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तेलंगाना साइबर सुरक्षा रैंकिंग: डीजीपी सीवी आनंद ने 15वें स्थान से शीर्ष पर पहुँचने का दिया निर्देश

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तेलंगाना साइबर सुरक्षा रैंकिंग: डीजीपी सीवी आनंद ने 15वें स्थान से शीर्ष पर पहुँचने का दिया निर्देश

सारांश

तेलंगाना के डीजीपी सीवी आनंद ने साइबर सुरक्षा की राष्ट्रीय रैंकिंग में राज्य की 15वीं स्थिति को चुनौती बताते हुए अधिकारियों को शीर्ष पर पहुँचने का निर्देश दिया। धन वसूली में 18वाँ और ई-जीरो एफआईआर में 13वाँ स्थान — सुधार की राह लंबी है।

मुख्य बातें

डीजीपी सीवी आनंद ने 24 जुलाई को वीडियो कॉन्फ्रेंस के ज़रिए सभी पुलिस इकाइयों के साथ साइबर सुरक्षा समीक्षा बैठक की।
तेलंगाना साइबर सुरक्षा मापदंडों में 15वें स्थान पर है; डीजीपी ने राष्ट्रीय रैंकिंग में शीर्ष स्थान हासिल करने का लक्ष्य दिया।
राज्य धन वसूली में 46.6% दर के साथ 18वें , ई-जीरो एफआईआर में 13वें और जीआरएम प्रदर्शन में चौथे स्थान पर है।
टी-स्पार्क और TCSB के समन्वय से मात्र दो दिनों में 20 ई-जीरो एफआईआर दर्ज की गईं।
केंद्र सरकार ने 'डिजिटल अरेस्ट' स्कैम की बढ़ती संख्या पर गंभीर चिंता जताई है।
राष्ट्रीय रैंकिंग 9 KPI पर आधारित है; डीजीपी ने IEC गतिविधियाँ और क्षमता निर्माण मज़बूत करने के निर्देश दिए।

तेलंगाना के पुलिस महानिदेशक सीवी आनंद ने शुक्रवार, 24 जुलाई को वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से राज्य की सभी पुलिस इकाइयों के अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की और स्पष्ट निर्देश दिया कि तेलंगाना को साइबर सुरक्षा की राष्ट्रीय रैंकिंग में शीर्ष स्थान हासिल करना होगा। फिलहाल राज्य साइबर सुरक्षा मापदंडों में 15वें स्थान पर है, जिसे डीजीपी ने अपर्याप्त बताते हुए सुधार की माँग की।

बैठक का एजेंडा और समीक्षा का दायरा

बैठक में साइबर सुरक्षा पहलों, ई-जीरो एफआईआर प्रणाली और अपराध एवं आपराधिक ट्रैकिंग नेटवर्क एवं सिस्टम (CCTNS) के कार्यान्वयन की विस्तृत समीक्षा की गई। डीजीपी ने बताया कि प्रधानमंत्री का प्रगति (सक्रिय शासन और समयबद्ध कार्यान्वयन) मंच देशभर में प्रमुख परियोजनाओं और शासन संबंधी पहलों की प्रगति की नियमित निगरानी करता है। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि गृह मंत्रालय के अधीन भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) समय-समय पर राज्यों की साइबर सुरक्षा तैयारियों की समीक्षा करता है।

राज्य का वर्तमान राष्ट्रीय प्रदर्शन

डीजीपी ने नौ प्रमुख प्रदर्शन संकेतकों (KPI) पर तेलंगाना की मौजूदा स्थिति का विस्तृत ब्यौरा दिया। राज्य ई-जीरो एफआईआर कार्यान्वयन में 13वें स्थान पर है, जबकि धन वसूली में 46.6% की दर के साथ 18वें स्थान पर है। जीआरएम प्रदर्शन में राज्य चौथे स्थान पर है, सहयोग पोर्टल में 16वें, समन्वय पोर्टल में छठे, सोशल मीडिया प्रदर्शन में 16वें, साइबर सुरक्षा मापदंडों में 15वें और क्षमता निर्माण में आठवें स्थान पर है।

डिजिटल अरेस्ट स्कैम पर केंद्र की चिंता

डीजीपी ने अधिकारियों को बताया कि भारत सरकार ने 'डिजिटल अरेस्ट' स्कैम की बढ़ती संख्या पर गंभीर चिंता व्यक्त की है। यह ऐसे समय में आया है जब साइबर ठगी के मामले पूरे देश में तेज़ी से बढ़ रहे हैं और नागरिक बड़े पैमाने पर वित्तीय नुकसान उठा रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि साइबर अपराध के इस बढ़ते खतरे से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए तेलंगाना पुलिस को प्रौद्योगिकी में अग्रणी भूमिका निभानी होगी।

