27 अगस्त 2026
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पंजाब महा हड़ताल: 3 लाख से अधिक कर्मचारी काम से दूर, ₹20,161 करोड़ DA बकाये पर गतिरोध

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पंजाब महा हड़ताल: 3 लाख से अधिक कर्मचारी काम से दूर, ₹20,161 करोड़ DA बकाये पर गतिरोध

सारांश

पंजाब में 3 लाख से अधिक कर्मचारी और 4 लाख पेंशनभोगी एकजुट होकर सड़कों पर उतरे — मुद्दा है ₹20,161 करोड़ का DA बकाया। पंजाब-हरियाणा उच्च न्यायालय के आदेश के बावजूद सरकार ने भुगतान नहीं किया, और वित्त मंत्री की बैठक भी हड़ताल नहीं टाल सकी।

मुख्य बातें

पंजाब के 3 लाख से अधिक सरकारी कर्मचारी 27 अगस्त 2026 को महा हड़ताल पर गए, सरकारी सेवाएं बाधित।
कर्मचारी यूनियनों के अनुसार राज्य पर ₹20,161 करोड़ DA बकाया — जिसमें ₹6,000 करोड़ 2021 के बाद से।
कर्मचारियों को 42% DA मिल रहा है, जबकि उनकी माँग 58% की है।
लगभग 4 लाख पेंशनभोगी भी आंदोलन में शामिल; जिला, तहसील, ब्लॉक स्तर पर धरना।
पंजाब-हरियाणा उच्च न्यायालय ने 3 अगस्त को 15 दिनों में DA भुगतान का आदेश दिया था, जिसका पालन नहीं हुआ।
वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा की हड़ताल-पूर्व बैठक और मुख्यमंत्री भगवंत मान की संभावित मुलाकात के बावजूद गतिरोध जारी।

पंजाब के सभी सरकारी विभागों, बोर्डों और निगमों के 3 लाख से अधिक कर्मचारी 27 अगस्त 2026 (गुरुवार) को 'महा हड़ताल' पर चले गए। लंबित महंगाई भत्ते (DA) के बकाये और अन्य मांगों को लेकर शुरू हुई इस हड़ताल से चंडीगढ़ सहित पूरे राज्य में सरकारी सेवाएं बाधित हुईं। कर्मचारी यूनियनों के अनुसार, राज्य सरकार पर ₹20,161 करोड़ का DA बकाया है।

हड़ताल का स्वरूप और दायरा

सभी हड़ताली कर्मचारियों ने एक दिन का सामूहिक आकस्मिक अवकाश लेकर जिला, तहसील और ब्लॉक स्तर पर सरकारी कार्यालयों के बाहर धरना दिया। लगभग 4 लाख पेंशनभोगी भी इस आंदोलन में शामिल हुए। सरकारी अस्पतालों, डिस्पेंसरियों और शिक्षण संस्थानों पर भी असर पड़ा। हालांकि, बाज़ार, निजी संस्थान, सार्वजनिक व निजी परिवहन बसें और आपातकालीन सेवाएं इस बंद के दायरे से बाहर रहीं।

DA बकाये का पूरा हिसाब

कर्मचारी यूनियनों के अनुसार, कुल ₹20,161 करोड़ के बकाये में से ₹6,000 करोड़ 2021 के बाद से और शेष ₹14,161 करोड़ उससे पहले के हैं। फिलहाल कर्मचारियों को मूल वेतन का 42 प्रतिशत DA मिल रहा है, जबकि उनका दावा है कि यह 58 प्रतिशत होना चाहिए — यानी 16 प्रतिशत का अंतर अब भी बना हुआ है।

सरकार की प्रतिक्रिया

हड़ताल से एक दिन पहले राज्य के वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने चंडीगढ़ में कई कर्मचारी संघों के साथ बैठकें कीं। उन्होंने कहा, 'भगवंत मान सरकार आपकी मांगों के प्रति पूरी तरह संवेदनशील है। आपकी अधिकतर मुख्य मांगों पर कार्रवाई पहले से ही चल रही है।' चीमा ने परिवहन, शिक्षा, पशुपालन और वित्त विभाग को निर्देश दिए कि यूनियनों की जायज़ मांगों पर 'पूरी सहानुभूति के साथ विचार करें और जल्द समाधान के लिए आवश्यक कार्रवाई में तेज़ी लाएं।' इसके बावजूद हड़ताल नहीं टली।

