सीवी आनंद तेलंगाना के नए डीजीपी नियुक्त: जानें उनका शानदार करियर और अनुभव
सारांश
Key Takeaways
- तेलंगाना सरकार ने 28 अप्रैल 2026 को सीवी आनंद को राज्य का नया पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) नियुक्त किया।
- आनंद 1996 बैच के आईपीएस अधिकारी हैं और वर्तमान में गृह विभाग के विशेष मुख्य सचिव हैं।
- वह 30 अप्रैल 2026 को सेवानिवृत्त होने वाले डीजीपी शिवधर रेड्डी की जगह लेंगे।
- आनंद को 2002 में असाधारण बहादुरी के लिए राष्ट्रपति का वीरता पदक मिला।
- उन्हें मेट्रोपॉलिटन पुलिसिंग में 15 वर्षों का अनुभव है, जिसमें 10 वर्ष हैदराबाद शहर में बिताए।
- वह भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) के महानिदेशक और दो बार हैदराबाद पुलिस आयुक्त रह चुके हैं।
तेलंगाना सरकार ने आईपीएस अधिकारी सीवी आनंद को राज्य का नया पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) नियुक्त किया है। 28 अप्रैल 2026 को इस संबंध में आधिकारिक आदेश जारी किया गया। 1996 बैच के आईपीएस अधिकारी आनंद फिलहाल गृह विभाग के विशेष मुख्य सचिव के पद पर कार्यरत हैं।
नियुक्ति का विवरण
मंगलवार को जारी सरकारी आदेश के अनुसार, सीवी आनंद का तबादला कर उन्हें पुलिस महानिदेशक के पद पर तैनात किया गया है। वह शिवधर रेड्डी की जगह लेंगे, जो 30 अप्रैल 2026 को सेवानिवृत्त हो रहे हैं। यह नियुक्ति तेलंगाना पुलिस के शीर्ष नेतृत्व में एक महत्वपूर्ण बदलाव है।
प्रमुख अनुभव और उपलब्धियाँ
आनंद इससे पहले भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) के महानिदेशक के रूप में कार्य कर चुके हैं और दो बार हैदराबाद शहर के पुलिस आयुक्त का पद संभाल चुके हैं। इसके अलावा, उन्होंने साइबराबाद के आयुक्त के रूप में भी सेवा दी है। डीजीपी कार्यालय के अनुसार, उन्हें मेट्रोपॉलिटन पुलिसिंग में 15 वर्षों का अनुभव है, जिसमें से 10 वर्ष अकेले हैदराबाद शहर में बिताए।
आनंद ने माओवाद-प्रभावित कई जिलों में काम किया और अपने नेतृत्व के लिए पहचान बनाई। उन्हें 2002 में असाधारण बहादुरी के लिए राष्ट्रपति का वीरता पदक प्रदान किया गया। उनकी हैदराबाद की संस्कृति और रीति-रिवाजों की गहरी समझ ने गणेश उत्सव और बकरीद जैसे त्योहारों के दौरान सांप्रदायिक सौहार्द बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
व्यक्तिगत पृष्ठभूमि और शिक्षा
5 जून 1968 को हैदराबाद में जन्मे आनंद, चमा दामोदर रेड्डी के पाँच पुत्रों में से एक हैं। उनके पिता भारतीय वन सेवा में 'वन संरक्षक' के पद से सेवानिवृत्त हुए। हैदराबाद पब्लिक स्कूल के छात्र रहे आनंद ने पढ़ाई और खेल दोनों में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया।
उन्होंने हैदराबाद की अंडर-19 क्रिकेट टीम के लिए खेला और 1986 में इसी टीम के साथ इंग्लैंड दौरे पर गए। उसी वर्ष उन्होंने 12वीं की आईएससी परीक्षा में अपनी कक्षा में प्रथम स्थान भी प्राप्त किया। 1989 में निजाम कॉलेज से मैथ्स-इकोनॉमिक्स-स्टैटिस्टिक्स में बीए और बाद में उस्मानिया यूनिवर्सिटी के आर्ट्स कॉलेज से एमए इकोनॉमिक्स की डिग्री हासिल की।
सिविल सेवा में प्रवेश और करियर यात्रा
अंडर-22 क्रिकेट में हैदराबाद राज्य का प्रतिनिधित्व करने और रणजी ट्रॉफी चयन से चूकने के बाद, आनंद ने 1990 में सिविल सेवा परीक्षा देने का निर्णय लिया। 1991 में उन्हें आईपीएस में उनका गृह राज्य आवंटित किया गया। जिला प्रशिक्षण के लिए वारंगल जिला आवंटित हुआ, जहाँ उन्होंने एएसपी के रूप में कार्य किया।
उनकी सेवा के पहले नौ साल नक्सल-प्रभावित जिलों में बीते, जहाँ उन्होंने व्यक्तिगत रूप से बलों का नेतृत्व किया और गोलीबारी व मुठभेड़ों में भाग लिया। 2000-2001 में कृष्णा जिले के अधीक्षक, 2001-2004 में हैदराबाद शहर के डीसीपी पूर्वी व मध्य जोन, और 2007-2008 में विजयवाड़ा के पुलिस आयुक्त के रूप में कार्य किया।
डीआईजी पदोन्नति पर सीआईडी ईओडब्ल्यू में तैनाती के दौरान उन्होंने क्रुशी बैंक घोटाले के आरोपी वेंकटेश्वर राव को बैंकॉक से प्रत्यर्पण के जरिए वापस लाने वाली टीम का नेतृत्व किया। बाद में 2013 से 2016 तक साइबराबाद के पुलिस आयुक्त और 2018 से 2022 तक केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर सीआईएसएफ में आईजी हवाई अड्डा क्षेत्र के रूप में कार्य किया।
आगे की राह
दिसंबर 2021 में राज्य सरकार ने उन्हें केंद्रीय प्रतिनियुक्ति से वापस बुलाकर पुनः हैदराबाद शहर के पुलिस आयुक्त नियुक्त किया था। अब डीजीपी के रूप में उनकी नियुक्ति के साथ, तेलंगाना पुलिस को एक अनुभवी और बहुआयामी नेतृत्व मिलने की उम्मीद है, जो शहरी पुलिसिंग से लेकर माओवाद-विरोधी अभियानों तक का व्यापक अनुभव रखते हैं।