महिला आरक्षण विधेयक पर रिजिजू का राहुल गांधी को चैलेंज: 'अब बिना शर्त समर्थन में क्या दिक्कत?'
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने 8 अगस्त 2026 को लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को सीधी चुनौती दी — यदि वे सच में महिला सशक्तीकरण के हिमायती हैं, तो महिला आरक्षण विधेयक का संसद में बिना शर्त समर्थन करने में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) को कोई संकोच नहीं होना चाहिए। यह प्रतिक्रिया राहुल गांधी के उस वीडियो बयान के बाद आई, जिसमें उन्होंने कहा कि जब तक भारत की महिलाएं खुलकर अपनी बात नहीं रख पाएंगी, तब तक देश की पूर्ण प्रगति संभव नहीं है।
राहुल गांधी का बयान: महिला अभिव्यक्ति के बिना देश अधूरा
राहुल गांधी ने शुक्रवार, 8 अगस्त को एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर एक वीडियो साझा किया। इससे एक दिन पहले, गुरुवार को 'आस्क मी एनीथिंग' सत्र में भी उन्होंने यही विचार रखे थे। अपनी एक्स पोस्ट में उन्होंने लिखा: 'मैं सोच रहा था कि भारत की महिलाओं की ऊर्जा फंसी हुई है, उसे व्यक्त करने की इजाजत नहीं है, कल्पना करने की आजादी नहीं है। मेरे लिए कोई भी देश तब तक सफल नहीं हो सकता जब तक वहां की महिलाएं खुद को व्यक्त न कर सकें।'
वीडियो में राहुल गांधी ने यह भी कहा कि महिला सशक्तीकरण केवल व्यापार या राजनीति तक सीमित नहीं होना चाहिए — बल्कि महिलाओं को घर, परिवार और सार्वजनिक स्थानों पर भी निर्भीकता से बोलने और चलने की स्वतंत्रता मिलनी चाहिए। उन्होंने आगे कहा, 'महिलाओं को यह आजादी होनी चाहिए कि वे अपने माता-पिता, पति, भाई-बहन से सवाल कर सकें। भारत को सच में विकसित होना है तो पितृसत्ता और पुरुषों के कड़े नियंत्रण से महिलाओं को थोड़ी आजादी मिलनी ही चाहिए।'
रिजिजू की तीखी प्रतिक्रिया: बयान को 'सकारात्मक बदलाव' बताया
केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने एक्स पर पोस्ट करते हुए राहुल गांधी के बयान को कांग्रेस के नजरिए में 'सकारात्मक बदलाव' करार दिया। उन्होंने लिखा कि राहुल गांधी के दिल में महिलाओं को लेकर बदलाव दिख रहा है और उन्हें उम्मीद है कि अब कांग्रेस महिला आरक्षण विधेयक का बिना शर्त समर्थन करेगी। रिजिजू का यह बयान सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (BJP) की उस रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है, जिसमें विपक्ष को महिला आरक्षण के मुद्दे पर घेरा जाता है।
महिला आरक्षण विधेयक: पृष्ठभूमि और वर्तमान स्थिति
महिला आरक्षण विधेयक, जिसे आधिकारिक तौर पर संविधान (106वाँ संशोधन) अधिनियम, 2023 या नारी शक्ति वंदन अधिनियम कहा जाता है, एक ऐतिहासिक कानून है। इसके तहत लोकसभा, राज्य विधानसभाओं और दिल्ली विधानसभा में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत सीटें आरक्षित करने का प्रावधान है। गौरतलब है कि यह कानून पारित तो हो चुका है, परंतु इसके क्रियान्वयन के लिए परिसीमन प्रक्रिया पूरी होना जरूरी है, जिसे लेकर सियासी बहस अभी भी जारी है।
यह ऐसे समय में आया है जब संसद के आगामी सत्र में महिला आरक्षण के क्रियान्वयन की समयसीमा पर सभी दलों की नजरें टिकी हैं। आलोचकों का कहना है कि विधेयक पास होने के बावजूद इसे लागू करने की दिशा में ठोस कदम अभी नहीं उठाए गए हैं।
राजनीतिक संदर्भ: विपक्ष और सत्तापक्ष आमने-सामने
रिजिजू और राहुल गांधी के बीच यह वाकयुद्ध महिला राजनीतिक भागीदारी के मुद्दे पर बढ़ती राजनीतिक प्रतिस्पर्धा को दर्शाता है। BJP का तर्क है कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम उसी की सरकार की देन है, जबकि कांग्रेस दशकों से इस विधेयक की माँग करती रही है। यह विरोधाभास ही इस राजनीतिक बहस को पेचीदा बनाता है।
आगे सभी की नजरें इस बात पर होंगी कि कांग्रेस संसद में इस मुद्दे पर क्या रुख अपनाती है और सरकार परिसीमन की समयसीमा को लेकर कोई ठोस घोषणा करती है या नहीं।