6 अगस्त 2026
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परिसीमन बिल पर रिजिजू ने राहुल गांधी को किया फोन, मानसून सत्र में तीसरी बार मांगा समर्थन

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परिसीमन बिल पर रिजिजू ने राहुल गांधी को किया फोन, मानसून सत्र में तीसरी बार मांगा समर्थन

सारांश

परिसीमन बिल पर सरकार और विपक्ष के बीच संवाद जारी है — लेकिन खाई गहरी है। रिजिजू की तीसरी कोशिश के बावजूद राहुल गांधी ने कोई वादा नहीं किया। कांग्रेस का रुख अपरिवर्तित है और इंडिया ब्लॉक के भीतर भी एकमत नहीं है।

मुख्य बातें

संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने 6 अगस्त 2026 को राहुल गांधी से फोन पर बात कर परिसीमन बिल पर समर्थन माँगा।
मानसून सत्र में यह रिजिजू की राहुल गांधी से तीसरी संपर्क-कोशिश थी।
राहुल गांधी ने कोई पक्का वादा नहीं किया; इंडिया ब्लॉक के सहयोगियों से चर्चा के बाद जवाब देने का समय माँगा।
कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल ने स्पष्ट किया कि पार्टी का रुख पिछले सत्र से अपरिवर्तित है।
संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2026 अप्रैल में बजट सत्र में लोकसभा से पारित नहीं हो सका था।
कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने कहा था कि परिसीमन के बिना महिला आरक्षण लागू हो तो विपक्ष समर्थन देगा।

संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने 6 अगस्त 2026 को लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी से फोन पर बातचीत की और संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2026 — जिसे परिसीमन बिल के नाम से जाना जाता है — को संसद में दोबारा पेश करने के लिए उनका समर्थन माँगा। सूत्रों के अनुसार, यह मानसून सत्र के दौरान रिजिजू की राहुल गांधी से इस विषय पर तीसरी संपर्क-कोशिश थी।

रिजिजू का तर्क: महिला आरक्षण की राह परिसीमन से होकर

सूत्रों ने बताया कि रिजिजू ने राहुल गांधी के समक्ष यह दलील रखी कि यदि विपक्ष परिसीमन बिल को शीघ्र दोबारा पेश करने में सहयोग दे, तो महिला आरक्षण लागू करने की प्रक्रिया में तेज़ी आएगी। उन्होंने कथित तौर पर यह भी कहा कि यदि महिला आरक्षण लागू नहीं हुआ, तो महिलाओं में नाराज़गी पैदा होगी — जो स्पष्ट रूप से राजनीतिक दबाव बनाने का प्रयास था।

राहुल गांधी का जवाब: सहयोगियों से चर्चा के बाद रुख

सूत्रों के मुताबिक, फोन पर हुई बातचीत में राहुल गांधी ने कोई पक्का वादा नहीं किया। उन्होंने कहा कि परिसीमन बिल पर कांग्रेस के सहयोगियों और इंडिया ब्लॉक के साझेदारों से विस्तृत चर्चा के बाद ही कोई स्पष्ट रुख सामने आएगा। गांधी ने इस मुद्दे पर अपना जवाब देने के लिए समय माँगा।

कांग्रेस का आधिकारिक रुख: कोई बदलाव नहीं

बुधवार को कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल ने संसद परिसर में मीडिया से बात करते हुए स्पष्ट किया कि प्रस्तावित परिसीमन बिल पर पार्टी का रुख नहीं बदला है। उन्होंने कहा, 'हमारा रुख बिल्कुल साफ है। पिछले संसद सत्र के दौरान हमने जो रुख अपनाया था, हम उसी पर कायम हैं। इसमें कोई बदलाव नहीं हुआ है।' वेणुगोपाल ने इस बारे में उड़ रही अफ़वाहों को भी खारिज किया।