अदालत का हस्तक्षेप

पंजाब-हरियाणा उच्च न्यायालय ने 3 अगस्त को राज्य सरकार को 15 दिनों के भीतर बकाया DA का भुगतान करने का निर्देश दिया था। न्यायालय ने यह भी आदेश दिया था कि बकाया राशि के भुगतान तक सरकार बड़े पैमाने पर विज्ञापन अभियान नहीं चला सकती। यह आदेश अब भी लागू है, और सरकार की ओर से अदालती समयसीमा के भीतर भुगतान नहीं किया गया — जो इस हड़ताल की तात्कालिक वजह बनी।

आगे क्या होगा

हड़ताल के बीच मुख्यमंत्री भगवंत मान के जालंधर स्थित पंजाब आर्म्ड पुलिस (PAP) कॉम्प्लेक्स में कर्मचारी यूनियन नेताओं से मुलाकात करने की संभावना जताई गई। यह गतिरोध ऐसे समय में आया है जब राज्य सरकार पहले से ही वित्तीय दबाव में है और अदालती आदेश का पालन न करने पर उसे जवाब देना पड़ सकता है। आने वाले दिनों में वार्ता की दिशा तय करेगी कि यह आंदोलन और विस्तार लेता है या सुलझता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

भुगतान नहीं हुआ, और अब 3 लाख कर्मचारी सड़कों पर हैं। यह महज़ वित्तीय विवाद नहीं, बल्कि एक सरकार की अदालती जवाबदेही की परीक्षा भी है। आम आदमी पार्टी की सरकार ने सत्ता में आते समय कर्मचारियों के हितों की पैरवी की थी — ₹20,161 करोड़ का यह बकाया उसी वादे की कसौटी है। वित्त मंत्री की बैठक और मुख्यमंत्री की संभावित मुलाकात संकेत देती है कि सरकार दबाव महसूस कर रही है, लेकिन बिना ठोस भुगतान रोडमैप के ये बैठकें केवल समय खरीदने की कवायद बनकर रह सकती हैं।
RashtraPress
27 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंजाब कर्मचारी हड़ताल 2026 की मुख्य मांग क्या है?
कर्मचारियों की मुख्य मांग ₹20,161 करोड़ के बकाया महंगाई भत्ते (DA) का भुगतान है। फिलहाल उन्हें मूल वेतन का 42% DA मिल रहा है, जबकि वे 58% की माँग कर रहे हैं।
पंजाब-हरियाणा उच्च न्यायालय ने DA मामले में क्या आदेश दिया था?
उच्च न्यायालय ने 3 अगस्त को राज्य सरकार को 15 दिनों के भीतर बकाया DA का भुगतान करने का निर्देश दिया था। साथ ही, भुगतान होने तक सरकार को बड़े पैमाने पर विज्ञापन अभियान चलाने से रोका गया था। सरकार ने इस समयसीमा का पालन नहीं किया।
इस हड़ताल से कौन-कौन सी सेवाएं प्रभावित हुईं?
सरकारी अस्पताल, डिस्पेंसरी और शिक्षण संस्थान प्रभावित हुए। हालांकि, बाज़ार, निजी संस्थान, सार्वजनिक व निजी परिवहन बसें और आपातकालीन सेवाएं इस बंद के दायरे से बाहर रहीं।
भगवंत मान सरकार ने हड़ताल से पहले क्या कदम उठाए?
वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने हड़ताल से एक दिन पहले कई कर्मचारी संघों के साथ बैठक की और कहा कि सरकार मांगों के प्रति संवेदनशील है। उन्होंने संबंधित विभागों को जल्द समाधान के निर्देश भी दिए, लेकिन हड़ताल नहीं टली।
DA बकाये में से कितनी राशि कब से लंबित है?
कुल ₹20,161 करोड़ के बकाये में से ₹6,000 करोड़ 2021 के बाद से और ₹14,161 करोड़ 2021 से पहले के हैं। यह राशि लंबे समय से विवाद का केंद्र बनी हुई है।
राष्ट्र प्रेस
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