गणेश चतुर्थी 2026: मूर्ति स्थापना का शुभ मुहूर्त सुबह 11:02 से 1:31 बजे तक, कालका जी पीठाधीश्वर ने दी जानकारी
सारांश
मुख्य बातें
गणेश चतुर्थी 2026 का पर्व 14 सितंबर से आरंभ हो रहा है और इस अवसर पर कालका जी मंदिर, नई दिल्ली के पीठाधीश्वर महंत सुरेंद्र नाथ अवधूत ने गणेश मूर्ति स्थापना के शुभ मुहूर्त और पर्व के महत्व को लेकर विस्तृत जानकारी साझा की है। इस बार मूर्ति स्थापना का विशेष मुहूर्त सुबह 11 बजकर 2 मिनट से दोपहर 1 बजकर 31 मिनट तक रहेगा।
गणेश उत्सव: तिथि और अवधि
महंत सुरेंद्र नाथ अवधूत के अनुसार, गणेश उत्सव भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को प्रारंभ होता है। इस वर्ष यह पर्व 14 सितंबर 2026 से शुरू होकर 25 सितंबर 2026 — अर्थात अनंत चतुर्दशी — तक चलेगा। 10 दिनों तक चलने वाले इस उत्सव में भक्त अपनी श्रद्धा और सुविधा के अनुसार मूर्ति को 5, 7 या 10 दिनों तक स्थापित रखते हैं।
शुभ मुहूर्त: कब करें स्थापना
महंत ने बताया कि इस बार गणेश स्थापना का सर्वोत्तम समय सुबह 11 बजकर 2 मिनट से दोपहर 1 बजकर 31 मिनट तक रहेगा। उनके अनुसार इस अवधि में स्थापित की गई गणेश प्रतिमा की पूजा अर्चना विशेष फलदायी होती है। घरों में मिट्टी की गणेश प्रतिमा लाकर पूरे विधि विधान से पूजन करने की परंपरा भी इसी मुहूर्त में संपन्न की जा सकती है।
विघ्नहर्ता की पूजा का महत्व
महंत सुरेंद्र नाथ अवधूत ने कहा, "गणेश जी की पूजा अर्चना करने से संसार के क्लेश दूर होते हैं, सब विघ्न बाधाएं दूर होती हैं और घर में सुख संपत्ति और समृद्धि का वास होता है।" उन्होंने बताया कि भगवान गणेश को विघ्नहर्ता कहा जाता है और उनकी उपासना से जीवन की समस्त बाधाएँ शांत होती हैं। यह पर्व आस्था और सांस्कृतिक उल्लास का अद्वितीय संगम है।
दिल्ली एनसीआर में बढ़ता उत्साह
गौरतलब है कि गणेश उत्सव परंपरागत रूप से महाराष्ट्र में सबसे बड़े पैमाने पर मनाया जाता था, किंतु अब दिल्ली एनसीआर सहित पूरे उत्तर भारत में इसका उत्साह तेज़ी से बढ़ा है। राजधानी में इस वर्ष भी जगह जगह भव्य पंडाल लगाए जा रहे हैं, जहाँ आकर्षक गणेश प्रतिमाएँ स्थापित की जाएंगी। यह ऐसे समय में आया है जब दिल्ली में धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजनों में आम जन की भागीदारी लगातार बढ़ रही है।
आगे क्या होगा
25 सितंबर 2026 को अनंत चतुर्दशी के दिन गणेश विसर्जन के साथ यह उत्सव संपन्न होगा। देशभर में शोभायात्राओं और विसर्जन के भव्य आयोजन की तैयारियाँ पहले से शुरू हो गई हैं। श्रद्धालुओं से अनुरोध किया जा रहा है कि वे पर्यावरण अनुकूल मिट्टी की प्रतिमाओं का उपयोग करें।