पृष्ठभूमि: अप्रैल में लोकसभा में नहीं पास हो सका था बिल

गौरतलब है कि अप्रैल 2026 में बजट सत्र के दौरान संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2026 लोकसभा में पारित नहीं हो सका था। कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने उस समय स्पष्ट किया था कि विपक्ष ने इस बिल का कड़ा विरोध इसलिए किया, क्योंकि उसे आशंका थी कि महिला आरक्षण की आड़ में देश के राजनीतिक और जनसांख्यिकीय नक्शे को बदलने की कोशिश की जा रही है। तिवारी ने यह भी कहा था कि यदि महिला आरक्षण को मौजूदा संसदीय सीटों के ढाँचे के भीतर लागू किया जाए, तो विपक्ष उसका समर्थन करने को तैयार है।

इंडिया ब्लॉक में दरार के संकेत

मानसून सत्र शुरू होने से पहले ही इंडिया ब्लॉक इस विधेयक को लेकर बंटा हुआ नज़र आया था। विधेयक में पहले परिसीमन की प्रक्रिया को लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिला आरक्षण से जोड़ा गया था, जो कि दक्षिण भारतीय राज्यों की पार्टियों के लिए विशेष रूप से संवेदनशील मुद्दा है — क्योंकि परिसीमन से उनकी सीटें घट सकती हैं। यह तनाव इंडिया ब्लॉक की आंतरिक एकजुटता की परीक्षा बन सकता है।

आगे क्या होगा

फिलहाल सरकार की कोशिश है कि मानसून सत्र में ही बिल को दोबारा पेश किया जाए। लेकिन विपक्ष के भीतर आम सहमति बनने तक इसकी राह आसान नहीं दिखती। राहुल गांधी के अगले कदम पर सभी की नज़रें टिकी हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

और सरकार इसी दरार का फ़ायदा उठाना चाहती है। लेकिन कांग्रेस का रुख स्पष्ट है — परिसीमन के बिना आरक्षण — और इस पर सहमति बनाना आसान नहीं। असली सवाल यह है कि क्या सरकार महिला आरक्षण को वास्तव में प्राथमिकता मानती है, या परिसीमन ही असली लक्ष्य है।
RashtraPress
6 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

परिसीमन बिल पर किरेन रिजिजू और राहुल गांधी के बीच क्या बातचीत हुई?
संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने 6 अगस्त 2026 को राहुल गांधी को फोन कर संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2026 को दोबारा पेश करने के लिए समर्थन माँगा। राहुल गांधी ने कोई पक्का वादा नहीं किया और इंडिया ब्लॉक के सहयोगियों से चर्चा के बाद जवाब देने का समय माँगा।
संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2026 क्या है?
यह विधेयक लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिला आरक्षण को परिसीमन की प्रक्रिया से जोड़ता है। अप्रैल 2026 में बजट सत्र के दौरान यह विधेयक विपक्ष के कड़े विरोध के कारण लोकसभा में पारित नहीं हो सका था।
कांग्रेस परिसीमन बिल का विरोध क्यों कर रही है?
कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने अप्रैल में स्पष्ट किया था कि विपक्ष को आशंका है कि महिला आरक्षण की आड़ में देश के राजनीतिक और जनसांख्यिकीय नक्शे को बदलने की कोशिश की जा रही है। कांग्रेस का कहना है कि यदि महिला आरक्षण मौजूदा सीटों के ढाँचे में लागू हो, तो वह समर्थन देगी।
इंडिया ब्लॉक का परिसीमन बिल पर क्या रुख है?
इंडिया ब्लॉक इस मुद्दे पर एकमत नहीं है। मानसून सत्र से पहले ही गठबंधन में दरार के संकेत मिले थे, क्योंकि दक्षिण भारतीय पार्टियाँ परिसीमन से अपनी सीटें घटने की आशंका को लेकर सशंकित हैं। राहुल गांधी ने सहयोगियों से चर्चा के बाद रुख स्पष्ट करने का वादा किया है।
क्या मानसून सत्र में परिसीमन बिल पास होने की संभावना है?
फिलहाल संभावना अनिश्चित है। सरकार बिल दोबारा पेश करने के लिए विपक्ष का समर्थन जुटाने में लगी है, लेकिन कांग्रेस ने अपना रुख अपरिवर्तित बताया है। इंडिया ब्लॉक के भीतर आम सहमति बने बिना बिल का पारित होना मुश्किल दिखता है।
राष्ट्र प्रेस
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