तेलंगाना को नशामुक्त बनाने की मुहिम: डीजीपी सी.वी. आनंद ने ईगल फ़ोर्स को दिए कड़े निर्देश

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
तेलंगाना को नशामुक्त बनाने की मुहिम: डीजीपी सी.वी. आनंद ने ईगल फ़ोर्स को दिए कड़े निर्देश

सारांश

तेलंगाना में ड्रग मामले दो साल में लगभग दोगुने हो गए हैं — और डीजीपी सी.वी. आनंद ने साफ संदेश दिया है कि माओवादियों को जिस तरह खदेड़ा, उसी ताकत से नशे के नेटवर्क को भी ध्वस्त किया जाएगा। ईगल फ़ोर्स, डार्क वेब निगरानी और 93 विदेशी नागरिकों के डिपोर्टेशन से यह अभियान अब नई धार पकड़ रहा है।

मुख्य बातें

आनंद ने 7 मई 2026 को हैदराबाद में ईगल फ़ोर्स की समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की।
तेलंगाना में ड्रग मामले 2023 के 1,464 से बढ़कर 2025 में 2,734 हो गए; गिरफ्तारियाँ 3,157 से 5,703 तक पहुँचीं।
प्रति केस गिरफ्तारी का राष्ट्रीय औसत 1.3 के मुकाबले तेलंगाना का औसत 3.1 है।
नाइजीरिया , घाना और सूडान समेत विभिन्न देशों के 93 विदेशी नागरिकों को अब तक डिपोर्ट किया जा चुका है।
राज्य में 4,500 एंटी-ड्रग कमेटियाँ हैं, लेकिन नई व्यापक समितियाँ गठित करने का प्रस्ताव तैयार हो रहा है।
छात्रों के प्रवेश पर

तेलंगाना के नए पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) सी.वी. आनंद ने 7 मई 2026 को हैदराबाद में ईगल फ़ोर्स की समीक्षा बैठक के दौरान राज्य पुलिस से आह्वान किया कि जिस प्रकार विशेष एजेंसियों ने तेलंगाना को माओवादी प्रभाव से मुक्त कराया था, उसी संकल्प और एकजुटता के साथ अब राज्य को ड्रग्स मुक्त बनाने का लक्ष्य हासिल किया जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह अभियान केवल पुलिस का नहीं, बल्कि पूरे समाज का साझा दायित्व है।

ईगल फ़ोर्स की समीक्षा को मिली सर्वोच्च प्राथमिकता

डीजीपी सी.वी. आनंद ने कहा कि कार्यभार संभालने के बाद कई विंग्स की समीक्षा बाकी थी, लेकिन उन्होंने सबसे पहले ईगल फ़ोर्स की समीक्षा को प्राथमिकता दी। उन्होंने कहा कि जिस तरह स्पेशल इंटेलिजेंस ब्यूरो और ग्रेहाउंड ने नक्सल विरोधी अभियानों में निर्णायक भूमिका निभाई, उसी तर्ज पर ईगल फ़ोर्स सभी जिलों को खुफिया और जाँच संबंधी सहायता उपलब्ध कराएगी। उन्होंने जिला एसपी और पुलिस कमिश्नरों से ईगल फ़ोर्स के साथ पूर्ण समन्वय बनाकर काम करने की अपील की।

ड्रग मामलों में तेज़ी से बढ़ोतरी, गिरफ्तारियाँ भी दोगुनी

बैठक में अधिकारियों ने बताया कि 2023 में दर्ज 1,464 ड्रग मामले 2025 तक बढ़कर 2,734 हो गए हैं। इसी अवधि में गिरफ्तारियाँ 3,157 से बढ़कर 5,703 तक पहुँच गई हैं। अधिकारियों के अनुसार राष्ट्रीय स्तर पर प्रति केस गिरफ्तारी का औसत 1.3 है, जबकि तेलंगाना में यह औसत 3.1 है — जो यह दर्शाता है कि पुलिस केवल आपूर्तिकर्ताओं तक नहीं, बल्कि पूरे नेटवर्क और मास्टरमाइंड तक पहुँच रही है।

तकनीक और मनी ट्रेल पर जोर

डीजीपी आनंद ने अधिकारियों को आधुनिक तकनीक के भरपूर उपयोग के निर्देश दिए, जिनमें मनी ट्रेल, डिजिटल फॉरेंसिक, जियो-लोकेशन ट्रैकिंग, सोशल मीडिया मॉनिटरिंग और डार्क वेब पर निगरानी शामिल हैं। उन्होंने विदेशी ड्रग सिंडिकेट्स और हवाला नेटवर्क को पूरी तरह ध्वस्त करने पर विशेष बल दिया। अधिकारियों ने बताया कि ईगल फ़ोर्स ने गोवा और दिल्ली से संचालित नाइजीरियन ड्रग कार्टेल और हवाला नेटवर्क का भंडाफोड़ किया है। अब तक नाइजीरिया, घाना और सूडान समेत विभिन्न देशों के 93 विदेशी नागरिकों को डिपोर्ट किया जा चुका है।

