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मराठा आरक्षण: आजाद मैदान अनशन पर रोक के बाद जरांगे पाटिल ने महायुति सरकार पर बोला हमला

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मराठा आरक्षण: आजाद मैदान अनशन पर रोक के बाद जरांगे पाटिल ने महायुति सरकार पर बोला हमला

सारांश

मुंबई पुलिस ने आजाद मैदान में 19 सितंबर की भूख हड़ताल की अनुमति नकारी तो मनोज जरांगे पाटिल ने तत्काल चिकित्सा उपचार और तरल पदार्थ बंद करने की घोषणा कर दी। 15 सितंबर को पदयात्रा और कानूनी चुनौती — दोनों मोर्चों पर आंदोलन तेज़ होने के संकेत हैं।

मुख्य बातें

मुंबई पुलिस ने 19 सितंबर को आजाद मैदान में प्रस्तावित भूख हड़ताल की अनुमति देने से इनकार किया।
मनोज जरांगे पाटिल ने महायुति सरकार पर संवैधानिक अधिकारों के उल्लंघन का आरोप लगाया।
जरांगे पाटिल ने तत्काल चिकित्सा उपचार और तरल पदार्थ लेना बंद करने की घोषणा की।
अंतरवाली सराटी से मुंबई तक पदयात्रा 15 सितंबर को निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार शुरू होगी।
कानूनी टीम पुलिस आयुक्त के आदेश को अदालत में चुनौती दे सकती है।
पुलिस ने 2025 के सार्वजनिक सभा, प्रदर्शन और जुलूस नियमों के संभावित उल्लंघन को अनुमति न देने का आधार बताया।

मराठा आरक्षण आंदोलन के प्रमुख नेता मनोज जरांगे पाटिल ने रविवार, 13 सितंबर 2026 को महायुति सरकार पर कड़ा प्रहार किया, जब मुंबई पुलिस ने 19 सितंबर को आजाद मैदान में प्रस्तावित भूख हड़ताल की अनुमति देने से इनकार कर दिया। जालना जिले के अंतरवाली सराटी से मीडिया को संबोधित करते हुए जरांगे पाटिल ने सरकार पर संवैधानिक अधिकारों के हनन और राज्य में अस्थिरता फैलाने की कोशिश का आरोप लगाया।

पुलिस ने क्यों नहीं दी अनुमति

मुंबई पुलिस ने प्रदर्शन की अनुमति नकारते हुए 2025 के सार्वजनिक सभा, प्रदर्शन और जुलूस नियमों के संभावित उल्लंघन का हवाला दिया। पुलिस ने यह भी उल्लेख किया कि आजाद मैदान में पूर्व के प्रदर्शनों के दौरान निर्धारित शर्तों का कथित तौर पर पालन नहीं किया गया था। इसके अलावा, आगामी त्योहारों के मद्देनज़र कानून व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका को भी आधार बनाया गया।

जरांगे पाटिल की तीखी प्रतिक्रिया

जरांगे पाटिल ने इस आदेश को 'तानाशाही और मनमानी' करार देते हुए सवाल किया, "सरकार यह क्यों मान रही है कि हम प्रदर्शन शुरू होने से पहले ही नियम तोड़ेंगे? यह सरकार किस कानून के तहत काम कर रही है?" उन्होंने उच्च न्यायालय के उस आदेश का भी हवाला दिया, जिसमें कहा गया था कि उन्हें मुंबई जाने से नहीं रोका जा सकता। उनके अनुसार, पुलिस की कार्रवाई न्यायपालिका की भावना के विरुद्ध है।

त्योहारों के दौरान अव्यवस्था की आशंका को खारिज करते हुए जरांगे पाटिल ने कहा कि इससे पहले गणेश चतुर्थी के दौरान भी उनके आंदोलन शांतिपूर्ण रहे हैं और किसी प्रकार की हिंसा नहीं हुई।

तरल पदार्थ बंद करने की घोषणा

पुलिस की अनुमति नहीं मिलने और राज्य नेतृत्व पर राजनीतिक दबाव का आरोप लगाते हुए जरांगे पाटिल ने तत्काल अपना चिकित्सा उपचार और तरल पदार्थ लेना बंद करने की घोषणा कर दी। उन्होंने कहा, "अगर प्रशासन अन्याय के ज़रिए हमारी आवाज़ दबाना चाहता है, तो मैं इसके परिणाम भुगतने के लिए तैयार हूँ, लेकिन आत्मसमर्पण नहीं करूँगा।" यह घोषणा आंदोलन को और अधिक तीव्र रूप दे सकती है।

