4 अगस्त 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

पंजाब सरकार पर ₹14,191 करोड़ DA बकाया का दबाव, अकाली दल ने कर्मचारियों से माँगा समर्थन

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
पंजाब सरकार पर ₹14,191 करोड़ DA बकाया का दबाव, अकाली दल ने कर्मचारियों से माँगा समर्थन

सारांश

पंजाब-हरियाणा उच्च न्यायालय ने AAP सरकार को 15 दिन में ₹14,191 करोड़ DA चुकाने का आदेश दिया, लेकिन सरकार ने किश्तों में भुगतान की अनुमति माँगी। अकाली दल ने अदालती रिकॉर्ड के आधार पर सरकार के दोहरे रवैये का पर्दाफाश किया — जनता के सामने मजबूत अर्थव्यवस्था का दावा, कोर्ट में आर्थिक संकट की दुहाई।

मुख्य बातें

पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय ने AAP सरकार को 15 दिनों के भीतर ₹14,191 करोड़ का DA बकाया चुकाने का आदेश दिया।
अकाली दल नेता बिक्रम सिंह मजीठिया ने आरोप लगाया कि सरकार ने सोमवार सुबह ही अदालत से किश्तों में भुगतान की अनुमति माँगी।
सरकार द्वारा गठित हरपाल चीमा, अमन अरोड़ा और बलजीत कौर की समिति ने अदालत में कहा कि राज्य आर्थिक संकट में है और DA देना ज़रूरी नहीं।
अकाली दल के अनुसार सरकार ने विज्ञापनों और कार्यक्रमों पर लगभग ₹8,000 करोड़ खर्च किए, जबकि कर्मचारियों का DA रोका गया।
शिरोमणि अकाली दल ने पंजाब के सरकारी कर्मचारियों से पार्टी का समर्थन करने की अपील की।

शिरोमणि अकाली दल (SAD) ने सोमवार, 3 अगस्त को पंजाब के सरकारी कर्मचारियों से अपील की कि वे पार्टी के साथ खड़े हों। यह अपील ऐसे समय में आई जब पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय ने आम आदमी पार्टी (AAP) की भगवंत मान सरकार को 15 दिनों के भीतर ₹14,191 करोड़ का महंगाई भत्ता (DA) बकाया चुकाने का आदेश दिया है।

मजीठिया का आरोप: कोर्ट में उजागर हुआ दोहरा चेहरा

अकाली दल के वरिष्ठ नेता और पूर्व कैबिनेट मंत्री बिक्रम सिंह मजीठिया ने चंडीगढ़ में मीडिया से बात करते हुए कहा कि न्यायालय में आप सरकार का कर्मचारी-विरोधी रवैया खुलकर सामने आ गया है। उनके अनुसार सरकार ने जनता के सामने एक बात कही और अदालत में दूसरी।

मजीठिया ने बताया कि पंजाब सरकार ने हरपाल चीमा, अमन अरोड़ा और बलजीत कौर की तीन सदस्यीय समिति गठित की थी, जिसने सिफारिश की कि राज्य कर्मचारियों को अतिरिक्त DA देने की कोई आवश्यकता नहीं है क्योंकि उनके लाभ केंद्र के बराबर या उससे बेहतर हैं।

सरकार का रुख: आर्थिक संकट का हवाला

समिति ने अदालत के समक्ष यह भी तर्क दिया कि राज्य आर्थिक संकट से जूझ रहा है और वह DA संशोधन के मामले में केंद्र सरकार का अनुसरण करने के लिए बाध्य नहीं है। मजीठिया ने कहा कि ये सभी तथ्य अदालत के रिकॉर्ड में दर्ज हैं।

गौरतलब है कि मुख्यमंत्री भगवंत मान सार्वजनिक मंचों पर राज्य की अर्थव्यवस्था को मजबूत बताते रहे हैं, जबकि सरकारी वकीलों ने अदालत में राज्य के अधिकांश फंड के सैलरी, पेंशन, ऋण किश्तों और सब्सिडी पर खर्च होने की बात स्वीकार की। अकाली दल के अनुसार यह अंतर्विरोध सरकार की विश्वसनीयता पर सवाल खड़ा करता है।

किश्तों में भुगतान की माँग और खर्च पर सवाल

मजीठिया ने आरोप लगाया कि पंजाब सरकार का 15 दिनों में DA बकाया चुकाने का कोई इरादा नहीं है। उन्होंने बताया कि सोमवार सुबह ही सरकार ने अदालत से भुगतान किश्तों में करने की अनुमति माँगी।

