पंजाब में 27 अगस्त को सरकारी कर्मचारियों की 'महा-हड़ताल': BJP ने किया समर्थन, AAP सरकार पर अदालत अवमानना का संकट
सारांश
मुख्य बातें
पंजाब के सरकारी कर्मचारियों और पेंशनभोगियों ने 27 अगस्त 2026 को 'महा-हड़ताल' का आह्वान किया है — बकाया महंगाई भत्ता (डीए) जारी न किए जाने के विरोध में। भारतीय जनता पार्टी (BJP) की पंजाब इकाई ने मंगलवार, 25 अगस्त को इस हड़ताल को अपना पूर्ण समर्थन देने की घोषणा की। कर्मचारी सामूहिक रूप से आकस्मिक अवकाश (सीएल) पर रहेंगे, जिससे राज्य की प्रशासनिक सेवाएँ प्रभावित होने की आशंका है।
मुख्य घटनाक्रम
पंजाब भाजपा अध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों ने कहा कि कर्मचारियों को यह कदम उठाने पर मजबूर होना पड़ा, क्योंकि बार-बार अपील करने के बावजूद सरकार ने उनका जायज बकाया नहीं चुकाया। उन्होंने मुख्यमंत्री भगवंत मान के नेतृत्व वाली आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार पर सीधा निशाना साधा।
अदालती आदेश और सरकार की नाकामी
पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार की दलीलें खारिज करते हुए रुका हुआ डीए जारी करने का आदेश दिया था। इसके बाद सरकार ने चीफ जस्टिस की अध्यक्षता वाली डबल बेंच के समक्ष उस फैसले को चुनौती दी, परंतु डबल बेंच ने भी पूर्व आदेश को बरकरार रखा। ढिल्लों के अनुसार, अदालती आदेशों की लगातार अनदेखी के कारण अब अदालत की अवमानना की कार्यवाही शुरू हो चुकी है।
BJP का बयान
ढिल्लों ने कहा, 'यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण और दुखद है कि अदालत के बार-बार आदेशों के बावजूद भगवंत मान के नेतृत्व वाली 'आप' सरकार अपने कर्मचारियों और पेंशनर्स के जायज दावों को नजरअंदाज कर रही है। ऐसा रवैया उन लोगों के प्रति सरकार की असंवेदनशीलता को दिखाता है, जिन्होंने दशकों तक राज्य की सेवा की है।' उन्होंने यह भी जोड़ा कि सरकार अब प्रशासनिक बहानों का सहारा नहीं ले सकती, क्योंकि न्यायालय पहले ही अपना निर्णय स्पष्ट कर चुका है।
आम जनता और कर्मचारियों पर असर
यह हड़ताल पंजाब के लाखों सरकारी कर्मचारियों और पेंशनभोगियों की वित्तीय सुरक्षा से जुड़ी है, जो वर्षों से बकाया डीए के लिए संघर्ष कर रहे हैं। 27 अगस्त को सामूहिक सीएल के चलते स्कूल, दफ्तर और अन्य सरकारी सेवाएँ बाधित हो सकती हैं। गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब पंजाब सरकार पहले से ही वित्तीय दबाव में बताई जा रही है।
क्या होगा आगे
BJP ने माँग की है कि AAP सरकार तत्काल प्रभाव से सारा बकाया डीए जारी करे और अदालती आदेशों का पालन करे। अवमानना कार्यवाही के मद्देनज़र सरकार पर कानूनी और राजनीतिक दोनों मोर्चों पर दबाव बढ़ता जा रहा है। अगली सुनवाई की तारीख और सरकार की प्रतिक्रिया इस विवाद की दिशा तय करेगी।