13 सितंबर 2026
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मनोज जरांगे के मुंबई मार्च पर BJP विधायक राम कदम का पलटवार: 'सड़क से नहीं, संविधान से होंगी मांगें मंजूर'

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मनोज जरांगे के मुंबई मार्च पर BJP विधायक राम कदम का पलटवार: 'सड़क से नहीं, संविधान से होंगी मांगें मंजूर'

सारांश

BJP विधायक राम कदम ने मनोज जरांगे पाटिल के मुंबई मार्च और भूख हड़ताल की घोषणा को सीधे चुनौती दी — कहा, न्यायपालिका में टिकने वाला आरक्षण चाहिए, सड़क का दबाव नहीं। मराठा आरक्षण की लड़ाई एक बार फिर सड़क बनाम संविधान के मोर्चे पर आ खड़ी हुई है।

मुख्य बातें

BJP विधायक राम कदम ने 13 सितंबर 2026 को मनोज जरांगे पाटिल के प्रस्तावित मुंबई मार्च और अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल को अस्वीकार्य बताया।
कदम ने कहा कि मांगें सड़क के दबाव से नहीं, बल्कि संवैधानिक और लोकतांत्रिक प्रक्रिया के तहत होनी चाहिए।
उन्होंने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की सरकार के पूर्व के फैसलों को न्यायपालिका में टिकाऊ बताया।
कदम ने चेतावनी दी कि 'दूसरे की थाली से छीनकर देना' उच्च न्यायालय में नहीं टिकेगा।
ABVP द्वारा उमर खालिद डॉक्यूमेंट्री विरोध पर कदम ने कहा — विश्वविद्यालय प्रोपेगैंडा का मंच नहीं बन सकता।

महाराष्ट्र भारतीय जनता पार्टी (BJP) के विधायक राम कदम ने 13 सितंबर 2026 को मराठा आरक्षण आंदोलनकारी मनोज जरांगे पाटिल के प्रस्तावित मुंबई मार्च और अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल की घोषणा पर कड़ी प्रतिक्रिया दी। कदम ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि सड़कों के जरिए दबाव बनाकर कोई भी मांग स्वीकार नहीं की जा सकती — हर माँग संवैधानिक और लोकतांत्रिक प्रक्रिया के तहत ही होनी चाहिए।

राम कदम की मुख्य आपत्तियाँ

विधायक राम कदम ने कहा, 'मुंबई के लोगों की शांति, यहाँ का गणेश उत्सव और सड़क पर यातायात जैसी चीजें भी महत्वपूर्ण हैं।' उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि मराठा समाज को भली-भाँति ज्ञात है कि 'देवा भाऊ' की ओर से आरक्षण दिया गया है। कदम ने सवाल उठाया कि जिन्होंने आरक्षण दिया उन पर ही सड़कों के माध्यम से दबाव बनाना कहाँ तक न्यायसंगत है, जबकि जिन्होंने आरक्षण नकारा उनके खिलाफ जरांगे कुछ नहीं कह रहे।

उन्होंने कहा, 'जो भी मांगें हैं, वह संवैधानिक और लोकतांत्रिक तरीके व कानून के तहत होनी चाहिए।'

न्यायपालिका की कसौटी पर सवाल

कदम ने यह भी तर्क दिया कि 'दूसरे की थाली से छीनकर किसी और को देना' — न्यायपालिका में टिक नहीं पाएगा। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार कोई घोषणा करती है और वह उच्च न्यायालय में टिक न पाए, तो क्या यह मराठा समाज को स्वीकार होगा। इस संदर्भ में उन्होंने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की सरकार की सराहना करते हुए कहा कि पूर्व में जो भी फैसले लिए गए, वे सभी न्यायपालिका की कसौटी पर खरे उतरे।

उमर खालिद डॉक्यूमेंट्री विवाद पर रुख

इसी बातचीत में कदम ने ABVP द्वारा उमर खालिद पर बनी डॉक्यूमेंट्री की स्क्रीनिंग के विरोध पर भी अपनी राय रखी। उन्होंने कहा, 'यूनिवर्सिटी विचारों का मंच होती है, लेकिन यह किसी खास विचारधारा को बढ़ावा देने का मंच नहीं बन सकती।' उनके अनुसार, अगर कोई विचार पेश किया जाए तो उसके तथ्य, तर्क और खुली चर्चा भी साथ होनी चाहिए।