ई-जीरो एफआईआर और टी-स्पार्क की सराहना

डीजीपी ने माना कि राज्य में ई-जीरो एफआईआर का कार्यान्वयन अभी तक अपनी पूरी क्षमता तक नहीं पहुँचा है और अधिकारियों को इसके प्रभावी क्रियान्वयन को सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। हालाँकि, उन्होंने टी-स्पार्क और तेलंगाना साइबर सुरक्षा ब्यूरो (TCSB) के समन्वित प्रयासों की सराहना की, जिसके परिणामस्वरूप केवल दो दिनों में लगभग 20 ई-जीरो एफआईआर दर्ज की गईं।

आगे की राह

डीजीपी सीवी आनंद ने अधिकारियों को जनता में साइबर जागरूकता बढ़ाने के लिए क्षमता निर्माण और सूचना, शिक्षा एवं संचार (IEC) गतिविधियों को मज़बूत करने का निर्देश दिया। गौरतलब है कि राष्ट्रीय रैंकिंग नौ KPI पर आधारित है और सभी मापदंडों पर एक साथ सुधार किए बिना समग्र रैंकिंग में उल्लेखनीय बदलाव संभव नहीं होगा। राज्य पुलिस के सामने अब यह चुनौती है कि वह धन वसूली दर, ई-जीरो एफआईआर और सोशल मीडिया प्रदर्शन जैसे कमज़ोर क्षेत्रों में तेज़ी से सुधार लाए।

संपादकीय दृष्टिकोण

फिर भी पुलिस का डिजिटल ढाँचा राष्ट्रीय औसत से पीछे है। धन वसूली में 46.6% की दर और 18वाँ स्थान यह बताता है कि साइबर ठगी के शिकार नागरिकों को न्याय मिलने की दर अभी भी कमज़ोर है। डीजीपी की समीक्षा बैठक स्वागतयोग्य है, लेकिन असली परीक्षा यह होगी कि KPI सुधार सिर्फ रैंकिंग की कवायद बनकर न रह जाए — बल्कि ज़मीन पर पीड़ितों की वसूली दर और FIR दर्ज होने की गति में वास्तविक बदलाव आए।
RashtraPress
24 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

तेलंगाना की साइबर सुरक्षा राष्ट्रीय रैंकिंग में अभी क्या स्थिति है?
तेलंगाना वर्तमान में साइबर सुरक्षा मापदंडों में राष्ट्रीय स्तर पर 15वें स्थान पर है। धन वसूली में 46.6% दर के साथ 18वाँ, ई-जीरो एफआईआर में 13वाँ और सोशल मीडिया प्रदर्शन में 16वाँ स्थान है।
डीजीपी सीवी आनंद ने 24 जुलाई की बैठक में क्या निर्देश दिए?
डीजीपी ने अधिकारियों को भारत सरकार के सभी 9 KPI पर प्रदर्शन सुधारने, ई-जीरो एफआईआर का पूर्ण क्रियान्वयन सुनिश्चित करने और साइबर जागरूकता के लिए IEC गतिविधियाँ बढ़ाने के निर्देश दिए। उन्होंने राष्ट्रीय रैंकिंग में शीर्ष स्थान हासिल करने का लक्ष्य रखा।
'डिजिटल अरेस्ट' स्कैम क्या है और केंद्र सरकार इसे लेकर क्यों चिंतित है?
'डिजिटल अरेस्ट' एक साइबर धोखाधड़ी है जिसमें ठग पुलिस या सरकारी अधिकारी बनकर वीडियो कॉल पर पीड़ित को 'डिजिटल हिरासत' में रखने का भय दिखाकर पैसे ऐंठते हैं। भारत सरकार ने इस स्कैम की बढ़ती संख्या पर गंभीर चिंता व्यक्त की है और राज्यों को सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं।
I4C क्या है और यह राज्यों की साइबर तैयारियों से कैसे जुड़ा है?
भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) गृह मंत्रालय के अधीन एक राष्ट्रीय संस्था है जो समय-समय पर राज्यों की साइबर सुरक्षा तैयारियों की समीक्षा करती है। यह 9 KPI के आधार पर राज्यों को रैंकिंग देती है, जो प्रधानमंत्री के प्रगति मंच पर भी निगरानी में रहती है।
टी-स्पार्क और TCSB ने ई-जीरो एफआईआर में क्या उपलब्धि हासिल की?
टी-स्पार्क और तेलंगाना साइबर सुरक्षा ब्यूरो (TCSB) के समन्वित प्रयासों से केवल दो दिनों में लगभग 20 ई-जीरो एफआईआर दर्ज की गईं। डीजीपी ने इस प्रयास की सराहना की और इसे पूरे राज्य में विस्तारित करने के निर्देश दिए।
राष्ट्र प्रेस
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