परिसीमन बिल पर रिजिजू ने राहुल गांधी को किया फोन, मानसून सत्र में तीसरी बार मांगा समर्थन
सारांश
मुख्य बातें
संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने 6 अगस्त 2026 को लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी से फोन पर बातचीत की और संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2026 — जिसे परिसीमन बिल के नाम से जाना जाता है — को संसद में दोबारा पेश करने के लिए उनका समर्थन माँगा। सूत्रों के अनुसार, यह मानसून सत्र के दौरान रिजिजू की राहुल गांधी से इस विषय पर तीसरी संपर्क-कोशिश थी।
रिजिजू का तर्क: महिला आरक्षण की राह परिसीमन से होकर
सूत्रों ने बताया कि रिजिजू ने राहुल गांधी के समक्ष यह दलील रखी कि यदि विपक्ष परिसीमन बिल को शीघ्र दोबारा पेश करने में सहयोग दे, तो महिला आरक्षण लागू करने की प्रक्रिया में तेज़ी आएगी। उन्होंने कथित तौर पर यह भी कहा कि यदि महिला आरक्षण लागू नहीं हुआ, तो महिलाओं में नाराज़गी पैदा होगी — जो स्पष्ट रूप से राजनीतिक दबाव बनाने का प्रयास था।
राहुल गांधी का जवाब: सहयोगियों से चर्चा के बाद रुख
सूत्रों के मुताबिक, फोन पर हुई बातचीत में राहुल गांधी ने कोई पक्का वादा नहीं किया। उन्होंने कहा कि परिसीमन बिल पर कांग्रेस के सहयोगियों और इंडिया ब्लॉक के साझेदारों से विस्तृत चर्चा के बाद ही कोई स्पष्ट रुख सामने आएगा। गांधी ने इस मुद्दे पर अपना जवाब देने के लिए समय माँगा।
कांग्रेस का आधिकारिक रुख: कोई बदलाव नहीं
बुधवार को कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल ने संसद परिसर में मीडिया से बात करते हुए स्पष्ट किया कि प्रस्तावित परिसीमन बिल पर पार्टी का रुख नहीं बदला है। उन्होंने कहा, 'हमारा रुख बिल्कुल साफ है। पिछले संसद सत्र के दौरान हमने जो रुख अपनाया था, हम उसी पर कायम हैं। इसमें कोई बदलाव नहीं हुआ है।' वेणुगोपाल ने इस बारे में उड़ रही अफ़वाहों को भी खारिज किया।
पृष्ठभूमि: अप्रैल में लोकसभा में नहीं पास हो सका था बिल
गौरतलब है कि अप्रैल 2026 में बजट सत्र के दौरान संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2026 लोकसभा में पारित नहीं हो सका था। कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने उस समय स्पष्ट किया था कि विपक्ष ने इस बिल का कड़ा विरोध इसलिए किया, क्योंकि उसे आशंका थी कि महिला आरक्षण की आड़ में देश के राजनीतिक और जनसांख्यिकीय नक्शे को बदलने की कोशिश की जा रही है। तिवारी ने यह भी कहा था कि यदि महिला आरक्षण को मौजूदा संसदीय सीटों के ढाँचे के भीतर लागू किया जाए, तो विपक्ष उसका समर्थन करने को तैयार है।
इंडिया ब्लॉक में दरार के संकेत
मानसून सत्र शुरू होने से पहले ही इंडिया ब्लॉक इस विधेयक को लेकर बंटा हुआ नज़र आया था। विधेयक में पहले परिसीमन की प्रक्रिया को लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिला आरक्षण से जोड़ा गया था, जो कि दक्षिण भारतीय राज्यों की पार्टियों के लिए विशेष रूप से संवेदनशील मुद्दा है — क्योंकि परिसीमन से उनकी सीटें घट सकती हैं। यह तनाव इंडिया ब्लॉक की आंतरिक एकजुटता की परीक्षा बन सकता है।
आगे क्या होगा
फिलहाल सरकार की कोशिश है कि मानसून सत्र में ही बिल को दोबारा पेश किया जाए। लेकिन विपक्ष के भीतर आम सहमति बनने तक इसकी राह आसान नहीं दिखती। राहुल गांधी के अगले कदम पर सभी की नज़रें टिकी हैं।