पंजाब कर्मचारी हड़ताल पर CM भगवंत मान का अल्टीमेटम: 'हड़ताल खत्म करो, तभी होगी बात'
सारांश
मुख्य बातें
पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने 27 अगस्त 2026 को राज्यभर में जारी सरकारी कर्मचारियों की हड़ताल पर कड़ा रुख अपनाते हुए स्पष्ट किया कि बातचीत और हड़ताल एक साथ नहीं चल सकते। उन्होंने कहा कि सरकार हर जायज मुद्दे का समाधान निकालने के लिए तैयार है, परंतु वार्ता की शर्त यह है कि पहले हड़ताल समाप्त हो।
मुख्यमंत्री का स्पष्ट संदेश
मुख्यमंत्री भगवंत मान ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, 'कर्मचारी हमारे परिवार का अहम हिस्सा हैं और हम उनकी हर जायज बात सुनने को तैयार हैं, लेकिन बातचीत और हड़ताल साथ-साथ नहीं चल सकते। सरकार हर मुद्दे का समाधान निकालने के लिए प्रतिबद्ध है, लेकिन बातचीत तभी होगी जब हड़ताल खत्म हो जाएगी।' यह बयान ऐसे समय में आया है जब पंजाब के विभिन्न जिलों में सरकारी कर्मचारी डीसी कार्यालयों के बाहर प्रदर्शन कर रहे थे।
कर्मचारी संघ की माँगें और प्रदर्शन
कर्मचारी संघ के अध्यक्ष अशनील कुमार शर्मा ने कहा, 'आज हम डीसी कार्यालय में पंजाब सरकार के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं। हम यह प्रदर्शन नहीं करना चाहते थे। अगर पंजाब सरकार ने हमें शांति से, प्यार और सम्मान के साथ विरोध करने का मौका दिया होता, तो हमारे लिए अपना सरकारी काम छोड़कर सड़कों पर उतरने की कोई वजह नहीं होती।' उन्होंने बताया कि इस प्रदर्शन में 15 से 20 जत्थेबंदियाँ शामिल हैं।
अशनील शर्मा ने स्पष्ट किया कि यह एक दिन का सामूहिक अवकाश लेने वाला प्रदर्शन था और शाम को बैठक के बाद आगे की रणनीति तय की जाएगी। उन्होंने कर्मचारियों की प्रमुख माँगों में महंगाई भत्ते (DA) में बढ़ोतरी और पुरानी पेंशन योजना की बहाली को सबसे अहम बताया। उन्होंने कहा कि DA के मुद्दे पर कर्मचारियों को अदालत का दरवाजा तक खटखटाना पड़ा था।
जूनियर इंजीनियर्स का अलग रुख
अमृतसर में जूनियर इंजीनियर्स काउंसिल सिटी सर्कल के अध्यक्ष राम कुमार ने बताया कि संयुक्त मंच जहाँ सामूहिक छुट्टी पर था, वहीं जूनियर इंजीनियर्स काउंसिल ने दो घंटे का प्रतीकात्मक विरोध प्रदर्शन करने के बाद अपनी ड्यूटी जारी रखी। उन्होंने आश्वस्त किया कि किसी भी आपात स्थिति में बिजली आपूर्ति बाधित नहीं होगी और आम उपभोक्ताओं की सेवा निरंतर जारी रहेगी।
आम जनता पर असर
गौरतलब है कि पंजाब में सरकारी कर्मचारियों की इस सामूहिक हड़ताल से सरकारी दफ्तरों में कामकाज प्रभावित हुआ। हालाँकि जूनियर इंजीनियर्स काउंसिल जैसे संगठनों के ड्यूटी पर बने रहने से बिजली और अन्य आवश्यक सेवाएँ सुचारू रहीं। यह ऐसे समय में आया है जब राज्य सरकार और कर्मचारी संगठनों के बीच DA और पुरानी पेंशन जैसे मुद्दों पर लंबे समय से तनाव बना हुआ है।
आगे क्या होगा
कर्मचारी संघ की शाम की बैठक में आंदोलन की अगली दिशा तय होनी थी। मुख्यमंत्री मान की शर्त — हड़ताल समाप्ति के बाद ही वार्ता — के मद्देनज़र दोनों पक्षों के बीच गतिरोध जल्द सुलझने के संकेत फिलहाल नहीं दिख रहे। कर्मचारी संगठनों का कहना है कि जब तक सरकार ठोस आश्वासन नहीं देती, आंदोलन जारी रहेगा।