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एच1एन1 स्वाइन फ्लू: किसे है असली खतरा, कब लें वैक्सीन — प्रो. गांगुली की विशेषज्ञ राय

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एच1एन1 स्वाइन फ्लू: किसे है असली खतरा, कब लें वैक्सीन — प्रो. गांगुली की विशेषज्ञ राय

सारांश

एच1एन1 के बढ़ते मामलों के बीच ICMR के पूर्व महानिदेशक प्रो. निर्मल कुमार गांगुली की दो-टूक: अधिकांश स्वस्थ लोगों को घबराने की जरूरत नहीं, लेकिन बुजुर्ग, छोटे बच्चे और कोमॉर्बिडिटी वाले मरीज सतर्क रहें और लक्षण दिखते ही डॉक्टर से मिलें।

मुख्य बातें

निर्मल कुमार गांगुली (ICMR पूर्व DG, पद्म भूषण) के अनुसार अधिकांश स्वस्थ लोगों को एच1एन1 से घबराने की आवश्यकता नहीं।
65 वर्ष से अधिक बुजुर्ग , 5 वर्ष से कम बच्चे और डायबिटीज, हृदय रोग, किडनी रोग, कैंसर जैसी सह-रुग्णता वाले मरीज उच्च जोखिम में हैं।
एच1एन1 की प्रमुख एंटीवायरल दवा ओसेल्टामिविर है, जो लक्षण शुरू होने के 48 घंटे के भीतर लेने पर सर्वाधिक प्रभावी है — केवल डॉक्टर की सलाह पर।
सामान्य लक्षणों में हर मरीज का टेस्ट जरूरी नहीं; परंतु साँस में तकलीफ, सीने में दर्द या ऑक्सीजन स्तर गिरने पर तुरंत अस्पताल जाएँ।
फ्लू वैक्सीन बुजुर्गों, बच्चों और कोमॉर्बिडिटी वालों के लिए अनुशंसित; स्वस्थ युवाओं के लिए अनिवार्य नहीं।
वायरस की निगरानी के लिए टेस्टिंग और जीनोम सीक्वेंसिंग आवश्यक, ताकि नए म्यूटेशन की समय पर पहचान हो सके।

देश के कई राज्यों में एच1एन1 (स्वाइन फ्लू) के मामलों में हालिया बढ़ोतरी के बीच, पद्म भूषण से सम्मानित, भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) के पूर्व महानिदेशक और माइक्रोबायोलॉजिस्ट प्रोफेसर निर्मल कुमार गांगुली ने स्पष्ट किया है कि अधिकांश स्वस्थ लोगों को घबराने की कोई आवश्यकता नहीं है। हालाँकि, 65 वर्ष से अधिक आयु के बुजुर्गों, 5 वर्ष से कम उम्र के बच्चों और गंभीर सह-रुग्णता (कोमॉर्बिडिटी) वाले मरीजों को विशेष सतर्कता बरतने की सलाह उन्होंने दी है।

इन्फ्लुएंजा वायरस: पुराना परिचित, नया स्ट्रेन

प्रोफेसर गांगुली के अनुसार, इन्फ्लुएंजा वायरस कोई नई उभरी हुई बीमारी नहीं है — यह दशकों से मानव आबादी में मौजूद है। यह वायरस मुख्यतः टाइप ए और टाइप बी में वर्गीकृत होता है। एच1एन1 इन्फ्लुएंजा ए का एक स्ट्रेन है, जिसके प्राकृतिक होस्ट सूअर और प्रवासी पक्षी माने जाते हैं। फिलहाल इंसानों में फैल रहा यह वायरस मुख्य रूप से एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में संक्रमण के जरिए प्रसारित हो रहा है।

वायरस का संक्रमण संक्रमित व्यक्ति के खाँसने, छींकने या साँस छोड़ने से निकलने वाली बूँदों के माध्यम से होता है। बंद और भीड़भाड़ वाली जगहों — जैसे स्कूल, सिनेमा हॉल या सार्वजनिक कार्यक्रम — में संक्रमण का जोखिम अपेक्षाकृत अधिक रहता है। संक्रमित सतह को छूने के बाद बिना हाथ धोए आँख, नाक या मुँह को छूने से भी वायरस फैल सकता है।

