कर्नाटक PRC-2026 पर शोभा करांदलाजे का अमित शाह को पत्र, संवैधानिक वैधता और राष्ट्रीय सुरक्षा पर उठाए सवाल
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय राज्यमंत्री शोभा करांदलाजे ने 10 जुलाई 2026 को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिखकर कर्नाटक स्थायी निवास प्रमाण पत्र (PRC)-2026 की संवैधानिक वैधता पर तत्काल जांच और क्रियान्वयन पर रोक लगाने की मांग की। उनका कहना है कि यह अधिसूचना संविधान, विद्यमान कानूनों और राष्ट्रीय सुरक्षा — तीनों मोर्चों पर गंभीर प्रश्न खड़े करती है।
संवैधानिक आपत्तियाँ
करांदलाजे ने अपने पत्र में स्पष्ट किया कि भारतीय संविधान समूचे देश के लिए केवल एक नागरिकता की व्यवस्था करता है। उनके अनुसार, कर्नाटक सरकार द्वारा 'स्थायी निवासी' की अलग श्रेणी गढ़ना संविधान की मूल भावना के विरुद्ध है और किसी भी संवैधानिक या विधायी प्रावधान द्वारा अधिकृत नहीं है।
उन्होंने आरोप लगाया कि यह व्यवस्था संविधान के अनुच्छेद 14 — समानता के अधिकार — का उल्लंघन करती है, क्योंकि यह बिना किसी वैध संवैधानिक उद्देश्य के नागरिकों के बीच एक नई विभाजक रेखा खींचती है।
राष्ट्रीय सुरक्षा पर चिंता
करांदलाजे ने पत्र में राष्ट्रीय सुरक्षा को लेकर भी गंभीर आशंका व्यक्त की। उनके अनुसार, PRC की पात्रता मुख्यतः स्थानीय निवास और राजस्व अधिकारियों के सत्यापन पर आधारित है, जबकि भारतीय नागरिकता की पुष्टि के लिए केंद्र सरकार की सक्षम एजेंसियों से कोई अनिवार्य सत्यापन नहीं है।
उन्होंने आशंका जताई कि अवैध रूप से देश में रह रहे विदेशी नागरिक या घुसपैठिए स्थानीय या फर्जी दस्तावेजों के आधार पर PRC प्राप्त कर सकते हैं। इसके बाद वे राज्य सरकार की योजनाओं, सरकारी नौकरियों, शैक्षणिक संस्थानों में प्रवेश और अन्य सुविधाओं का लाभ उठा सकते हैं — जिससे उनका अवैध निवास अप्रत्यक्ष रूप से वैध होने का खतरा पैदा होगा।
केंद्र के अधिकार क्षेत्र का प्रश्न
करांदलाजे ने यह भी रेखांकित किया कि नागरिकता, विदेशियों, आव्रजन और आंतरिक सुरक्षा जैसे विषय संविधान के अंतर्गत पूर्णतः केंद्र सरकार के अधिकार क्षेत्र में आते हैं। उनका तर्क है कि किसी राज्य द्वारा 'स्थायी निवास' जैसी दस्तावेजी व्यवस्था लागू करना केंद्र के इन संवैधानिक अधिकारों और देशभर में नागरिकता की एकरूपता को कमजोर कर सकता है।
यह ऐसे समय में आया है जब केंद्र सरकार अवैध प्रवासियों की पहचान और निर्वासन के लिए राष्ट्रीय स्तर पर अभियान चला रही है। आलोचकों का कहना है कि राज्य-स्तरीय निवास प्रमाण पत्र की यह व्यवस्था उन केंद्रीय प्रयासों को जटिल बना सकती है।
गृह मंत्री से की गई माँगें
करांदलाजे ने गृह मंत्री अमित शाह से चार स्पष्ट कदम उठाने का अनुरोध किया है — पहला, PRC-2026 की संवैधानिक वैधता की जांच कराई जाए; दूसरा, जांच पूरी होने तक कर्नाटक सरकार को अधिसूचना के क्रियान्वयन पर रोक लगाने का निर्देश दिया जाए; तीसरा, राज्य सरकार से पूछा जाए कि किस संवैधानिक और कानूनी आधार पर यह अधिसूचना जारी की गई; और चौथा, यह सुनिश्चित किया जाए कि भारतीय नागरिकता की पूर्ण जांच के बिना कोई PRC जारी न हो।
आगे क्या होगा
गौरतलब है कि केंद्र सरकार ने अभी तक इस पत्र पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है। कर्नाटक सरकार की ओर से भी इन आरोपों का कोई औपचारिक खंडन सामने नहीं आया है। यह मामला केंद्र-राज्य संबंधों और संविधान में नागरिकता के एकल ढाँचे को लेकर एक व्यापक राजनीतिक और कानूनी बहस को जन्म दे सकता है।