बठिंडा सिविल अस्पताल कर्मियों का प्रदर्शन: साढ़े चार साल बाद भी अधूरे वादे, भगवंत मान सरकार पर निशाना
सारांश
मुख्य बातें
पंजाब के बठिंडा में सिविल अस्पताल के कर्मचारियों ने 26 अगस्त 2026 को अपनी लंबित मांगों को लेकर जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। कर्मचारियों का आरोप है कि मुख्यमंत्री भगवंत मान के नेतृत्व वाली आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार ने 2022 में सत्ता में आने के समय जो वादे किए थे, वे साढ़े चार साल बाद भी पूरे नहीं हुए हैं।
मुख्य मांगें और शिकायतें
प्रदर्शनकारी कर्मचारियों की प्रमुख मांगों में समान काम के लिए समान वेतन, वेतन वृद्धि, ग्रेच्युटी का भुगतान और अस्थायी कर्मचारियों को नियमित करना शामिल है। इसके अलावा, प्रदर्शनकारियों ने बठिंडा जिले में आम आदमी क्लीनिक बंद करने की माँग का भी समर्थन किया। उनका कहना है कि इन क्लीनिकों में पर्याप्त सुविधाएँ उपलब्ध नहीं हैं और सरकार ने वहाँ कार्यरत कर्मचारियों को नियमित करने का वादा भी नहीं निभाया।
प्रदर्शन में सिविल अस्पताल के विभिन्न विभागों में कार्यरत अकुशल एवं अस्थायी कर्मचारियों ने बड़ी संख्या में भाग लिया।
कर्मचारियों की आवाज़
18 वर्षों से सिविल अस्पताल में कार्यरत महिला कर्मचारी रणजीत कौर ने कहा, 'मैं पिछले 18 साल से यहाँ काम कर रही हूँ। हमारी कोई माँग पूरी नहीं की गई है। अगर माँगें पूरी नहीं हुईं तो हम सड़कों पर उतरेंगे।' उन्होंने यह भी कहा कि मुख्यमंत्री भगवंत मान ने केवल भरोसा दिलाया, लेकिन साढ़े चार साल बीत जाने के बाद भी मांगों पर ध्यान तक नहीं दिया गया।
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) कर्मचारी अवनीश कुमार ने बताया कि उनकी पाँच से सात प्रमुख माँगें कई वर्षों से लंबित हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि हड़ताल में शामिल कर्मचारियों को प्रशासन की ओर से डराया-धमकाया जा रहा है और काम पर लौटने का दबाव बनाया जा रहा है।
आम आदमी क्लीनिक पर सवाल
आम आदमी क्लीनिक में कार्यरत कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि सरकार ने बाहरी इलाकों में ये क्लीनिक तो खोल दिए, लेकिन वहाँ न तो पर्याप्त चिकित्सा सुविधाएँ हैं और न ही कर्मचारियों की स्थिति को नियमित किया गया। इसके कारण कर्मचारियों और मरीजों — दोनों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
सरकार की प्रतिक्रिया
प्रदर्शनकारियों के अनुसार, मुख्यमंत्री भगवंत मान ने उनकी मांगों को लेकर अब तक कोई ठोस प्रतिक्रिया नहीं दी है। अन्य कर्मचारियों ने भी आरोप लगाया कि चुनाव के दौरान किए गए वादे — जिनमें समान काम के लिए समान वेतन और अकुशल कर्मचारियों को नियमित करना शामिल था — अमल में नहीं लाए गए।
आगे की राह
प्रदर्शनकारियों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन को और तेज़ किया जाएगा। यह ऐसे समय में आया है जब पंजाब में स्वास्थ्य क्षेत्र के कर्मचारियों की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं और सरकार पर जवाबदेही का दबाव बढ़ रहा है।