शिक्षण संस्थानों पर सख्त नज़र

डीजीपी ने स्कूलों और कॉलेजों में जागरूकता कार्यक्रम बढ़ाने पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि राज्य में करीब 4,500 एंटी-ड्रग कमेटियाँ बनाई गई हैं, लेकिन वे अपेक्षित परिणाम नहीं दे पा रही हैं। अब नई व्यापक समितियाँ गठित करने का प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है, जो ड्रग्स के अलावा रैगिंग, साइबर क्राइम, महिला सुरक्षा, बाल शोषण और सड़क सुरक्षा जैसे मुद्दों पर भी नज़र रखेंगी। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि किसी शिक्षण संस्थान में ड्रग्स या अन्य अवैध गतिविधियाँ पाई गईं और संस्थान ने इसकी जानकारी नहीं दी, तो उसके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी।

शपथ पत्र और सामुदायिक भागीदारी

छात्रों के प्रवेश के समय

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन ड्रग्स की लड़ाई का भूगोल कहीं अधिक जटिल है — यह सीमाओं, डिजिटल नेटवर्क और सामाजिक कारणों से जुड़ी है। 4,500 एंटी-ड्रग कमेटियों का अपेक्षित परिणाम न देना यह सवाल उठाता है कि क्या ढाँचा पर्याप्त है या क्रियान्वयन में खामी है। बिना सामाजिक-आर्थिक हस्तक्षेप के केवल गिरफ्तारी-केंद्रित रणनीति दीर्घकालिक समाधान नहीं दे सकती।
RashtraPress
13 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

तेलंगाना में ईगल फ़ोर्स क्या है?
ईगल फ़ोर्स तेलंगाना पुलिस की ड्रग्स नियंत्रण के लिए बनाई गई विशेष इकाई है, जो सभी जिलों को खुफिया और जाँच संबंधी सहायता उपलब्ध कराती है। यह विदेशी ड्रग सिंडिकेट्स, हवाला नेटवर्क और डार्क वेब पर निगरानी रखती है।
तेलंगाना में ड्रग मामलों की संख्या कितनी बढ़ी है?
2023 में दर्ज 1,464 ड्रग मामले 2025 में बढ़कर 2,734 हो गए हैं, जबकि गिरफ्तारियाँ 3,157 से बढ़कर 5,703 तक पहुँच गई हैं। तेलंगाना में प्रति केस गिरफ्तारी का औसत 3.1 है, जो राष्ट्रीय औसत 1.3 से काफी अधिक है।
तेलंगाना से कितने विदेशी नागरिकों को डिपोर्ट किया गया है?
अधिकारियों के अनुसार अब तक नाइजीरिया, घाना और सूडान समेत विभिन्न देशों के 93 विदेशी नागरिकों को डिपोर्ट किया जा चुका है। ईगल फ़ोर्स ने गोवा और दिल्ली से संचालित नाइजीरियन ड्रग कार्टेल और हवाला नेटवर्क का भंडाफोड़ भी किया है।
शिक्षण संस्थानों के लिए क्या नए नियम प्रस्तावित हैं?
डीजीपी सी.वी. आनंद ने प्रस्ताव दिया है कि छात्रों के प्रवेश के समय 'मैं ड्रग्स नहीं लूंगा' शपथ पत्र अनिवार्य किया जाए। साथ ही यदि किसी संस्थान में ड्रग्स या अवैध गतिविधियाँ पाई गईं और उन्होंने इसकी सूचना नहीं दी, तो संस्थान के खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी।
तेलंगाना की एंटी-ड्रग कमेटियाँ क्यों अप्रभावी मानी जा रही हैं?
डीजीपी ने स्वीकार किया कि राज्य में बनाई गई करीब 4,500 एंटी-ड्रग कमेटियाँ अपेक्षित परिणाम नहीं दे पा रही हैं। इसके मद्देनजर नई व्यापक समितियाँ गठित करने का प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है, जो ड्रग्स के अलावा रैगिंग, साइबर क्राइम और महिला सुरक्षा जैसे मुद्दों पर भी काम करेंगी।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 2 दिन पहले
  2. 1 सप्ताह पहले
  3. 2 सप्ताह पहले
  4. 1 महीना पहले
  5. 2 महीने पहले
  6. 2 महीने पहले
  7. 4 महीने पहले
  8. 5 महीने पहले