लक्षण और सामान्य फ्लू से अंतर

एच1एन1 के लक्षण अन्य वायरल संक्रमणों से काफी मिलते-जुलते हैं: बुखार, नाक बहना, खाँसी, गले में तकलीफ, शरीर में दर्द, कमजोरी और अत्यधिक थकान इसके प्रमुख संकेत हैं। प्रोफेसर गांगुली ने बताया कि अधिकांश स्वस्थ व्यक्तियों में यह संक्रमण सामान्य फ्लू की तरह रहता है और आराम, पर्याप्त तरल पदार्थ और सामान्य देखभाल से ठीक हो जाता है। हालाँकि, कुछ मामलों में यह गंभीर रूप ले सकता है और निमोनिया जैसी जटिलताएँ पैदा कर सकता है।

गौरतलब है कि इन्फ्लुएंजा वायरस का प्रकोप मुख्यतः मानसून के मौसम और जनवरी-फरवरी के महीनों में अधिक देखा जाता है। इसलिए इन महीनों में भीड़-भाड़ वाली जगहों पर मास्क का उपयोग सहायक हो सकता है।

किन लोगों को है सबसे अधिक खतरा

विशेषज्ञ के अनुसार, निम्नलिखित श्रेणियों के लोगों को फ्लू के गंभीर संक्रमण का जोखिम अधिक रहता है:

65 वर्ष से अधिक आयु के बुजुर्ग और 5 वर्ष से कम उम्र के बच्चे सर्वाधिक संवेदनशील हैं। इसके अतिरिक्त, डायबिटीज, हृदय रोग, क्रोनिक किडनी डिजीज, डायलिसिस पर निर्भर मरीज, कैंसर और कीमोथेरेपी ले रहे व्यक्ति, अंग प्रत्यारोपण करा चुके लोग और कमजोर प्रतिरक्षा तंत्र वाले मरीज भी उच्च जोखिम वर्ग में आते हैं। इन लोगों में फ्लू जैसे लक्षण दिखते ही चिकित्सक से परामर्श लेना आवश्यक है।

टेस्ट कब जरूरी, कब नहीं

प्रोफेसर गांगुली ने स्पष्ट किया कि यदि फ्लू के अधिकांश मामले एक ही स्ट्रेन से हों और लक्षण सामान्य हों, तो हर मरीज का परीक्षण अनिवार्य नहीं है। ऐसे में घर पर आराम, तरल पदार्थ और डॉक्टर की सलाह पर दवाएँ पर्याप्त हैं।

लेकिन यदि साँस लेने में कठिनाई, सीने में दर्द, ऑक्सीजन स्तर में गिरावट, लगातार तेज बुखार या स्थिति में तेजी से गिरावट जैसे लक्षण दिखें, तो तत्काल अस्पताल जाना चाहिए। वहीं, वायरस की निगरानी (सर्विलांस) के लिए टेस्टिंग और जीनोम सीक्वेंसिंग बेहद महत्वपूर्ण है, ताकि किसी नए म्यूटेशन या स्ट्रेन की समय रहते पहचान हो सके।

एच1एन1 बनाम कोविड-19: क्या है फर्क

दोनों वायरस श्वसन तंत्र को प्रभावित करते हैं और दोनों में बुखार, खाँसी और निमोनिया जैसी जटिलताएँ हो सकती हैं। परंतु प्रोफेसर गांगुली के अनुसार, दोनों की जैविक संरचना और वायरस परिवार अलग-अलग हैं। कोविड-19 में हृदय और तंत्रिका-तंत्र (न्यूरोलॉजिकल) संबंधी जटिलताएँ अधिक देखी गई थीं, जो सामान्य इन्फ्लुएंजा में उस स्तर पर आम नहीं हैं।

एच1एन1 के उपचार में प्रमुख एंटीवायरल दवा ओसेल्टामिविर का उपयोग होता है, जो इन्फ्लुएंजा वायरस पर प्रभावी है — कोविड-19 पर नहीं। यह दवा लक्षण शुरू होने के 48 घंटे के भीतर लेने पर सर्वाधिक प्रभावी मानी जाती है। चूँकि यह एक प्रिस्क्रिप्शन दवा है, इसे बिना चिकित्सक की सलाह के नहीं लेना चाहिए।

