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सरकार महिला आरक्षण की आड़ में परिसीमन बिल पास करने की कोशिश कर रही है: तनुज पुनिया

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सरकार महिला आरक्षण की आड़ में परिसीमन बिल पास करने की कोशिश कर रही है: तनुज पुनिया

सारांश

कांग्रेस सांसद तनुज पुनिया ने केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि महिला आरक्षण के नाम पर जनता को भ्रमित किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि सरकार असल मुद्दों से ध्यान हटाकर परिसीमन बिल पास करना चाहती है।

मुख्य बातें

महिला आरक्षण का बिल महिलाओं के लिए 33% सीटें आरक्षित करता है।
सरकार ने जनगणना के बिना परिसीमन करने का प्रस्ताव रखा है।
कांग्रेस का समर्थन महिला सशक्तिकरण के प्रति है।
विपक्ष चाहता है कि यह प्रक्रिया संविधान के अनुसार हो।
जनता अब भ्रमित नहीं हो रही है।

लखनऊ, 19 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। कांग्रेस के सांसद तनुज पुनिया ने प्रधानमंत्री के भाषण और महिला आरक्षण के मुद्दे पर केंद्र सरकार पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि सरकार महिला आरक्षण के नाम पर जनता को भ्रमित कर रही है और वास्तविक मुद्दों को दूसरी दिशा में मोड़ने की कोशिश कर रही है। उनका दावा है कि सरकार महिला आरक्षण की आड़ में परिसीमन बिल पास करवाना चाहती थी।

तनुज पुनिया ने कहा कि महिला आरक्षण संशोधन बिल को लेकर भाजपा लगातार गलत बातें फैला रही है। उनके अनुसार यह सिर्फ महिला आरक्षण का विषय नहीं था, बल्कि इसमें परिसीमन और जनगणना से जुड़े कई तकनीकी पहलू भी शामिल थे। उन्होंने यह भी कहा कि सही जनगणना और प्रक्रिया के बिना परिसीमन करना उचित नहीं है।

उन्होंने यह स्पष्ट किया कि 2023 में महिला आरक्षण बिल पर संसद में सहमति बन गई थी और विपक्ष ने भी इसका समर्थन किया था। कांग्रेस और उसके सहयोगी दल हमेशा से महिला आरक्षण के पक्ष में रहे हैं, और यदि सरकार इसे सही तरीके से लागू करती है, तो विपक्ष पूरी तरह से समर्थन देने के लिए तैयार है।

तनुज पुनिया ने सवाल उठाया कि यदि सरकार की मंशा स्पष्ट है, तो फिर जनगणना और परिसीमन में देरी क्यों हो रही है। उन्होंने कहा कि पुरानी जनगणना 2011 की है, जो अब बहुत पुरानी हो चुकी है। ऐसे में नए आंकड़ों के बिना परिसीमन करना सही नहीं होगा। उनका मानना है कि सरकार को पहले पारदर्शी तरीके से जनगणना करानी चाहिए, उसके बाद ही सीटों के पुनर्निर्धारण पर चर्चा होनी चाहिए। यदि सरकार चाहती है, तो मौजूदा 543 सीटों में से 33 प्रतिशत सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित की जाएं। विपक्ष भी इसका पूरा समर्थन करेगा।

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सरकार महिला आरक्षण को राजनीतिक दृष्टिकोण से देख रही है। उनके अनुसार, सरकार जल्दबाजी में ऐसे निर्णय ले रही है जिनका लक्ष्य आगामी चुनावों में राजनीतिक लाभ उठाना है। उन्होंने कहा कि जनता अब इन बातों को समझने लगी है और वह भ्रमित नहीं होने वाली है।

कांग्रेस नेता ने यह भी कहा कि विपक्ष महिला आरक्षण के खिलाफ नहीं है, बल्कि चाहता है कि यह प्रक्रिया संविधान और सही आंकड़ों के आधार पर हो। उन्होंने दोहराया कि यदि सरकार वास्तव में महिला सशक्तिकरण चाहती है, तो उसे सभी दलों को विश्वास में लेकर पारदर्शी तरीके से आगे बढ़ना चाहिए।

उन्होंने यह भी बताया कि संसद में महिला आरक्षण पर जो चर्चा हुई थी, उसमें संविधान की भावना के अनुसार निर्णय लेने की बात थी, लेकिन सरकार इस मुद्दे को अलग दिशा में मोड़कर राजनीतिक बहस बना रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि यह भारतीय समाज में महिला सशक्तिकरण की दिशा में उठाए गए कदमों की गंभीरता को भी दर्शाता है। सरकार का यह प्रयास है कि वह महिला आरक्षण को एक राजनीतिक टूल के रूप में इस्तेमाल कर रही है, जबकि वास्तविकता में इसे सही प्रक्रिया और आंकड़ों के आधार पर लागू करना आवश्यक है।
RashtraPress
20 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

महिला आरक्षण का बिल क्या है?
महिला आरक्षण का बिल महिलाओं को विधानसभाओं और संसद में सीटों का 33 प्रतिशत आरक्षण देने का प्रस्ताव है।
तनुज पुनिया ने सरकार पर क्या आरोप लगाया?
तनुज पुनिया ने आरोप लगाया कि सरकार महिला आरक्षण की आड़ में परिसीमन बिल पास करने की कोशिश कर रही है।
क्यों जरूरी है जनगणना से पहले परिसीमन?
जनगणना से पहले परिसीमन करना उचित नहीं है क्योंकि यह सही आंकड़ों के बिना किया जाएगा, जो लोकतंत्र के लिए आवश्यक हैं।
क्या विपक्ष महिला आरक्षण के खिलाफ है?
नहीं, विपक्ष महिला आरक्षण के खिलाफ नहीं है, बल्कि वह चाहता है कि यह प्रक्रिया संविधान और सही आंकड़ों के आधार पर हो।
सरकार को क्या करना चाहिए?
सरकार को पारदर्शी तरीके से जनगणना करानी चाहिए और फिर ही सीटों के पुनर्निर्धारण पर चर्चा करनी चाहिए।
राष्ट्र प्रेस
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