इसके साथ ही उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने विज्ञापनों और सार्वजनिक कार्यक्रमों पर लगभग ₹8,000 करोड़ खर्च किए हैं। उन्होंने यह भी कहा कि मंत्री हरजोत बैंस को बिना राजनीतिक मंजूरी के विदेश दौरों के लिए सरकारी यात्रा भत्ता दिया जा रहा है, और AAP संयोजक अरविंद केजरीवाल को चार्टर्ड विमानों से पंजाब सरकार के खर्च पर देश भर में घुमाया जा रहा है।

कर्मचारियों से अपील

अकाली दल ने कहा कि इन सभी खर्चों में बचाए गए पैसों का उपयोग सरकारी कर्मचारियों के कल्याण के लिए किया जा सकता था। पार्टी ने कर्मचारियों से आग्रह किया कि वे अपने अधिकारों की रक्षा के लिए शिरोमणि अकाली दल का साथ दें।

यह मामला आने वाले दिनों में और तूल पकड़ सकता है, क्योंकि उच्च न्यायालय के आदेश की समय-सीमा नज़दीक आ रही है और सरकार का रुख अभी भी स्पष्ट नहीं है।

संपादकीय दृष्टिकोण

और सार्वजनिक मंचों पर आर्थिक समृद्धि के दावे — यह विरोधाभास शासन की पारदर्शिता पर गंभीर प्रश्न उठाता है। विज्ञापनों पर कथित ₹8,000 करोड़ और कर्मचारियों का बकाया DA — यह तुलना मतदाताओं और न्यायपालिका दोनों के सामने सरकार की प्राथमिकताओं को उजागर करती है। असली परीक्षा यह है कि क्या सरकार 15 दिन की समय-सीमा में भुगतान करती है या न्यायालय की अवमानना का जोखिम उठाती है।
RashtraPress
4 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंजाब सरकार पर DA बकाया का मामला क्या है?
पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय ने AAP की भगवंत मान सरकार को 15 दिनों के भीतर ₹14,191 करोड़ का महंगाई भत्ता (DA) बकाया सरकारी कर्मचारियों को चुकाने का आदेश दिया है। सरकार ने DA न देने के लिए राज्य के आर्थिक संकट का हवाला दिया था।
अकाली दल ने AAP सरकार पर क्या आरोप लगाए?
शिरोमणि अकाली दल के नेता बिक्रम सिंह मजीठिया ने आरोप लगाया कि सरकार जनता के सामने अर्थव्यवस्था को मजबूत बताती है, लेकिन अदालत में आर्थिक संकट की दुहाई देती है। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार ने विज्ञापनों पर ₹8,000 करोड़ खर्च किए, जबकि कर्मचारियों का DA रोका।
पंजाब सरकार DA क्यों नहीं दे रही थी?
सरकार द्वारा गठित तीन सदस्यीय समिति ने सिफारिश की थी कि राज्य कर्मचारियों को अतिरिक्त DA देने की ज़रूरत नहीं, क्योंकि उनके लाभ केंद्र के बराबर या बेहतर हैं। समिति ने यह भी कहा कि राज्य आर्थिक संकट में है और वह DA संशोधन में केंद्र का अनुसरण करने के लिए बाध्य नहीं है।
क्या पंजाब सरकार 15 दिन में DA बकाया चुकाएगी?
अकाली दल के अनुसार सरकार का 15 दिनों में भुगतान करने का कोई इरादा नहीं दिखता। सरकार ने सोमवार सुबह ही अदालत से किश्तों में भुगतान की अनुमति माँगी है, जो उच्च न्यायालय के मूल आदेश से अलग है।
इस विवाद से पंजाब के सरकारी कर्मचारियों पर क्या असर होगा?
यदि अदालत का आदेश लागू होता है तो पंजाब के सरकारी कर्मचारियों को ₹14,191 करोड़ का लंबित DA मिलेगा। हालाँकि किश्तों में भुगतान की माँग से यह प्रक्रिया लंबी खिंच सकती है और कर्मचारियों को तत्काल राहत मिलने में देरी हो सकती है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 2 घंटे पहले
  2. 7 घंटे पहले
  3. 9 घंटे पहले
  4. 3 सप्ताह पहले
  5. 1 महीना पहले
  6. 3 महीने पहले
  7. 3 महीने पहले
  8. 11 महीने पहले