पंजाब कर्मचारी हड़ताल: कांग्रेस ने CM भगवंत मान को दी चेतावनी, ₹20,161 करोड़ DA बकाया पर संकट गहरा
सारांश
मुख्य बातें
पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वडिंग ने शनिवार, 29 अगस्त 2026 को मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान को कड़ी चेतावनी दी कि 27 अगस्त की 'महा हड़ताल' में भाग लेने वाले तीन लाख से अधिक सरकारी कर्मचारियों के विरुद्ध कोई भी दंडात्मक कार्रवाई न की जाए। आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार द्वारा हड़ताली कर्मचारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किए जाने के बाद यह राजनीतिक तनाव तेज़ हो गया है।
कांग्रेस की चेतावनी और राजनीतिक दबाव
वडिंग ने चंडीगढ़ में मीडिया से बात करते हुए कहा कि जब तक कर्मचारी कानूनी दायरे में रहकर विरोध करते हैं, यह उनका लोकतांत्रिक अधिकार है। उन्होंने स्पष्ट किया कि 'कार्रवाई की धमकियों से कर्मचारियों को डराया-धमकाया नहीं जा सकता।' वडिंग ने यहाँ तक कहा कि यदि मुख्यमंत्री ने कर्मचारियों के खिलाफ कदम उठाया, तो इसके 'दूरगामी परिणाम होंगे जिनकी उन्होंने कल्पना भी नहीं की होगी' — और यह उनके मुख्यमंत्री पद का आखिरी दिन साबित हो सकता है।
कर्मचारी संघ का राज्यपाल से संपर्क
इसी क्रम में कर्मचारी सांझा मुलाजम मंच ने राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया को ज्ञापन सौंपकर मुख्यमंत्री मान के विरुद्ध कार्रवाई की माँग की। संघ का आरोप है कि मान 27 अगस्त को कर्मचारियों के साथ निर्धारित बैठक में उपस्थित नहीं हुए। ज्ञापन में मुख्यमंत्री पर 'सरकारी जिम्मेदारियों के प्रति लापरवाही, प्रशासनिक मनमानी और सार्वजनिक धन की बर्बादी' का आरोप लगाया गया है। संघ ने माँग की कि उनकी अनुपस्थिति के लिए मुख्यमंत्री के एक दिन के वेतन में कटौती की जाए।
महा हड़ताल का व्यापक असर
27 अगस्त को पंजाब भर में सरकारी सेवाएँ ठप रहीं। लगभग सभी विभागों, बोर्डों और निगमों के तीन लाख से अधिक कर्मचारी हड़ताल पर चले गए। इनके साथ लगभग चार लाख पेंशनभोगी भी जुड़े। 'महा हड़ताल' का असर सरकारी अस्पतालों, औषधालयों और शैक्षणिक संस्थानों पर भी पड़ा। हालाँकि, बाज़ार, निजी प्रतिष्ठान, परिवहन सेवाएँ और आपातकालीन सेवाएँ इससे अलग रखी गई थीं।
₹20,161 करोड़ का DA बकाया — विवाद की जड़
कर्मचारी संघों के अनुसार, पंजाब सरकार पर ₹20,161 करोड़ का महंगाई भत्ता (DA) बकाया है। इसमें से ₹6,000 करोड़ 2021 के बाद से और ₹14,161 करोड़ उससे पहले के हैं — यानी AAP सरकार के सत्ता में आने से पहले का बकाया भी इसमें शामिल है। फिलहाल कर्मचारियों को मूल वेतन का 42 प्रतिशत DA मिल रहा है, जबकि उनकी माँग है कि यह 58 प्रतिशत होना चाहिए।
आगे क्या होगा
कारण बताओ नोटिसों के बाद कर्मचारी संघों ने संकेत दिया है कि यदि सरकार ने दंडात्मक रवैया जारी रखा तो आंदोलन और तेज़ हो सकता है। यह ऐसे समय में आया है जब पंजाब में AAP सरकार पहले से ही वित्तीय दबाव का सामना कर रही है। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यह विवाद आगामी चुनावी मौसम में AAP के लिए एक बड़ी चुनौती बन सकता है।