मराठा आरक्षण: आजाद मैदान अनशन पर रोक के बाद जरांगे पाटिल ने महायुति सरकार पर बोला हमला
सारांश
मुख्य बातें
मराठा आरक्षण आंदोलन के प्रमुख नेता मनोज जरांगे पाटिल ने रविवार, 13 सितंबर 2026 को महायुति सरकार पर कड़ा प्रहार किया, जब मुंबई पुलिस ने 19 सितंबर को आजाद मैदान में प्रस्तावित भूख हड़ताल की अनुमति देने से इनकार कर दिया। जालना जिले के अंतरवाली सराटी से मीडिया को संबोधित करते हुए जरांगे पाटिल ने सरकार पर संवैधानिक अधिकारों के हनन और राज्य में अस्थिरता फैलाने की कोशिश का आरोप लगाया।
पुलिस ने क्यों नहीं दी अनुमति
मुंबई पुलिस ने प्रदर्शन की अनुमति नकारते हुए 2025 के सार्वजनिक सभा, प्रदर्शन और जुलूस नियमों के संभावित उल्लंघन का हवाला दिया। पुलिस ने यह भी उल्लेख किया कि आजाद मैदान में पूर्व के प्रदर्शनों के दौरान निर्धारित शर्तों का कथित तौर पर पालन नहीं किया गया था। इसके अलावा, आगामी त्योहारों के मद्देनज़र कानून व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका को भी आधार बनाया गया।
जरांगे पाटिल की तीखी प्रतिक्रिया
जरांगे पाटिल ने इस आदेश को 'तानाशाही और मनमानी' करार देते हुए सवाल किया, "सरकार यह क्यों मान रही है कि हम प्रदर्शन शुरू होने से पहले ही नियम तोड़ेंगे? यह सरकार किस कानून के तहत काम कर रही है?" उन्होंने उच्च न्यायालय के उस आदेश का भी हवाला दिया, जिसमें कहा गया था कि उन्हें मुंबई जाने से नहीं रोका जा सकता। उनके अनुसार, पुलिस की कार्रवाई न्यायपालिका की भावना के विरुद्ध है।
त्योहारों के दौरान अव्यवस्था की आशंका को खारिज करते हुए जरांगे पाटिल ने कहा कि इससे पहले गणेश चतुर्थी के दौरान भी उनके आंदोलन शांतिपूर्ण रहे हैं और किसी प्रकार की हिंसा नहीं हुई।
तरल पदार्थ बंद करने की घोषणा
पुलिस की अनुमति नहीं मिलने और राज्य नेतृत्व पर राजनीतिक दबाव का आरोप लगाते हुए जरांगे पाटिल ने तत्काल अपना चिकित्सा उपचार और तरल पदार्थ लेना बंद करने की घोषणा कर दी। उन्होंने कहा, "अगर प्रशासन अन्याय के ज़रिए हमारी आवाज़ दबाना चाहता है, तो मैं इसके परिणाम भुगतने के लिए तैयार हूँ, लेकिन आत्मसमर्पण नहीं करूँगा।" यह घोषणा आंदोलन को और अधिक तीव्र रूप दे सकती है।
पदयात्रा और कानूनी कदम
जरांगे पाटिल ने स्पष्ट किया कि अंतरवाली सराटी से मुंबई तक की उनकी पदयात्रा 15 सितंबर को निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार शुरू होगी। उन्होंने यह भी बताया कि उनकी कानूनी टीम आने वाले दिनों में पुलिस आयुक्त के अनुमति नकारने वाले आदेश को अदालत में चुनौती दे सकती है। उन्होंने कहा, "हम संविधान से बंधे हैं और न्यायपालिका का सम्मान करते हैं, लेकिन सरकार के मनमाने निर्देशों के आगे नहीं झुकेंगे।"
आगे क्या होगा
यह ऐसे समय में आया है जब मराठा आरक्षण आंदोलन महाराष्ट्र की राजनीति में केंद्रीय स्थान बनाए हुए है। 19 सितंबर की समयसीमा नज़दीक आने के साथ राज्य में तनाव का माहौल बना हुआ है। गौरतलब है कि अंतरवाली सराटी पहले भी इस आंदोलन का केंद्र रहा है और जरांगे पाटिल की भूख हड़तालों ने राज्य सरकार को कई बार वार्ता की मेज़ पर आने पर मजबूर किया है। आने वाले दिनों में कानूनी चुनौती और पदयात्रा दोनों मिलकर सरकार पर दबाव बढ़ा सकते हैं।