पंजाब चुनाव से पहले ड्रग मनी की चिंता: 2022-26 में 73,541 मामले, नार्को-टेरर नेटवर्क का खुलासा
सारांश
मुख्य बातें
पंजाब विधानसभा चुनाव नज़दीक आने के साथ राज्य में नशीले पदार्थों की तस्करी और उससे जुड़े नार्को-टेररिज्म नेटवर्क को लेकर चिंताएँ गहरी होती जा रही हैं। लगातार जब्तियाँ और कार्रवाइयाँ होने के बावजूद समाज के कुछ तबकों का इस गैर-कानूनी धंधे में शामिल रहना अधिकारियों के लिए गंभीर चुनौती बना हुआ है। 22 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में एंटी-नारकोटिक्स टास्क फोर्स (ANTF) की तीसरी राष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस के दिन ही पंजाब और उससे जुड़े राज्यों से कई अहम घटनाक्रम सामने आए।
मुख्य घटनाक्रम
प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने मंगलवार, 22 सितंबर 2026 को दिल्ली में एक ड्रग तस्कर को गिरफ्तार किया। आरोपी पर हेरोइन के बड़े पैमाने पर आयात का आरोप है — कथित तौर पर इसे सेमी-प्रोसेस्ड टैल्क में छिपाकर लाया गया था — और यह खेप दिल्ली, पंजाब व हरियाणा में आपूर्ति के लिए थी। उसी दिन हरियाणा एंटी-टेररिस्ट स्क्वाड ने सात आरोपियों को गिरफ्तार कर एक अंतरराष्ट्रीय नार्को-टेरर नेटवर्क का पर्दाफाश किया। जाँच के अनुसार, नशीले पदार्थों की बिक्री से अर्जित ₹74 करोड़ की राशि हवाला के जरिये अफगानिस्तान भेजी गई और उसका उपयोग आतंकवादी गतिविधियों में हुआ।
इससे पहले राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) ने अफगानिस्तान, पाकिस्तान और दुबई से संचालित एक अंतरराष्ट्रीय ड्रग सिंडिकेट के कई आरोपियों के विरुद्ध छह चार्जशीट दाखिल की थीं। इस सिंडिकेट का कथित मास्टरमाइंड वितायश कोसर उर्फ राजू दुबई है, जो एक वांटेड आरोपी है। आरोप है कि यह नेटवर्क पाकिस्तानी आईएसआई के एजेंटों और अफगान नागरिकों के साथ मिलकर काम कर रहा था।
आँकड़े क्या कहते हैं
भगवंत मान नीत पंजाब सरकार के 'युद्ध नशे के विरुद्ध' अभियान के तहत 2022 से अप्रैल 2026 के बीच नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस (NDPS) अधिनियम, 1985 के अंतर्गत 73,541 मामले दर्ज हुए हैं। आँकड़ों के अनुसार, यह 2017-21 के दौरान दर्ज 52,255 मामलों की तुलना में 40 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि है। इसी अवधि में 98,596 लोगों को गिरफ्तार किया गया, जो पिछले दौर की 68,064 गिरफ्तारियों से करीब 45 प्रतिशत अधिक है। प्रशासन का दावा है कि यह बढ़ोतरी व्यापक और सतत कार्रवाई का परिणाम है।
'नशा मुक्त भारत' अभियान के तहत केंद्र सरकार ने देश के 73 जिलों को अति-संवेदनशील और 274 जिलों को संवेदनशील घोषित किया है। इनमें पंजाब के छह जिले अति-संवेदनशील श्रेणी में हैं — पाकिस्तान सीमा से लगे अमृतसर, फाजिल्का, फिरोजपुर, गुरदासपुर और तरनतारन, तथा औद्योगिक केंद्र लुधियाना।
ड्रोन से तस्करी: बढ़ता खतरा
राज्यसभा में गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने हाल ही में बताया कि 2021 के बाद से ड्रोन के जरिये ड्रग तस्करी में तेज़ी से बढ़ोतरी हुई है, जिससे पंजाब देश का सर्वाधिक प्रभावित सीमावर्ती राज्य बन गया है। अकेले 2025 में देशभर में ड्रोन-आधारित तस्करी की 305 घटनाएँ दर्ज हुईं, जिनमें से 298 घटनाएँ पंजाब सीमा पर हुईं। इनमें लगभग 460 किलोग्राम नशीले पदार्थ ज़ब्त हुए — 448 किलोग्राम हेरोइन, 9 किलोग्राम मेथामफेटामाइन और 3 किलोग्राम अफीम।
सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार, पंजाब पाकिस्तान के रास्ते अफगानिस्तान से आने वाले नशीले पदार्थों की आपूर्ति का प्रमुख मार्ग है। सीमा पार से काम करने वाले सिंडिकेट अब जीपीएस-इनेबल्ड कंसाइनमेंट, एन्क्रिप्टेड संचार और स्थानीय रिसीवर नेटवर्क जैसे आधुनिक तरीके अपना रहे हैं।
सरकार की प्रतिक्रिया और उपाय
गृह मंत्रालय के एक बयान के अनुसार, केंद्र ने ड्रग तस्करी नेटवर्क को समाप्त करने के लिए केंद्र-राज्य समन्वय ढाँचे को मज़बूत करने के कई कदम उठाए हैं। इनमें संवेदनशील इलाकों में एडवांस्ड एंटी-ड्रोन सिस्टम, हाई-टेक कैमरों सहित उन्नत निगरानी प्रणाली, और नई डिज़ाइन की फेंसिंग व फ्लडलाइट्स लगाना शामिल हैं। गौरतलब है कि यह कार्रवाइयाँ ऐसे समय में आई हैं जब पंजाब चुनाव के मद्देनज़र ड्रग मनी के राजनीतिक दुरुपयोग की आशंकाएँ भी जताई जा रही हैं।
आगे की राह
चुनाव निकट होने के साथ विशेषज्ञ इस बात पर ध्यान दिला रहे हैं कि ड्रग मनी का राजनीतिक फंडिंग में संभावित प्रवेश एक गंभीर चिंता है। ANTF की राष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस में उभरे निष्कर्ष आने वाले हफ्तों में केंद्र-राज्य समन्वय की दिशा तय करेंगे। पंजाब के लिए यह लड़ाई सिर्फ कानून-व्यवस्था की नहीं, बल्कि चुनावी पारदर्शिता और राष्ट्रीय सुरक्षा की भी है।