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दिल्ली में स्वाइन फ्लू का खतरा बढ़ा, एम्स विशेषज्ञों ने बताए लक्षण और बचाव के उपाय

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दिल्ली में स्वाइन फ्लू का खतरा बढ़ा, एम्स विशेषज्ञों ने बताए लक्षण और बचाव के उपाय

सारांश

मानसून की ठंडक के साथ दिल्ली में स्वाइन फ्लू का खतरा गहरा रहा है। एम्स के विशेषज्ञों ने 102-104°F बुखार, सांस की तकलीफ और लगातार खाँसी को गंभीर संकेत बताया है। बुज़ुर्ग, बच्चे और को-मॉर्बिडिटी वाले मरीज़ सबसे अधिक जोखिम में हैं।

मुख्य बातें

नई दिल्ली में मानसून के बीच स्वाइन फ्लू (H1N1) के मामलों में वृद्धि दर्ज की जा रही है।
स्वाइन फ्लू में बुखार 102 से 104 डिग्री फॉरेनहाइट तक पहुँच सकता है — यह सामान्य सर्दी-जुकाम से प्रमुख अंतर है।
60 वर्ष से अधिक बुज़ुर्ग, छोटे बच्चे, गर्भवती महिलाएँ और डायबिटीज़, अस्थमा, कैंसर जैसी बीमारियों वाले उच्च जोखिम में हैं।
नीरज निश्चल ने हाथों की सफाई, मास्क पहनने और खाँसते समय मुँह ढकने की सलाह दी।
बिना डॉक्टर की सलाह के दवा न लें; सांस में तकलीफ या लगातार बुखार पर तत्काल चिकित्सीय सहायता लें।
अस्पतालों में रेस्पिरेटरी ओपीडी और वेंटिलेटर सुविधाएँ सक्रिय हैं।

मानसून और बदलते मौसम के बीच नई दिल्ली में स्वाइन फ्लू (H1N1 इन्फ्लूएंजा) के मामलों में वृद्धि को लेकर चिकित्सा विशेषज्ञों ने 14 अगस्त 2026 को आम जनता को सतर्क रहने की सलाह दी है। एम्स (AIIMS) सहित अन्य अस्पतालों के डॉक्टरों के अनुसार, ठंडा वातावरण, भीड़भाड़ और व्यक्ति-से-व्यक्ति संक्रमण का संयोजन इस मौसम में फ्लू के प्रसार को तेज़ कर देता है। विशेषज्ञों ने चेताया है कि तेज़ बुखार, ठंड लगना और सांस संबंधी परेशानी जैसे लक्षणों को नज़रअंदाज़ न किया जाए।

स्वाइन फ्लू क्यों फैलता है इस मौसम में

डॉ. सत्यजीत कुमार के अनुसार, स्वाइन फ्लू और अन्य श्वसन संबंधी बीमारियों के प्रसार में पर्यावरणीय परिस्थितियों की निर्णायक भूमिका होती है। तापमान में गिरावट, भीड़भाड़ वाले स्थान और मौसमी बदलाव मिलकर इन्फ्लूएंजा वायरस के फैलने के लिए अनुकूल परिस्थितियाँ बनाते हैं। उन्होंने बताया कि इस दौरान परीक्षण (टेस्टिंग) भी अधिक होती है, जिससे संक्रमण की पहचान अधिक संख्या में होती है।

एम्स में मेडिसिन के प्रोफेसर डॉ. नीरज निश्चल ने स्पष्ट किया कि जब मौसम अपेक्षाकृत ठंडा होने लगता है, तो इन्फ्लूएंजा वायरस के फैलने के लिए वातावरण अधिक अनुकूल हो जाता है। यह संक्रमण मुख्यतः एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में फैलता है। उन्होंने कहा कि जब संक्रमण फेफड़ों को प्रभावित करता है और निमोनिया जैसी स्थिति बनती है, तब मरीज़ की स्थिति गंभीर हो सकती है।

मुख्य लक्षण और सामान्य सर्दी से अंतर

डॉ. सत्यजीत कुमार के अनुसार स्वाइन फ्लू के प्रमुख लक्षणों में तेज़ बुखार, ठंड लगना या कंपकंपी, गले में खराश, शरीर और हाथ-पैरों में दर्द, सिरदर्द, कमज़ोरी और कुछ मामलों में सांस लेने में परेशानी शामिल हैं। उन्होंने बताया कि स्वाइन फ्लू में बुखार 102 से 104 डिग्री फॉरेनहाइट तक पहुँच सकता है, जो इसे सामान्य सर्दी-जुकाम से अलग करता है।

डॉ. निश्चल ने जोड़ा कि कुछ मरीज़ों में डायरिया जैसे पेट से जुड़े लक्षण भी देखे जा सकते हैं। यदि बुखार लगातार बना हो, सांस लेने में कठिनाई हो, या मरीज़ की सामान्य स्थिति बिगड़ती दिखे, तो तत्काल चिकित्सीय सहायता लेना अनिवार्य है।

उच्च जोखिम वाले समूह

दोनों विशेषज्ञों ने कुछ विशेष समूहों को अधिक सतर्क रहने की सलाह दी है। इनमें 60 वर्ष से अधिक आयु के बुज़ुर्ग, छोटे बच्चे, गर्भवती महिलाएँ और डायबिटीज़, अस्थमा, टीबी, हृदय रोग, किडनी की बीमारी जैसी सह-रुग्णताओं (को-मॉर्बिडिटी) से पीड़ित लोग शामिल हैं।

