तेलंगाना डीजीपी सीवी आनंद का ऐलान: ड्रग तस्कर आतंकवादियों से भी खतरनाक, दिसंबर 2029 तक नशा-मुक्त राज्य का लक्ष्य
सारांश
मुख्य बातें
तेलंगाना के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) सीवी आनंद ने सोमवार, 6 जुलाई को स्पष्ट किया कि राज्य में ड्रग तस्करों को उग्रवादियों और आतंकवादियों से भी अधिक खतरनाक श्रेणी में रखा जाएगा और उनके विरुद्ध कानून के तहत कठोरतम कार्रवाई की जाएगी। भद्राद्री कोठागुडेम जिला पुलिस कार्यालय में आयोजित अपराध समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए उन्होंने यह चेतावनी दी और दिसंबर 2029 तक तेलंगाना को पूर्णतः नशा-मुक्त बनाने की प्रतिबद्धता दोहराई।
बैठक का संदर्भ और मुख्य घोषणाएँ
डीजीपी आनंद ने भद्राद्री कोठागुडेम को गांजा तस्करी का एक प्रमुख प्रवेश मार्ग बताया, क्योंकि इस जिले की सीमाएँ छत्तीसगढ़ और आंध्र प्रदेश दोनों राज्यों से मिलती हैं। उन्होंने कहा कि भद्राद्री कोठागुडेम और खम्मम जिलों में ड्रग्स व गांजा तस्करी पर प्रभावी नियंत्रण पूरे राज्य के नशा-विरोधी अभियान को मज़बूती देगा।
उन्होंने जिला पुलिस को गांजे की खेती, परिवहन और अवैध कारोबार के विरुद्ध अभियान तेज करने के स्पष्ट निर्देश दिए। साथ ही बस अड्डों, रेलवे स्टेशनों, चेक पोस्टों और अन्य संवेदनशील स्थानों पर निगरानी बढ़ाने तथा डॉग स्क्वॉड की तैनाती करने का आदेश दिया।
युवाओं पर बढ़ता खतरा और पंजाब का उदाहरण
समाज पर नशीले पदार्थों के बढ़ते दुष्प्रभाव पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए डीजीपी ने कहा कि युवाओं में नशे की बढ़ती लत आने वाली पीढ़ियों के लिए गंभीर संकट बन सकती है। उन्होंने पंजाब में नशे की समस्या का उदाहरण देते हुए अधिकारियों को आगाह किया कि तेलंगाना को ऐसी विकट स्थिति से बचाने के लिए अभी से ठोस और सुनियोजित कदम उठाने होंगे।
यह ऐसे समय में आया है जब देश के कई राज्यों में मादक पदार्थों की तस्करी के मामले लगातार बढ़ रहे हैं और युवा आबादी पर इसका सीधा असर पड़ रहा है।
नेटवर्क के विरुद्ध कार्रवाई: देश-विदेश तक पहुँच
डीजीपी आनंद ने कहा कि तेलंगाना पुलिस ड्रग तस्करी के नेटवर्क के खिलाफ बिना किसी समझौते के अभियान चलाएगी। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि देश या विदेश में छिपे अपराधियों को भी कानून के दायरे में लाया जाएगा। राज्य सरकार के विज़न के तहत जनता की सक्रिय भागीदारी को इस मुहिम का अभिन्न हिस्सा बताया गया।
जाँच और डिजिटल साक्ष्य प्रणाली पर ज़ोर
डीजीपी ने जाँच की गुणवत्ता और गति में सुधार, समय पर चार्जशीट दाखिल करने और दोषसिद्धि दर बढ़ाने पर विशेष ज़ोर दिया। उन्होंने निर्देश दिया कि सभी मामलों के रिकॉर्ड और डिजिटल साक्ष्य अपराध एवं अपराधी ट्रैकिंग नेटवर्क प्रणाली (सीसीटीएनएस) पर अपलोड किए जाएँ, जिससे जाँच और न्यायालयीन सुनवाई की प्रक्रिया तेज हो सके।
बैठक में पुलिस अधीक्षक रोहित राज ने जिले के अपराध आँकड़ों, गांजा मामलों, साइबर अपराध, महिला सुरक्षा, सड़क सुरक्षा, वामपंथी उग्रवाद से जुड़े घटनाक्रमों और आपराधिक मामलों की जाँच की प्रगति पर विस्तृत प्रस्तुति दी।
आगे की राह
डीजीपी ने भद्राद्री कोठागुडेम को एक महत्वपूर्ण औद्योगिक जिला बताते हुए कहा कि यहाँ खुफिया जानकारी-आधारित और लक्षित पुलिसिंग को और मज़बूत किया जाना चाहिए। जिले की पुलिस के प्रदर्शन की सराहना करते हुए उन्होंने अधिकारियों से इसे कानून-व्यवस्था के क्षेत्र में एक आदर्श जिला बनाने का आह्वान किया। दिसंबर 2029 की समय-सीमा के साथ तेलंगाना का यह नशा-मुक्ति अभियान अब राज्य पुलिस की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल हो गया है।