पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट का बड़ा फैसला: 15 दिन में डीए और 2016 से एरियर दो, पंजाब सरकार की अपील खारिज
सारांश
मुख्य बातें
पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच ने 3 अगस्त 2026 को पंजाब सरकार को कड़ा निर्देश दिया कि वह 15 दिनों के भीतर राज्य के सरकारी कर्मचारियों और पेंशनरों को केंद्रीय पैटर्न के अनुसार महंगाई भत्ता (डीए) जारी करे और 1 जनवरी 2016 से लंबित सभी एरियर का भुगतान करे। अदालत ने सरकार की लेटर्स पेटेंट अपील (एलपीए) को पूरी तरह खारिज करते हुए यह आदेश दिया, जिससे राज्य के करीब 7 लाख कर्मचारियों और पेंशनरों को राहत मिलने की उम्मीद है।
मामले की पृष्ठभूमि
मामले से जुड़े अधिवक्ता सनी सिंगला ने बताया कि पंजाब सरकार ने वर्ष 2021 में छठे वेतन आयोग की सिफारिशें स्वीकार करते हुए लागू की थीं। इसके तहत सरकारी कर्मचारियों और पेंशनरों के वेतन एवं पेंशन का संशोधन किया गया था, जो 1 जनवरी 2016 से प्रभावी माना गया। इसी तिथि से कर्मचारियों को केंद्रीय पैटर्न के अनुसार डीए मिलना भी अपेक्षित था।
सरकार ने 1 जनवरी 2016 से 1 जनवरी 2023 तक डीए का भुगतान किया, लेकिन उसके बाद यह भुगतान बंद कर दिया। इसके विरोध में कर्मचारियों और पेंशनरों ने हाई कोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया।
एकल पीठ का आदेश और सरकार का रवैया
हाई कोर्ट की एकल पीठ ने 8 अप्रैल 2026 को फैसला सुनाते हुए पंजाब सरकार को निर्देश दिया था कि 30 जून 2026 तक बकाया डीए और 1 जनवरी 2016 से लंबित एरियर जारी किए जाएँ। गौरतलब है कि सरकार ने इस आदेश का पालन नहीं किया और डिवीजन बेंच में एलपीए दायर कर दी। यह ऐसे समय में आया जब राज्य के लाखों कर्मचारी वर्षों से अपने वैध बकाए की प्रतीक्षा कर रहे थे।
डिवीजन बेंच का सख्त रुख
डिवीजन बेंच ने सरकार की अपील खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि 15 दिनों के भीतर केंद्रीय पैटर्न के अनुसार डीए जारी किया जाए और 1 जनवरी 2016 से लंबित सभी एरियर का भुगतान भी इसी अवधि में किया जाए। अदालत ने यह भी कहा कि यदि सरकार निर्धारित समय-सीमा में भुगतान नहीं करती, तो बकाया राशि पर 6 प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी देना होगा।
विज्ञापन खर्च पर रोक का निर्देश
अदालत ने सरकार के प्रति और भी कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि जब तक कर्मचारियों और पेंशनरों का डीए व एरियर जारी नहीं होता, तब तक सरकार के विज्ञापन खर्च और अन्य गैर-उत्पादक व्यय पर रोक रहेगी। विभिन्न सरकारी योजनाओं के प्रचार-प्रसार पर भी रोक लगाने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि पहले कर्मचारियों के वैध बकाए का भुगतान सुनिश्चित किया जा सके। यह कदम न्यायपालिका की ओर से राज्य सरकार को प्राथमिकताएँ तय करने का स्पष्ट संदेश है।
आम जनता और कर्मचारियों पर असर
अधिवक्ता सिंगला के अनुसार, इस फैसले का सीधा लाभ पंजाब सरकार के करीब 7 लाख कर्मचारियों और पेंशनरों को मिलेगा। वर्ष 2023 से लंबित डीए और 1 जनवरी 2016 से लंबित एरियर — दोनों का भुगतान इस आदेश के दायरे में आता है। यह फैसला उन लाखों परिवारों के लिए महत्वपूर्ण है जो वर्षों से इस राशि की प्रतीक्षा कर रहे थे। अब देखना यह होगा कि पंजाब सरकार अदालत के निर्देशों का पालन करती है या एक बार फिर कोई कानूनी रास्ता तलाशती है।