कदम ने सवाल किया कि 'भारत तेरे टुकड़े होंगे' जैसे नारों और 'टुकड़े-टुकड़े गैंग' की विचारधारा के साथ देश कैसे तरक्की कर सकता है। उन्होंने कहा कि शैक्षणिक संस्थाओं को बिना बहस के प्रोपेगैंडा का मंच नहीं बनने दिया जाना चाहिए।

आंदोलन की पृष्ठभूमि

गौरतलब है कि मनोज जरांगे पाटिल मराठा समुदाय को अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) श्रेणी में आरक्षण दिलाने की माँग को लेकर लंबे समय से आंदोलनरत हैं। उन्होंने कई बार भूख हड़ताल की है और महाराष्ट्र सरकार पर दबाव बनाने के लिए बड़े मार्चों का आयोजन किया है। यह ऐसे समय में आया है जब राज्य में गणेश उत्सव का माहौल है और मुंबई की यातायात व्यवस्था पहले से दबाव में रहती है।

आगे क्या होगा

मनोज जरांगे के प्रस्तावित मुंबई मार्च और भूख हड़ताल की तारीख अभी तक अंतिम रूप से तय नहीं की गई है, लेकिन BJP के इस तीखे रुख से स्पष्ट है कि सत्तारूढ़ दल आंदोलन के प्रति सहिष्णु नहीं रहेगा। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, मराठा आरक्षण की यह लड़ाई अदालतों में भी निर्णायक मोड़ पर पहुँच सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन सवाल यह भी है कि सरकार ने अब तक कोई ठोस वैधानिक रास्ता क्यों नहीं निकाला। गणेश उत्सव और यातायात का उल्लेख राजनीतिक रूप से चतुर है — लेकिन यह आंदोलन के मूल सामाजिक दर्द को नज़रअंदाज़ करता है। जब तक मराठा आरक्षण का कोई न्यायिक रूप से टिकाऊ समाधान नहीं निकलता, तब तक यह टकराव सड़क और अदालत — दोनों पर जारी रहेगा।
RashtraPress
13 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मनोज जरांगे पाटिल का प्रस्तावित मुंबई मार्च किस माँग को लेकर है?
मनोज जरांगे पाटिल मराठा समुदाय को अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) श्रेणी में सरकारी नौकरियों और शिक्षा में आरक्षण दिलाने की माँग को लेकर आंदोलनरत हैं। इसी माँग को दोहराने के लिए उन्होंने मुंबई मार्च और अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल की घोषणा की है।
BJP विधायक राम कदम ने जरांगे के आंदोलन पर क्या कहा?
BJP विधायक राम कदम ने कहा कि सड़कों के जरिए दबाव बनाकर मांगें मंजूर नहीं हो सकतीं और हर माँग संवैधानिक व लोकतांत्रिक प्रक्रिया के तहत होनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि जो आरक्षण न्यायपालिका में न टिके, वह मराठा समाज के लिए भी हितकारी नहीं होगा।
मराठा आरक्षण मामले में न्यायपालिका की क्या भूमिका रही है?
मराठा आरक्षण को अतीत में उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती दी जा चुकी है और कई बार इसे कानूनी रूप से अमान्य ठहराया गया है। कदम का तर्क है कि फडणवीस सरकार के पूर्व के फैसले न्यायपालिका में टिके, इसलिए किसी भी नई घोषणा का भी वैधानिक रूप से मजबूत होना जरूरी है।
ABVP ने उमर खालिद डॉक्यूमेंट्री का विरोध क्यों किया और कदम ने क्या कहा?
ABVP ने विश्वविद्यालय परिसर में उमर खालिद पर बनी डॉक्यूमेंट्री की स्क्रीनिंग का विरोध किया। राम कदम ने इस विरोध का समर्थन करते हुए कहा कि विश्वविद्यालय किसी खास विचारधारा के प्रचार का मंच नहीं बन सकते और किसी भी विचार के साथ उसके तथ्य और खुली बहस भी होनी चाहिए।
गणेश उत्सव के दौरान मुंबई मार्च क्यों विवादास्पद है?
मुंबई में गणेश उत्सव के दौरान पहले से ही भारी भीड़ और यातायात जाम की स्थिति रहती है। BJP विधायक राम कदम ने इसी आधार पर कहा कि इस समय बड़े मार्च से मुंबईवासियों की शांति और यातायात दोनों प्रभावित होंगे।
राष्ट्र प्रेस
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