पंजाब में ड्रोन रोधी तकनीक से हेरोइन तस्करी पर लगाम, 486 ड्रोन बरामद; फार्मा ड्रग्स नई चुनौती
सारांश
मुख्य बातें
पंजाब पुलिस ने 13 सितंबर 2026 को बताया कि पाकिस्तान से लगती अंतरराष्ट्रीय सीमा पर सीमा सुरक्षा बल (BSF) के साथ मिलकर अपनाई गई बहुस्तरीय ड्रोन रोधी रणनीति के सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं, जिससे पंजाब में हेरोइन की उपलब्धता में उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई है। पुलिस के अनुसार, अत्याधुनिक एंटी-ड्रोन प्रणालियों की तैनाती और ज़मीनी प्रतिक्रिया तंत्र को मज़बूत करने से तस्करों के हवाई मार्गों पर प्रभावी रोक लग रही है।
एंटी-ड्रोन तकनीक का विस्तार
पुलिस के मुताबिक, राज्य में ड्रोन गतिविधियों की निगरानी और उन्हें निष्क्रिय करने के लिए कुल नौ एंटी-ड्रोन सिस्टम तैनात किए जा रहे हैं। इनमें 'बाज आंख' के तीन सिस्टम शामिल हैं, जो अगस्त 2025 से अमृतसर, तरनतारन और फिरोजपुर में सक्रिय हैं। ये सिस्टम संदिग्ध ड्रोन की प्रारंभिक स्तर पर पहचान करने और उन्हें जाम करने में सक्षम हैं।
इसके अतिरिक्त, ड्रोन सेंस D200 Pro की तीन यूनिट 3 सितंबर 2026 को सीमावर्ती जिलों में रणनीतिक स्थानों पर तैनात की गईं। यह एक दीर्घकालिक मोबाइल ड्रोन डिटेक्शन प्लेटफॉर्म है, जो ड्रोन से जुड़ी गतिविधियों और वास्तविक ड्रॉपिंग लोकेशन की सटीक पहचान करने में सहायक है, जिससे ज़मीन पर तत्काल कार्रवाई संभव हो पाती है।
ज़मीनी प्रतिक्रिया तंत्र और निगरानी ढाँचा
त्वरित कार्रवाई के लिए 147 पुलिसकर्मियों वाली 52 ड्रोन रिस्पॉन्स टीमें (DRT) गठित की गई हैं, जो BSF के साथ समन्वय में काम करती हैं। ड्रोन अलर्ट मिलने के बाद ये टीमें संदिग्ध ड्रॉपिंग लोकेशन पर पहुँचकर तलाशी लेती हैं और वहाँ खेप उठाने पहुँचने वाले तस्करों को पकड़ती हैं।
पुलिस प्रवक्ता के अनुसार, इस व्यवस्था को 600 पुलिसकर्मियों वाले 64 सेकेंड-लाइन डिफेंस नाके और 585 स्थानों पर लगाए गए 2,367 CCTV कैमरों से और मज़बूती मिल रही है। यह ऐसे समय में आया है जब सीमापार ड्रोन के ज़रिये नशा तस्करी पिछले कुछ वर्षों में एक संगठित और तकनीकी रूप से उन्नत समस्या बन गई है।
ग्राम स्तर पर सामुदायिक भागीदारी
सीमावर्ती क्षेत्रों में गठित विलेज डिफेंस कमेटियों (VDC) को भी ड्रोन रिस्पॉन्स टीमों के साथ जोड़ा गया है। पुलिस के अनुसार, ये समितियाँ संदिग्ध गतिविधियों की सूचना देने में 'आँख और कान' की भूमिका निभा रही हैं। गौरतलब है कि सामुदायिक भागीदारी को इस अभियान की एक महत्त्वपूर्ण कड़ी माना जा रहा है।
ड्रोन बरामदगी को प्रोत्साहित करने के लिए प्रत्येक ड्रोन पर ₹25,000 का नकद इनाम निर्धारित किया गया है। पुलिस के मुताबिक, इस इनाम नीति के तहत इस वर्ष अब तक करीब ₹2 करोड़ वितरित किए जा चुके हैं।
'युद्ध नशों के विरुद्ध' अभियान के आँकड़े
पंजाब पुलिस के 'युद्ध नशों के विरुद्ध' अभियान के तहत 1 मार्च 2025 से अब तक करीब 80,000 लोगों को गिरफ्तार किया गया है और 486 ड्रोन बरामद किए गए हैं। मादक पदार्थ नेटवर्क की आर्थिक कमर तोड़ने के लिए वित्तीय जाँच भी तेज़ की गई है, जिसके तहत ₹336 करोड़ से अधिक मूल्य की संपत्तियाँ फ्रीज़ की गई हैं।
नई चुनौती: फार्मास्युटिकल ड्रग्स की तस्करी
पुलिस ने चेतावनी दी है कि नशे के खिलाफ लड़ाई में एक नई चुनौती उभर रही है — दूसरे राज्यों से पंजाब में तस्करी कर लाई जा रही फार्मास्युटिकल ड्रग्स अब सबसे गंभीर खतरा बन गई हैं। जब्त दवाओं के विश्लेषण के अनुसार, इनमें से अधिकांश हिमाचल प्रदेश, गुजरात, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, हरियाणा और दिल्ली में निर्मित हैं।
यह प्रवृत्ति संकेत देती है कि हेरोइन की आपूर्ति पर लगाम लगने के बाद तस्कर वैकल्पिक मार्गों और नशीले पदार्थों की ओर रुख कर रहे हैं — जो कि कानून प्रवर्तन के लिए एक जटिल अंतर-राज्यीय समस्या है। आगे इस चुनौती से निपटने के लिए राज्यों के बीच समन्वय और केंद्रीय एजेंसियों की भूमिका निर्णायक होगी।