हैदराबाद लोक अदालत में 1.51 लाख आपराधिक मामले निपटे, साइबर पीड़ितों को ₹42.29 करोड़ वापस
सारांश
मुख्य बातें
तेलंगाना की राजधानी हैदराबाद में आयोजित तीसरी राष्ट्रीय लोक अदालत के दौरान 1,51,164 समझौता-योग्य आपराधिक मामलों का सफलतापूर्वक निपटारा किया गया, जिनमें साइबर धोखाधड़ी के 3,896 मामले भी शामिल थे। तेलंगाना पुलिस ने 13 सितंबर 2026 को यह जानकारी दी। साइबर अपराध पीड़ितों को इस प्रक्रिया के तहत कुल ₹42.29 करोड़ की राशि वापस लौटाई गई।
मुख्य घटनाक्रम
डायरेक्टर जनरल ऑफ पुलिस (डीजीपी) कार्यालय की ओर से जारी विज्ञप्ति के अनुसार, निपटारे की प्रक्रिया 3 सितंबर को शुरू हुई और 12 सितंबर 2026 को पूरी हुई। इस दस-दिवसीय अभियान के दौरान तेलंगाना भर की सभी पुलिस इकाइयों ने हिस्सा लिया।
निपटाए गए कुल 1,51,164 मामलों में 21,843 एफआईआर मामले, 1,404 आपदा प्रबंधन मामले, 61,052 छोटे-मोटे मामले और 62,969 मोटर वाहन अधिनियम के मामले शामिल हैं। गौरतलब है कि इस पहल का केंद्रीय उद्देश्य अदालतों में लंबित मामलों की संख्या कम करना और वादियों का समय व धन बचाना था।
साइबर धोखाधड़ी पीड़ितों को राहत
सीआईडी के डीजी के अनुसार, साइबर अपराध की श्रेणी में निपटाए गए 3,896 मामलों में पीड़ितों को कुल ₹42.29 करोड़ की राशि वापस दिलाई गई। यह इस लोक अदालत का सबसे उल्लेखनीय पहलू रहा, क्योंकि साइबर धोखाधड़ी के मामले आमतौर पर लंबे समय तक न्यायालयों में लंबित रहते हैं और पीड़ितों को राशि वापस मिलने की संभावना कम होती है।
यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में साइबर अपराध के मामले तेज़ी से बढ़ रहे हैं और पारंपरिक न्यायिक प्रक्रिया के ज़रिए इनका निपटारा अत्यंत धीमा रहता है।
शीर्ष प्रदर्शन करने वाली इकाइयाँ
राष्ट्रीय लोक अदालत में सर्वाधिक मामलों का निपटारा करने वाली पाँच इकाइयाँ निम्नलिखित रहीं:
हैदराबाद ने 15,944 मामले निपटाकर पहला स्थान हासिल किया। इसके बाद खम्मम (10,955 मामले), गडवाल (8,469 मामले), वारंगल (8,404 मामले) और मल्कजगिरी (8,109 मामले) का स्थान रहा।
संयुक्त प्रयासों से संभव हुई सफलता
यह व्यापक पहल तेलंगाना राज्य कानूनी सेवा प्राधिकरण, जिला न्यायाधीशों, मजिस्ट्रेटों, जिला कानूनी सेवा प्राधिकरणों, पुलिस आयुक्तों और जिला पुलिस अधीक्षकों के संयुक्त एवं समन्वित प्रयासों से सफल रही। पुलिस विभाग ने पहले से निपटारे के योग्य मामलों की पहचान कर दोनों पक्षों को नोटिस भेजे थे, जिससे प्रक्रिया सुचारू रूप से चल सकी।
आने वाले समय में राज्य में इसी तरह की और लोक अदालतें आयोजित किए जाने की संभावना है, ताकि लंबित मामलों का बोझ और कम किया जा सके।