वैक्सीन: किसे लेनी चाहिए

फ्लू से बचाव के लिए वैक्सीन उपलब्ध हैं। प्रोफेसर गांगुली ने विशेष रूप से बुजुर्गों, छोटे बच्चों और कोमॉर्बिडिटी वाले मरीजों को डॉक्टर की सलाह से वैक्सीन लगवाने की अनुशंसा की। उनके अनुसार, स्वस्थ युवाओं के लिए वैक्सीन उतनी अनिवार्य नहीं है, जितनी उच्च जोखिम वर्ग के लिए है। यह ऐसे समय में आया है जब देश में मौसमी फ्लू का प्रकोप बढ़ रहा है और स्वास्थ्य विशेषज्ञ आम जनता को जागरूक करने में जुटे हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन एक बड़ा सवाल अनुत्तरित रहता है — देश में एच1एन1 के कितने मामले हैं और किन राज्यों में सर्वाधिक प्रकोप है, इसका कोई केंद्रीय, पारदर्शी डेटा सार्वजनिक नहीं है। सर्विलांस और सीक्वेंसिंग की अहमियत पर जोर देना सही है, पर सवाल यह है कि क्या सार्वजनिक स्वास्थ्य तंत्र इसके लिए पर्याप्त रूप से सक्रिय है। 'घबराएँ नहीं' का संदेश जरूरी है, लेकिन इसे 'सतर्क रहें' के साथ संतुलित करना उतना ही जरूरी है — खासकर तब जब उच्च जोखिम वाली आबादी तक स्वास्थ्य सेवाओं की पहुँच अभी भी असमान है।
RashtraPress
26 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एच1एन1 स्वाइन फ्लू क्या है और यह कैसे फैलता है?
एच1एन1 इन्फ्लुएंजा ए वायरस का एक स्ट्रेन है, जो संक्रमित व्यक्ति के खाँसने, छींकने या साँस लेने से निकलने वाली बूँदों के जरिए एक से दूसरे व्यक्ति में फैलता है। बंद और भीड़भाड़ वाली जगहों पर संक्रमण का खतरा अधिक रहता है।
एच1एन1 के लक्षण क्या हैं और यह कोविड-19 से कैसे अलग है?
एच1एन1 के लक्षणों में बुखार, नाक बहना, खाँसी, गले में तकलीफ, शरीर में दर्द और थकान शामिल हैं। प्रो. गांगुली के अनुसार, कोविड-19 में हृदय और न्यूरोलॉजिकल जटिलताएँ अधिक देखी गई थीं, जो सामान्य इन्फ्लुएंजा में उस स्तर पर आम नहीं हैं — हालाँकि दोनों में गंभीर स्थिति में निमोनिया हो सकता है।
किन लोगों को एच1एन1 से सबसे अधिक खतरा है?
65 वर्ष से अधिक आयु के बुजुर्ग और 5 वर्ष से कम उम्र के बच्चे सर्वाधिक संवेदनशील हैं। इसके अलावा डायबिटीज, हृदय रोग, क्रोनिक किडनी डिजीज, कैंसर, कीमोथेरेपी, अंग प्रत्यारोपण और कमजोर प्रतिरक्षा तंत्र वाले लोग भी उच्च जोखिम वर्ग में आते हैं।
एच1एन1 में टेस्ट कब करवाना चाहिए?
सामान्य फ्लू जैसे लक्षणों में हर मरीज का टेस्ट जरूरी नहीं है। लेकिन यदि साँस लेने में कठिनाई, सीने में दर्द, ऑक्सीजन स्तर में गिरावट या लगातार तेज बुखार हो, तो तुरंत अस्पताल जाएँ और चिकित्सकीय परीक्षण कराएँ।
एच1एन1 की वैक्सीन किसे लेनी चाहिए?
प्रो. गांगुली के अनुसार, बुजुर्गों, छोटे बच्चों और कोमॉर्बिडिटी (डायबिटीज, हृदय रोग आदि) वाले मरीजों को डॉक्टर की सलाह से फ्लू वैक्सीन अवश्य लगवानी चाहिए। स्वस्थ युवाओं के लिए यह उतनी अनिवार्य नहीं मानी जाती।
राष्ट्र प्रेस
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