गणेश चतुर्थी 2025: 14 सितंबर को बप्पा की स्थापना का शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और विसर्जन तिथि
सारांश
मुख्य बातें
इस वर्ष गणेश चतुर्थी का पावन पर्व 14 सितंबर 2025 को मनाया जाएगा। भगवान गणेश को विघ्नहर्ता और प्रथम पूज्य माना जाता है, इसलिए इस दिन देशभर में करोड़ों श्रद्धालु अपने घरों और सार्वजनिक पंडालों में गणपति बप्पा की प्रतिमा स्थापित कर उनकी विधिवत पूजा-अर्चना करते हैं। पंचांग के अनुसार इस बार चतुर्थी तिथि का आरंभ और समापन दो दिनों में होने के कारण उदया तिथि के आधार पर 14 सितंबर को ही यह उत्सव मनाया जाएगा।
गणेश चतुर्थी 2025 की तिथि और शुभ मुहूर्त
पंचांग के अनुसार, भाद्रपद शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि 14 सितंबर को प्रातः 7 बजकर 6 मिनट से प्रारंभ होगी और 15 सितंबर को प्रातः 7 बजकर 44 मिनट पर समाप्त होगी। उदया तिथि के नियमानुसार गणेश चतुर्थी का पर्व 14 सितंबर को ही मनाया जाएगा।
गणपति स्थापना के लिए मध्याह्न काल सर्वाधिक शुभ माना जाता है। दिल्ली के पंचांग के अनुसार 14 सितंबर को पूजा का शुभ मुहूर्त सुबह 11:02 बजे से दोपहर 1:31 बजे तक रहेगा। अन्य शहरों में स्थानीय सूर्योदय और पंचांग के आधार पर यह समय थोड़ा भिन्न हो सकता है।
गणपति स्थापना की सही विधि
बप्पा की स्थापना से पूर्व पूजा स्थल को भली-भाँति स्वच्छ करें। एक चौकी पर शुद्ध वस्त्र बिछाकर उस पर भगवान गणेश की प्रतिमा विराजमान करें। सर्वप्रथम भगवान गणेश का ध्यान करें, तत्पश्चात पूजा का संकल्प लें। इसके बाद जल, अक्षत और पुष्प अर्पित करें।
भगवान गणेश को रोली, सिंदूर, दूर्वा और सुगंधित पुष्प चढ़ाएँ। गणेश पूजा में दूर्वा का विशेष महत्व शास्त्रों में वर्णित है। तत्पश्चात धूप और दीप प्रज्वलित कर पूजा संपन्न करें।
भोग, मंत्र और आरती
भगवान गणेश को मोदक और लड्डू का भोग लगाना अत्यंत शुभ माना जाता है। श्रद्धानुसार ऋतुफल और अन्य प्रसाद भी अर्पित किए जा सकते हैं। पूजा के दौरान 'ॐ गं गणपतये नमः' मंत्र का जाप करें। इसके पश्चात गणेश चतुर्थी की कथा का श्रवण या पाठ करें और अंत में भगवान गणेश की आरती कर पूजा को पूर्ण करें।
विसर्जन की परंपरा और अनंत चतुर्दशी
गणेश उत्सव की अवधि परिवार की परंपरा पर निर्भर करती है। घर में स्थापित गणपति का विसर्जन डेढ़ दिन, तीसरे, पाँचवें, सातवें या दसवें दिन किया जा सकता है। इस वर्ष अनंत चतुर्दशी 25 सितंबर 2025 को है, जिस दिन बड़े स्तर पर गणपति विसर्जन संपन्न होगा। यह उत्सव विशेष रूप से महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, गोवा और देश के अनेक हिस्सों में धूमधाम से मनाया जाता है।
गौरतलब है कि गणेश चतुर्थी केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक नहीं, बल्कि सामाजिक एकता और सांस्कृतिक विरासत का उत्सव भी है। श्रद्धालु इस अवसर पर बप्पा का आशीर्वाद लेकर नए कार्यों की शुरुआत करना शुभ मानते हैं।