डॉ. निश्चल ने विशेष रूप से बताया कि इम्यूनो-सप्रेशन थेरेपी पर चल रहे मरीज़ और कैंसर रोगी भी संक्रमण के प्रति अधिक संवेदनशील होते हैं। पूर्व धूम्रपान करने वाले जिनके फेफड़े कमज़ोर हैं, वे भी उच्च जोखिम में हैं। गर्भवती महिलाओं को लक्षण उभरते ही चिकित्सकीय सलाह लेने की हिदायत दी गई है।

बचाव और घरेलू देखभाल

डॉ. सत्यजीत कुमार ने बताया कि हल्के लक्षणों पर शुरुआती एक-दो दिन घर पर आराम किया जा सकता है। उन्होंने गर्म पानी पीने, ठंड से बचने और गर्म नमक-पानी से गरारे करने की सलाह दी। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि बिना डॉक्टर की सलाह के कोई भी दवा स्वयं शुरू न करें, क्योंकि हर दवा के संभावित दुष्प्रभाव होते हैं।

डॉ. निश्चल ने कोविड महामारी के दौरान अपनाई गई स्वच्छता आदतों को पुनः अपनाने की सलाह दी — विशेष रूप से हाथों की नियमित सफाई, फ्लू जैसे लक्षण होने पर मास्क का उपयोग, और खाँसते-छींकते समय मुँह ढकना। खाँसने के बाद हाथ अच्छी तरह धोना भी आवश्यक बताया गया।

अस्पताल की तैयारी और आगे की राह

डॉ. सत्यजीत कुमार ने बताया कि उनके अस्पताल में रेस्पिरेटरी मेडिसिन की अलग ओपीडी और वार्ड उपलब्ध हैं। गंभीर मामलों के लिए वेंटिलेटर जैसी सुविधाएँ भी तैयार हैं। यह ऐसे समय में आया है जब मानसून के बाद श्वसन संबंधी बीमारियों का मौसमी चक्र हर वर्ष अस्पतालों पर दबाव बढ़ाता है। विशेषज्ञों का सुझाव है कि समय पर पहचान और सावधानी से गंभीर मामलों की संख्या को नियंत्रित किया जा सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन हर बार जागरूकता अभियान उतने ही देर से आते हैं जितने देर से मामले बढ़ते हैं। असली सवाल यह है कि क्या दिल्ली का सार्वजनिक स्वास्थ्य तंत्र मौसमी पूर्वानुमान के आधार पर अग्रिम तैयारी करता है, या केवल प्रतिक्रियात्मक रहता है। विशेषज्ञों की सलाह ठोस है, परंतु सरकारी स्तर पर टेस्टिंग की उपलब्धता, फ्लू टीकाकरण की पहुँच और उच्च जोखिम समूहों तक सक्रिय आउटरीच — ये तीन मोर्चे अभी भी कमज़ोर दिखते हैं।
RashtraPress
14 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दिल्ली में स्वाइन फ्लू के मामले क्यों बढ़ रहे हैं?
मानसून के बाद तापमान में गिरावट, भीड़भाड़ और व्यक्ति-से-व्यक्ति संक्रमण का संयोजन H1N1 इन्फ्लूएंजा वायरस के फैलाव के लिए अनुकूल परिस्थितियाँ बनाता है। विशेषज्ञों के अनुसार इस मौसम में टेस्टिंग भी बढ़ जाती है, जिससे मामलों की पहचान अधिक होती है।
स्वाइन फ्लू के लक्षण सामान्य सर्दी-जुकाम से कैसे अलग हैं?
स्वाइन फ्लू में बुखार 102 से 104 डिग्री फॉरेनहाइट तक पहुँच सकता है, जबकि सामान्य सर्दी में बुखार हल्का या नहीं होता। इसके अलावा तेज़ ठंड लगना, शरीर में अधिक दर्द, गंभीर सिरदर्द और सांस लेने में परेशानी स्वाइन फ्लू की विशेषता है।
स्वाइन फ्लू में सबसे अधिक जोखिम किसे है?
60 वर्ष से अधिक बुज़ुर्ग, छोटे बच्चे, गर्भवती महिलाएँ और डायबिटीज़, अस्थमा, हृदय रोग, किडनी की बीमारी या कैंसर जैसी सह-रुग्णताओं वाले लोग उच्च जोखिम में हैं। इम्यूनो-सप्रेशन थेरेपी पर चल रहे मरीज़ भी विशेष रूप से संवेदनशील हैं।
स्वाइन फ्लू से बचाव के लिए क्या करें?
हाथों की नियमित सफाई, खाँसते-छींकते समय मुँह ढकना और फ्लू जैसे लक्षण होने पर मास्क पहनना सबसे प्रभावी उपाय हैं। गर्म पानी पीना, ठंड से बचना और नमक-पानी के गरारे भी राहत देते हैं; परंतु कोई भी दवा डॉक्टर की सलाह के बिना न लें।
डॉक्टर से तुरंत कब संपर्क करना चाहिए?
यदि बुखार लगातार बना हो, सांस लेने में कठिनाई हो, या मरीज़ की सामान्य स्थिति बिगड़ती दिखे, तो तत्काल चिकित्सीय सहायता लेनी चाहिए। बच्चों, बुज़ुर्गों और को-मॉर्बिडिटी वाले मरीज़ों को किसी भी चेतावनी संकेत पर देर न करें।
राष्ट्र प्रेस
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