26 अगस्त 2026
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बठिंडा सिविल अस्पताल कर्मियों का प्रदर्शन: साढ़े चार साल बाद भी अधूरे वादे, भगवंत मान सरकार पर निशाना

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बठिंडा सिविल अस्पताल कर्मियों का प्रदर्शन: साढ़े चार साल बाद भी अधूरे वादे, भगवंत मान सरकार पर निशाना

सारांश

बठिंडा सिविल अस्पताल के कर्मचारियों का गुस्सा फूट पड़ा — साढ़े चार साल, कई वादे, और शून्य अमल। समान वेतन से लेकर नियमितीकरण तक, AAP सरकार की चुनावी प्रतिबद्धताएँ अभी भी कागज़ों तक सीमित हैं। कर्मचारियों ने आंदोलन तेज़ करने की चेतावनी दी है।

मुख्य बातें

बठिंडा सिविल अस्पताल के कर्मचारियों ने 26 अगस्त 2026 को विरोध प्रदर्शन किया।
प्रमुख मांगें: समान काम के लिए समान वेतन , वेतन वृद्धि, ग्रेच्युटी और अस्थायी कर्मचारियों का नियमितीकरण ।
कर्मचारी रणजीत कौर ने बताया कि वे 18 वर्षों से कार्यरत हैं, फिर भी कोई माँग पूरी नहीं हुई।
NHM कर्मचारी अवनीश कुमार के अनुसार पाँच से सात प्रमुख माँगें कई वर्षों से लंबित हैं; हड़ताली कर्मचारियों को डराने-धमकाने का आरोप।
आम आदमी क्लीनिक में पर्याप्त सुविधाओं के अभाव और कर्मचारी नियमितीकरण न होने पर भी आपत्ति।
प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी — जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन और तेज़ होगा।

पंजाब के बठिंडा में सिविल अस्पताल के कर्मचारियों ने 26 अगस्त 2026 को अपनी लंबित मांगों को लेकर जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। कर्मचारियों का आरोप है कि मुख्यमंत्री भगवंत मान के नेतृत्व वाली आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार ने 2022 में सत्ता में आने के समय जो वादे किए थे, वे साढ़े चार साल बाद भी पूरे नहीं हुए हैं।

मुख्य मांगें और शिकायतें

प्रदर्शनकारी कर्मचारियों की प्रमुख मांगों में समान काम के लिए समान वेतन, वेतन वृद्धि, ग्रेच्युटी का भुगतान और अस्थायी कर्मचारियों को नियमित करना शामिल है। इसके अलावा, प्रदर्शनकारियों ने बठिंडा जिले में आम आदमी क्लीनिक बंद करने की माँग का भी समर्थन किया। उनका कहना है कि इन क्लीनिकों में पर्याप्त सुविधाएँ उपलब्ध नहीं हैं और सरकार ने वहाँ कार्यरत कर्मचारियों को नियमित करने का वादा भी नहीं निभाया।

प्रदर्शन में सिविल अस्पताल के विभिन्न विभागों में कार्यरत अकुशल एवं अस्थायी कर्मचारियों ने बड़ी संख्या में भाग लिया।

कर्मचारियों की आवाज़

18 वर्षों से सिविल अस्पताल में कार्यरत महिला कर्मचारी रणजीत कौर ने कहा, 'मैं पिछले 18 साल से यहाँ काम कर रही हूँ। हमारी कोई माँग पूरी नहीं की गई है। अगर माँगें पूरी नहीं हुईं तो हम सड़कों पर उतरेंगे।' उन्होंने यह भी कहा कि मुख्यमंत्री भगवंत मान ने केवल भरोसा दिलाया, लेकिन साढ़े चार साल बीत जाने के बाद भी मांगों पर ध्यान तक नहीं दिया गया।

राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) कर्मचारी अवनीश कुमार ने बताया कि उनकी पाँच से सात प्रमुख माँगें कई वर्षों से लंबित हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि हड़ताल में शामिल कर्मचारियों को प्रशासन की ओर से डराया-धमकाया जा रहा है और काम पर लौटने का दबाव बनाया जा रहा है।

आम आदमी क्लीनिक पर सवाल

आम आदमी क्लीनिक में कार्यरत कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि सरकार ने बाहरी इलाकों में ये क्लीनिक तो खोल दिए, लेकिन वहाँ न तो पर्याप्त चिकित्सा सुविधाएँ हैं और न ही कर्मचारियों की स्थिति को नियमित किया गया। इसके कारण कर्मचारियों और मरीजों — दोनों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

सरकार की प्रतिक्रिया

प्रदर्शनकारियों के अनुसार, मुख्यमंत्री भगवंत मान ने उनकी मांगों को लेकर अब तक कोई ठोस प्रतिक्रिया नहीं दी है। अन्य कर्मचारियों ने भी आरोप लगाया कि चुनाव के दौरान किए गए वादे — जिनमें समान काम के लिए समान वेतन और अकुशल कर्मचारियों को नियमित करना शामिल था — अमल में नहीं लाए गए।

आगे की राह

प्रदर्शनकारियों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन को और तेज़ किया जाएगा। यह ऐसे समय में आया है जब पंजाब में स्वास्थ्य क्षेत्र के कर्मचारियों की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं और सरकार पर जवाबदेही का दबाव बढ़ रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

यह आंदोलन शांत होने के बजाय और विस्तार पाएगा।
RashtraPress
26 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बठिंडा सिविल अस्पताल कर्मचारियों की मुख्य माँगें क्या हैं?
कर्मचारियों की प्रमुख माँगों में समान काम के लिए समान वेतन, वेतन वृद्धि, ग्रेच्युटी का भुगतान और अस्थायी कर्मचारियों को नियमित करना शामिल है। इसके साथ ही वे बठिंडा जिले में आम आदमी क्लीनिक बंद करने की माँग का भी समर्थन कर रहे हैं।
यह प्रदर्शन क्यों हो रहा है और कब से चल रहा है?
2022 में पंजाब में AAP सरकार बनने के समय अस्थायी कर्मचारियों को नियमित करने और समान वेतन देने के वादे किए गए थे। साढ़े चार साल बाद भी ये वादे पूरे नहीं हुए, जिससे कर्मचारियों में गहरा असंतोष है और वे लगातार विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं।
आम आदमी क्लीनिक को लेकर कर्मचारियों की क्या शिकायत है?
कर्मचारियों का आरोप है कि सरकार ने बाहरी इलाकों में आम आदमी क्लीनिक तो खोल दिए, लेकिन वहाँ पर्याप्त चिकित्सा सुविधाएँ उपलब्ध नहीं हैं। इसके अलावा, इन क्लीनिकों में काम करने वाले कर्मचारियों को नियमित करने का वादा भी पूरा नहीं किया गया है।
भगवंत मान सरकार ने इस मामले में क्या कदम उठाए हैं?
प्रदर्शनकारियों के अनुसार, मुख्यमंत्री भगवंत मान ने केवल आश्वासन दिया है कि माँगें पूरी की जाएँगी, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। कर्मचारियों का यह भी आरोप है कि हड़ताल में शामिल कर्मचारियों को प्रशासन की ओर से डराया-धमकाया जा रहा है।
आगे क्या हो सकता है — क्या आंदोलन और बड़ा होगा?
प्रदर्शनकारियों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन को और तेज़ किया जाएगा। NHM कर्मचारी अवनीश कुमार समेत अन्य कर्मचारी नेताओं ने कहा है कि वे अपने अधिकारों के लिए संघर्ष जारी रखेंगे।
राष्ट्र प्रेस
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