पंजाब महा हड़ताल: 3 लाख से अधिक कर्मचारी काम से दूर, ₹20,161 करोड़ DA बकाये पर गतिरोध
सारांश
मुख्य बातें
पंजाब के सभी सरकारी विभागों, बोर्डों और निगमों के 3 लाख से अधिक कर्मचारी 27 अगस्त 2026 (गुरुवार) को 'महा हड़ताल' पर चले गए। लंबित महंगाई भत्ते (DA) के बकाये और अन्य मांगों को लेकर शुरू हुई इस हड़ताल से चंडीगढ़ सहित पूरे राज्य में सरकारी सेवाएं बाधित हुईं। कर्मचारी यूनियनों के अनुसार, राज्य सरकार पर ₹20,161 करोड़ का DA बकाया है।
हड़ताल का स्वरूप और दायरा
सभी हड़ताली कर्मचारियों ने एक दिन का सामूहिक आकस्मिक अवकाश लेकर जिला, तहसील और ब्लॉक स्तर पर सरकारी कार्यालयों के बाहर धरना दिया। लगभग 4 लाख पेंशनभोगी भी इस आंदोलन में शामिल हुए। सरकारी अस्पतालों, डिस्पेंसरियों और शिक्षण संस्थानों पर भी असर पड़ा। हालांकि, बाज़ार, निजी संस्थान, सार्वजनिक व निजी परिवहन बसें और आपातकालीन सेवाएं इस बंद के दायरे से बाहर रहीं।
DA बकाये का पूरा हिसाब
कर्मचारी यूनियनों के अनुसार, कुल ₹20,161 करोड़ के बकाये में से ₹6,000 करोड़ 2021 के बाद से और शेष ₹14,161 करोड़ उससे पहले के हैं। फिलहाल कर्मचारियों को मूल वेतन का 42 प्रतिशत DA मिल रहा है, जबकि उनका दावा है कि यह 58 प्रतिशत होना चाहिए — यानी 16 प्रतिशत का अंतर अब भी बना हुआ है।
सरकार की प्रतिक्रिया
हड़ताल से एक दिन पहले राज्य के वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने चंडीगढ़ में कई कर्मचारी संघों के साथ बैठकें कीं। उन्होंने कहा, 'भगवंत मान सरकार आपकी मांगों के प्रति पूरी तरह संवेदनशील है। आपकी अधिकतर मुख्य मांगों पर कार्रवाई पहले से ही चल रही है।' चीमा ने परिवहन, शिक्षा, पशुपालन और वित्त विभाग को निर्देश दिए कि यूनियनों की जायज़ मांगों पर 'पूरी सहानुभूति के साथ विचार करें और जल्द समाधान के लिए आवश्यक कार्रवाई में तेज़ी लाएं।' इसके बावजूद हड़ताल नहीं टली।
अदालत का हस्तक्षेप
पंजाब-हरियाणा उच्च न्यायालय ने 3 अगस्त को राज्य सरकार को 15 दिनों के भीतर बकाया DA का भुगतान करने का निर्देश दिया था। न्यायालय ने यह भी आदेश दिया था कि बकाया राशि के भुगतान तक सरकार बड़े पैमाने पर विज्ञापन अभियान नहीं चला सकती। यह आदेश अब भी लागू है, और सरकार की ओर से अदालती समयसीमा के भीतर भुगतान नहीं किया गया — जो इस हड़ताल की तात्कालिक वजह बनी।
आगे क्या होगा
हड़ताल के बीच मुख्यमंत्री भगवंत मान के जालंधर स्थित पंजाब आर्म्ड पुलिस (PAP) कॉम्प्लेक्स में कर्मचारी यूनियन नेताओं से मुलाकात करने की संभावना जताई गई। यह गतिरोध ऐसे समय में आया है जब राज्य सरकार पहले से ही वित्तीय दबाव में है और अदालती आदेश का पालन न करने पर उसे जवाब देना पड़ सकता है। आने वाले दिनों में वार्ता की दिशा तय करेगी कि यह आंदोलन और विस्तार लेता है या सुलझता है।