क्या मराठा आंदोलन के तहत मनोज जरांगे से बातचीत के बाद प्रतिनिधिमंडल विखे-पाटिल के घर पहुंचा?

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क्या मराठा आंदोलन के तहत मनोज जरांगे से बातचीत के बाद प्रतिनिधिमंडल विखे-पाटिल के घर पहुंचा?

सारांश

क्या मराठा आंदोलन के नेता मनोज जरांगे की अनशन से संबंधित मुलाकात ने आरक्षण के मुद्दे को सुलझाने में मदद की? जानिए इस महत्वपूर्ण बैठक के पीछे की कहानी और मराठा समुदाय की स्थिति पर ताजा अपडेट!

Key Takeaways

  • मनोज जरांगे का अनशन मराठा आरक्षण के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है।
  • प्रतिनिधिमंडल ने राधाकृष्ण विखे-पाटिल से मुलाकात की है।
  • मराठा समुदाय का आक्रोश बढ़ रहा है।
  • 1980 से मराठा आरक्षण की मांग चल रही है।
  • सरकार को जल्दी समाधान निकालने की आवश्यकता है।

मुंबई, 30 अगस्त (राष्ट्र प्रेस)। मराठा आरक्षण के मुद्दे पर मुंबई के आजाद मैदान में अनिश्चितकालीन अनशन पर बैठे मनोज जरांगे से एक प्रतिनिधिमंडल ने मुलाकात की। इसके पश्चात यह प्रतिनिधिमंडल महाराष्ट्र के जल संसाधन मंत्री और मराठा आरक्षण उपसमिति के अध्यक्ष राधाकृष्ण विखे-पाटिल से मिलने उनके रॉयल स्टोन बंग्लो पर पहुंचे। इस विषय पर एक बार फिर बैठक चल रही है।

वहीं, शिवसेना (यूबीटी) के नेता अंबादास दानवे और महाराष्ट्र कांग्रेस के नेता नसीम खान भी अनशन पर बैठे मनोज जरांगे पाटिल से मिलने पहुंचे।

दौंड तालुका के मराठा समुदाय के नेताओं ने भी मनोज जरांगे का समर्थन किया है और मराठा समुदाय के लिए आरक्षण की मांग उठाई है। हालांकि, मुंबई गए मराठा प्रदर्शनकारियों को कई समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। वहाँ न तो पानी की व्यवस्था है और न ही भोजन की। मराठा प्रदर्शनकारियों की स्थिति बदतर हो गई है, जिसके कारण अब मराठा समुदाय में आक्रोश है।

इस आंदोलन के दौरान, मराठा महासंघ के शहर अध्यक्ष शैलेंद्र पवार ने भी अपनी स्थिति स्पष्ट की है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस समय-समय पर आश्वासन देते हैं, लेकिन ऐसा लगता है कि कोई ठोस समाधान नहीं निकल रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि मराठा आरक्षण के लिए आंदोलन 1980 से शुरू हुआ है, लेकिन आज तक किसी भी सरकार ने इस पर कोई निर्णय नहीं लिया। अत: प्रशासन से अनुरोध किया गया है कि मराठा आरक्षण पर कोई समाधान निकाला जाए और समुदाय को जल्द से जल्द आरक्षण दिया जाए।

इससे पहले, महाराष्ट्र के मंत्री राधाकृष्ण विखे-पाटिल ने कहा था कि केवल मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की आलोचना करने से आरक्षण का मुद्दा हल नहीं होगा। उन्होंने पिछले सरकारों को घेरते हुए कहा कि महा विकास अघाड़ी के नेताओं को सरकार को केवल सलाह देने के बजाय मराठा समुदाय को आरक्षण न देने के लिए प्रायश्चित करना चाहिए। सरकार का मानना है कि इस मुद्दे का समाधान होना चाहिए, इसलिए जस्टिस शिंदे, कोंकण के संभागीय आयुक्त, और हमारी समिति के सदस्य सचिव इन सभी मुद्दों पर चर्चा करने वाले हैं।

Point of View

यह स्पष्ट है कि मराठा आरक्षण का मुद्दा लंबे समय से लटका हुआ है। सरकार को चाहिए कि वह इस समुदाय की मांगों पर गंभीरता से ध्यान दे और त्वरित समाधान प्रदान करे। यह न केवल मराठा समुदाय के लिए, बल्कि पूरे समाज के लिए आवश्यक है।
NationPress
30/08/2025

Frequently Asked Questions

मराठा आरक्षण आंदोलन कब शुरू हुआ?
मराठा आरक्षण के लिए आंदोलन 1980 से चल रहा है।
मनोज जरांगे ने अनशन क्यों शुरू किया?
उन्होंने मराठा समुदाय के लिए आरक्षण की मांग को लेकर अनशन शुरू किया है।
क्या सरकार ने मराठा आरक्षण पर बात की है?
सरकार के मंत्री राधाकृष्ण विखे-पाटिल ने कहा है कि आरक्षण का मुद्दा हल होना चाहिए।
मराठा समुदाय के लिए आरक्षण का महत्व क्या है?
आरक्षण से मराठा समुदाय को शिक्षा और रोजगार में अवसर प्राप्त होंगे।
क्या अनशन से समाधान निकलेगा?
अनशन ने इस मुद्दे को फिर से सुर्खियों में ला दिया है, लेकिन ठोस समाधान की आवश्यकता है।