पदयात्रा और कानूनी कदम

जरांगे पाटिल ने स्पष्ट किया कि अंतरवाली सराटी से मुंबई तक की उनकी पदयात्रा 15 सितंबर को निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार शुरू होगी। उन्होंने यह भी बताया कि उनकी कानूनी टीम आने वाले दिनों में पुलिस आयुक्त के अनुमति नकारने वाले आदेश को अदालत में चुनौती दे सकती है। उन्होंने कहा, "हम संविधान से बंधे हैं और न्यायपालिका का सम्मान करते हैं, लेकिन सरकार के मनमाने निर्देशों के आगे नहीं झुकेंगे।"

आगे क्या होगा

यह ऐसे समय में आया है जब मराठा आरक्षण आंदोलन महाराष्ट्र की राजनीति में केंद्रीय स्थान बनाए हुए है। 19 सितंबर की समयसीमा नज़दीक आने के साथ राज्य में तनाव का माहौल बना हुआ है। गौरतलब है कि अंतरवाली सराटी पहले भी इस आंदोलन का केंद्र रहा है और जरांगे पाटिल की भूख हड़तालों ने राज्य सरकार को कई बार वार्ता की मेज़ पर आने पर मजबूर किया है। आने वाले दिनों में कानूनी चुनौती और पदयात्रा दोनों मिलकर सरकार पर दबाव बढ़ा सकते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन समय और संदर्भ इसे सीधे राजनीतिक रंग देते हैं — 19 सितंबर की समयसीमा से ठीक पहले अनुमति नकारना महायुति सरकार की बेचैनी को उजागर करता है। जरांगे पाटिल की हर भूख हड़ताल अब तक सरकार को वार्ता की मेज़ पर खींचती रही है; इस बार रोक उन्हें और अधिक आक्रामक मोर्चा खोलने का नैतिक आधार दे रही है। असली सवाल यह है कि क्या कानूनी चुनौती और पदयात्रा का यह दोहरा दबाव राज्य सरकार को मराठा आरक्षण पर ठोस कदम उठाने पर विवश करेगा — या फिर यह टकराव त्योहारों के मौसम में महाराष्ट्र की सामाजिक एकता के लिए नई चुनौती बन जाएगा।
RashtraPress
13 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मुंबई पुलिस ने आजाद मैदान में अनशन की अनुमति क्यों नहीं दी?
मुंबई पुलिस ने 2025 के सार्वजनिक सभा, प्रदर्शन और जुलूस नियमों के संभावित उल्लंघन का हवाला देते हुए अनुमति नकारी। पुलिस ने यह भी कहा कि पिछले प्रदर्शनों के दौरान निर्धारित शर्तों का कथित तौर पर पालन नहीं किया गया था।
मनोज जरांगे पाटिल की 15 सितंबर की पदयात्रा क्या है?
जरांगे पाटिल ने घोषणा की है कि वे 15 सितंबर को जालना के अंतरवाली सराटी से मुंबई तक पदयात्रा शुरू करेंगे। यह पदयात्रा मराठा आरक्षण की माँग को लेकर 19 सितंबर को प्रस्तावित भूख हड़ताल से पहले की जाएगी।
जरांगे पाटिल ने तरल पदार्थ बंद करने की घोषणा क्यों की?
पुलिस द्वारा अनुमति नकारे जाने और महायुति सरकार पर राजनीतिक दबाव का आरोप लगाते हुए जरांगे पाटिल ने तत्काल अपना चिकित्सा उपचार और तरल पदार्थ लेना बंद करने की घोषणा की। उनका कहना है कि वे परिणाम भुगतने को तैयार हैं लेकिन आत्मसमर्पण नहीं करेंगे।
क्या आजाद मैदान अनशन पर रोक को अदालत में चुनौती दी जाएगी?
जरांगे पाटिल के अनुसार, उनकी कानूनी टीम पुलिस आयुक्त के आदेश को अदालत में चुनौती दे सकती है। उन्होंने उच्च न्यायालय के उस आदेश का हवाला भी दिया जिसमें कहा गया था कि उन्हें मुंबई जाने से नहीं रोका जा सकता।
मराठा आरक्षण आंदोलन और महायुति सरकार के बीच विवाद की मुख्य वजह क्या है?
मराठा समुदाय को सरकारी नौकरियों और शिक्षा में आरक्षण दिलाने की माँग को लेकर यह आंदोलन चल रहा है। जरांगे पाटिल का आरोप है कि महायुति सरकार संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन कर और प्रदर्शन की अनुमति न देकर उनकी आवाज़ दबाने की कोशिश कर रही है।
राष्ट्र प्रेस
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