उत्पादन क्षमता मात्र 400 करोड़ लीटर थी — जो मामूली मिश्रण लक्ष्यों के लिए भी अपर्याप्त थी। इस कमी को दूर करने के लिए मई 2018 में 'बायोफ्यूल पर राष्ट्रीय नीति' लागू की गई, जिसके तहत बड़े पैमाने पर एथेनॉल उत्पादन के लिए पूरे इकोसिस्टम को विकसित करने का काम शुरू हुआ।

मंत्रालय के बयान के अनुसार, पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय, खाद्य और सार्वजनिक वितरण विभाग, सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय, भारी उद्योग मंत्रालय और भारतीय रेलवे सहित कई विभागों ने आपसी तालमेल के साथ फीडस्टॉक बढ़ाने, इंफ्रास्ट्रक्चर निर्माण, तकनीकी सहयोग और निवेश को प्रोत्साहित करने के लिए काम किया।

निवेश और आपूर्ति श्रृंखला का विस्तार

अगस्त 2021 में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया, जब आईओसीएल, बीपीसीएल और एचपीसीएल जैसी ऑयल मार्केटिंग कंपनियों ने एथेनॉल की कमी वाले क्षेत्रों में डेडिकेटेड एथेनॉल प्लांट (डीईपी) स्थापित करने के लिए 'एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट' जारी किए। इन परियोजनाओं में दीर्घकालिक खरीद समझौते, एस्क्रो मैकेनिज्म के जरिए तीन-तरफा वित्तपोषण व्यवस्था और केवल एथेनॉल ब्लेंडेड पेट्रोल कार्यक्रम के लिए अनिवार्य आपूर्ति जैसी विशेषताएं शामिल थीं।

जून 2021 में नीति आयोग ने ऑटोमोबाइल कंपनियों, तेल कंपनियों और कृषि विशेषज्ञों के साथ व्यापक परामर्श के बाद एथेनॉल मिश्रण का विस्तृत रोडमैप जारी किया। इस रोडमैप में पर्यावरण और ऊर्जा सुरक्षा लाभों के साथ-साथ ग्रामीण आय और कृषि अर्थव्यवस्था पर सकारात्मक प्रभाव का भी उल्लेख किया गया। जैसे-जैसे उत्पादन क्षमता बढ़ी, यह स्पष्ट हो गया कि देश जल्द ही लगभग 1,200 करोड़ लीटर एथेनॉल उत्पादन करने में सक्षम होगा — जो 10 प्रतिशत मिश्रण के लिए आवश्यक 500-600 करोड़ लीटर से कहीं अधिक था।

वाहन उद्योग की प्रतिक्रिया और जमीनी साक्ष्य

ई20 लागू करने से पहले ऑटोमोबाइल कंपनियों, तकनीकी विशेषज्ञों और परीक्षण एजेंसियों के साथ कई दौर की विस्तृत बातचीत की गई। मारुति सुजुकी ने वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान 2.84 करोड़ गाड़ियों की सर्विसिंग की, जिनमें 1.5 करोड़ पुरानी, नॉन-ई20 सर्टिफाइड गाड़ियाँ शामिल थीं। कंपनी ने ई20 से जुड़ी जंग, असामान्य टूट-फूट या पुर्जों की उम्र कम होने जैसी कोई समस्या दर्ज नहीं की। हीरो मोटोकॉर्प ने भी इसी तरह के सकारात्मक अनुभव की पुष्टि की।

गुणवत्ता नियंत्रण और आगे की राह

मंत्रालय ने उपभोक्ताओं को सोशल मीडिया पर फैल रही भ्रामक जानकारी से सतर्क रहने की सलाह दी। एथेनॉल और मिश्रित पेट्रोल कड़े बीआईएस मानकों का पालन करते हैं और डिस्टिलरी से लेकर डिपो तथा रिटेल आउटलेट तक हर चरण में गुणवत्ता जांच की जाती है। मंत्रालय ने राज्यों के मुख्य सचिवों को निर्देश दिया है कि वे नियमों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करें और मिलावट के किसी भी मामले में कड़ी कार्रवाई करें। मंत्रालय के अनुसार, ईंधन गुणवत्ता से समझौते पर जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई जाएगी। यह कार्यक्रम अब अपने अगले चरण में प्रवेश कर चुका है, जहाँ क्रियान्वयन और निगरानी की परीक्षा होगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि 2014 तक 5 प्रतिशत का साधारण लक्ष्य भी क्यों नहीं पाया जा सका — और उस विफलता की जिम्मेदारी किसकी थी। मारुति और हीरो के आंकड़े आश्वस्त करने वाले हैं, पर ये कंपनी-स्तरीय डेटा हैं; स्वतंत्र तकनीकी ऑडिट की अनुपस्थिति में इन्हें अंतिम प्रमाण मानना जल्दबाजी होगी। सप्लाई चेन में गुणवत्ता नियंत्रण का मुद्दा गंभीर है — राज्यों को निर्देश देना पर्याप्त नहीं, जब तक केंद्रीय निगरानी तंत्र पारदर्शी और सार्वजनिक न हो।
RashtraPress
10 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ई20 पेट्रोल क्या है और यह पुराने ई10 से कैसे अलग है?
ई20 वह पेट्रोल है जिसमें 20 प्रतिशत एथेनॉल मिलाया जाता है, जबकि ई10 में यह अनुपात 10 प्रतिशत था। यह बदलाव ऊर्जा सुरक्षा बढ़ाने, आयात पर निर्भरता घटाने और कार्बन उत्सर्जन कम करने के उद्देश्य से किया गया है।
भारत में एथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम कब शुरू हुआ था?
भारत में एथेनॉल मिश्रण का पायलट कार्यक्रम 2001 में शुरू हुआ था। 2004 में औपचारिक घोषणा हुई, 2006 तक कई राज्यों में ई5 लागू हुआ और जनवरी 2013 में यूपीए सरकार के दौरान नीतिगत रूपरेखा राजपत्र में अधिसूचित की गई।
क्या ई20 पेट्रोल से पुरानी गाड़ियों को नुकसान होता है?
मारुति सुजुकी ने वित्त वर्ष 2025-26 में 1.5 करोड़ पुरानी, नॉन-ई20 सर्टिफाइड गाड़ियों की सर्विसिंग में जंग, असामान्य टूट-फूट या पुर्जों की उम्र कम होने जैसी कोई समस्या नहीं पाई। हीरो मोटोकॉर्प ने भी इसी तरह के अनुभव की पुष्टि की है।
एथेनॉल उत्पादन क्षमता में इतना समय क्यों लगा?
भारत शुरुआत में लगभग पूरी तरह मौसमी फसल गन्ने पर निर्भर था और उत्पादन क्षमता केवल 400 करोड़ लीटर थी। 2018 की राष्ट्रीय बायोफ्यूल नीति और 2021 में ऑयल मार्केटिंग कंपनियों के निवेश के बाद क्षमता बढ़कर लगभग 1,200 करोड़ लीटर तक पहुँची।
ई20 ईंधन की गुणवत्ता कैसे सुनिश्चित की जाती है?
एथेनॉल और मिश्रित पेट्रोल कड़े बीआईएस मानकों के अनुसार बनाए जाते हैं और डिस्टिलरी से लेकर डिपो तथा रिटेल आउटलेट तक हर चरण में गुणवत्ता जांच होती है। मंत्रालय ने राज्यों के मुख्य सचिवों को मिलावट पर जीरो टॉलरेंस नीति लागू करने के निर्देश दिए हैं।
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