महिला आरक्षण और परिसीमन पर गौरव गोगोई का महत्वपूर्ण बयान
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नई दिल्ली, 16 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। लोकसभा में परिसीमन और महिला आरक्षण से संबंधित विधेयकों पर चर्चा के दौरान सरकार और विपक्ष के बीच जमकर बहस हुई। कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने कहा कि महिला आरक्षण को परिसीमन से नहीं जोड़ना चाहिए।
गोगोई ने यह भी उल्लेख किया कि कानून मंत्री की टिप्पणियों से ऐसा प्रतीत होता था जैसे सदन में पहली बार महिला आरक्षण पर चर्चा हो रही हो। उन्होंने बताया कि तीन वर्ष पूर्व गृह मंत्री ने भी इसी तरह के बयान दिए थे, जिनमें काफी समानताएँ थीं।
कांग्रेस सांसद ने कहा कि उनकी पार्टी हमेशा से महिला आरक्षण के पक्ष में रही है, लेकिन अब उनकी मांग है कि इसे सरल बनाया जाए ताकि यह बिल पारित होते ही लागू हो सके। उन्होंने कहा कि इसे परिसीमन के साथ जोड़ना उचित नहीं है।
इसके अलावा, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता केसी वेणुगोपाल ने भी संविधान (131वां संशोधन) विधेयक का विरोध किया और इसे गैरकानूनी तथा असंवैधानिक करार दिया। वेणुगोपाल ने बताया कि वर्ष 2023 में उनकी पार्टी ने 2024 के आम चुनाव से महिला आरक्षण लागू करने का समर्थन किया था, लेकिन सरकार ने उनकी मांग को नजरअंदाज कर दिया।
उन्होंने आरोप लगाया कि अब सरकार महिला आरक्षण के मुद्दे का उपयोग एक 'खतरनाक परिसीमन प्रक्रिया' को लागू करने के लिए कर रही है, जिससे पूरे देश में राजनीतिक सीमाओं को अपने अनुसार परिवर्तित किया जा सके, जैसा कि जम्मू-कश्मीर और असम में किया गया।
वेणुगोपाल ने कहा कि यह विधेयक भारत के संघीय ढांचे पर सीधा हमला है और इसे तुरंत वापस लिया जाना चाहिए।
इस पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने स्पष्ट उत्तर दिया। उन्होंने कहा कि केसी वेणुगोपाल इस चरण में विधेयक के गुण-दोष पर प्रश्न नहीं उठा सकते, केवल तकनीकी आपत्तियाँ ही दर्ज कर सकते हैं। अमित शाह ने यह भी कहा कि सरकार इस मुद्दे पर चर्चा के दौरान विपक्ष को 'करारा जवाब' देगी।