दलाई लामा का 91वाँ जन्मदिन: वाशिंगटन में भव्य समारोह, ट्रंप प्रशासन के अधिकारी ने की विरासत की सराहना
सारांश
मुख्य बातें
तिब्बती आध्यात्मिक गुरु दलाई लामा का 91वाँ जन्मदिन अमेरिकी राजधानी वाशिंगटन में 10 जुलाई को विशेष समारोह के साथ मनाया गया, जिसमें ट्रंप प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी राइली बार्न्स ने उनके जीवन, संदेश और वैश्विक विरासत की मुक्त कंठ से प्रशंसा की। ऑफिस ऑफ तिब्बत और इंटरनेशनल कैंपेन फॉर तिब्बत के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम में तिब्बती समुदाय, राजनयिक, सरकारी प्रतिनिधि और सामाजिक संगठनों के सदस्य बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।
समारोह का स्वरूप और प्रमुख उपस्थिति
कार्यक्रम की शुरुआत तिब्बती बौद्ध धर्मगुरुओं की प्रार्थनाओं से हुई। अमेरिका के तिब्बती मामलों के विशेष समन्वयक और लोकतंत्र, मानवाधिकार एवं श्रम मामलों के सहायक विदेश मंत्री राइली बार्न्स ने इस अवसर पर कहा, 'दलाई लामा और उनके जीवन का उत्सव मनाने के लिए यहाँ होना मेरे लिए सम्मान की बात है। मैं प्रार्थना करता हूँ कि आने वाले वर्षों में भी हमें ऐसे आयोजनों में शामिल होने का अवसर मिलता रहे।'
बार्न्स ने 2019 में धर्मशाला की अपनी यात्रा को भी याद किया, जब वे अमेरिकी विदेश मंत्रालय के ऑफिस ऑफ इंटरनेशनल रिलिजियस फ्रीडम में कार्यरत थे। उन्होंने बताया कि उस मुलाकात में उन्होंने दलाई लामा की करुणा, उदारता, हास्यबोध और आतिथ्य-भावना को प्रत्यक्ष रूप से अनुभव किया।
भावुक प्रसंग: पाँच साल की बेटी और खाता का सम्मान
बार्न्स ने पिछले वर्ष दलाई लामा के 90वें जन्मदिन समारोह का भी उल्लेख किया। उन्होंने एक हृदयस्पर्शी प्रसंग साझा करते हुए बताया कि उनकी पाँच साल की बेटी ने तिब्बती पारंपरिक स्कार्फ — खाता — जिसे वे घर लाए थे, एक अतिथि के स्वागत में स्वयं उपयोग किया, क्योंकि उसे याद था कि यह सम्मान और आतिथ्य का प्रतीक है। यह प्रसंग दर्शाता है कि दलाई लामा का प्रभाव पीढ़ियों की सीमाएँ पार कर रहा है।
तिब्बती कार्यकर्ता को श्रद्धांजलि
समारोह में तिब्बती कार्यकर्ता लोबगा रांगजेन को भी भावपूर्ण श्रद्धांजलि दी गई। आयोजकों के अनुसार, 2 जुलाई को न्यूयॉर्क स्थित संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय के बाहर आत्मदाह करने के बाद उनकी मृत्यु हो गई थी। उनकी स्मृति में दो मिनट का मौन रखा गया।
करुणा का संदेश और अमेरिकी मान्यता
उत्तर अमेरिका में दलाई लामा के प्रतिनिधि नामग्याल चोएदुप ने कहा कि यह आयोजन केवल जन्मदिन का उत्सव नहीं, बल्कि करुणा और सार्वभौमिक मानवीय मूल्यों के संदेश को विश्वस्तर पर प्रसारित करने का अवसर है। उन्होंने कहा, '1959 में तिब्बती लोगों ने अपना देश खो दिया, लेकिन पूरी दुनिया को दलाई लामा मिल गए।'
चोएदुप ने यह भी बताया कि अमेरिकी कांग्रेस और देश के कई राज्यों व शहरों ने दलाई लामा के जन्मदिन को 'डे ऑफ कम्पैशन' घोषित किया है — करुणा, अहिंसा, अंतरधार्मिक सद्भाव और मानवीय मूल्यों के प्रति उनके योगदान को मान्यता देते हुए।
इंटरनेशनल कैंपेन फॉर तिब्बत की अध्यक्ष तेनचो ग्यात्सो ने कहा कि पिछले सात दशकों से अधिक समय से दलाई लामा ने दुनिया को यह सिखाया है कि करुणा ही असली शक्ति है, संवाद ही स्थायी शांति का मार्ग है, और सच्चा नेतृत्व विनम्रता, बुद्धिमत्ता तथा सेवाभाव पर टिका होता है।
दलाई लामा की पृष्ठभूमि और अमेरिकी नीति
1959 में तिब्बत छोड़ने के बाद दलाई लामा भारत आए और तब से धर्मशाला में निर्वासन में रह रहे हैं। तिब्बत मुद्दे के शांतिपूर्ण समाधान हेतु उनके अहिंसक प्रयासों को 1989 में नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। अमेरिका में तिब्बती नीति अधिनियम 2002 के तहत स्थापित तिब्बती मामलों के विशेष समन्वयक का कार्यालय तिब्बत से संबंधित अमेरिकी कार्यक्रमों, नीतियों और सांस्कृतिक-धार्मिक विरासत की सुरक्षा का काम करता है। यह समारोह ऐसे समय में हुआ जब वैश्विक स्तर पर मानवीय संकट और भू-राजनीतिक तनाव गहरे हैं — और दलाई लामा का संदेश पहले से कहीं अधिक प्रासंगिक प्रतीत होता है।