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एच1एन1 मामलों में बढ़ोतरी पर डॉ. रणदीप गुलेरिया की सलाह: घबराएं नहीं, लक्षण पहचानें

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एच1एन1 मामलों में बढ़ोतरी पर डॉ. रणदीप गुलेरिया की सलाह: घबराएं नहीं, लक्षण पहचानें

सारांश

एम्स दिल्ली के पूर्व निदेशक डॉ. रणदीप गुलेरिया ने स्पष्ट किया कि एच1एन1 के बढ़ते मामले चिंता का विषय नहीं हैं — स्थिति नियंत्रण में है। लेकिन कमजोर प्रतिरोधक क्षमता वाले, बुजुर्ग और बच्चों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है, क्योंकि लापरवाही निमोनिया तक पहुंचा सकती है।

मुख्य बातें

रणदीप गुलेरिया ने कहा कि एच1एन1 के मामले बढ़े हैं, लेकिन स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है।
सामान्य लक्षणों में बुखार, नजला, खांसी, जुकाम और कभी-कभी उल्टी शामिल हैं; अधिकांश मामले चार से पाँच दिन में ठीक हो जाते हैं।
सांस लेने में तकलीफ, छाती दर्द या ऑक्सीजन स्तर गिरने पर तुरंत डॉक्टर से मिलें — निमोनिया का खतरा हो सकता है।
बच्चों, बुजुर्गों और कमजोर इम्यूनिटी वाले लोगों को विशेष सतर्कता बरतनी चाहिए।
ICMR के आँकड़ों के अनुसार, मानसून में हर वर्ष एच1एन1 के मामले बढ़ते हैं।
मास्क पहनें, हाथ धोएं और लक्षण होने पर घर से बाहर न निकलें — यह संक्रमण फैलने से रोकेगा।

एम्स दिल्ली के पूर्व निदेशक डॉ. रणदीप गुलेरिया ने 22 अगस्त को स्पष्ट किया कि देश में एच1एन1 (स्वाइन फ्लू) के मामले बढ़ रहे हैं, लेकिन स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है और आम जनता को घबराने की कोई आवश्यकता नहीं है। उन्होंने कहा कि यह मूलतः इन्फ्लुएंजा वायरस से उत्पन्न बुखार है, जिसके विरुद्ध पिछली महामारियों के कारण भारतीय आबादी में पहले से ही प्रतिरोधक क्षमता विकसित हो चुकी है।

एच1एन1 के सामान्य लक्षण क्या हैं

डॉ. गुलेरिया के अनुसार, एच1एन1 के प्रमुख लक्षणों में बुखार, नजला, खांसी और जुकाम शामिल हैं। कुछ मामलों में शरीर या सिर में दर्द, पेट खराब और उल्टी भी हो सकती है। बच्चों में विशेष रूप से सुस्ती और निष्क्रियता देखी जा सकती है। उन्होंने बताया कि अधिकांश मामलों में चार से पाँच दिन के भीतर बुखार अपने आप उतर जाता है।

गंभीर स्थिति के संकेत

डॉ. गुलेरिया ने चेताया कि यदि बुखार चार से पाँच दिनों से अधिक बना रहे और साथ में सांस लेने में तकलीफ, छाती में दर्द, अत्यधिक उल्टी या ऑक्सीजन स्तर में गिरावट हो, तो यह गंभीर स्थिति का संकेत हो सकता है। उन्होंने कहा कि ऐसे लक्षणों को नजरअंदाज करने पर निमोनिया का खतरा बढ़ जाता है।

बच्चों और कमजोर प्रतिरोधक क्षमता वाले लोगों पर विशेष ध्यान

विशेषज्ञ ने बताया कि यदि कोई बच्चा सुस्त हो जाए या ठीक से खाना न खाए, तो अभिभावकों को तुरंत डॉक्टर से परामर्श लेना चाहिए। डॉ. गुलेरिया ने उन लोगों को विशेष सतर्कता बरतने की सलाह दी जिनकी उम्र बहुत कम या बहुत अधिक है अथवा जिनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर है। ऐसे व्यक्तियों में वायरस तेजी से फैल सकता है और गंभीर निमोनिया, शुगर स्तर में वृद्धि या हृदय विफलता जैसी जटिलताएं उत्पन्न हो सकती हैं।

बचाव के उपाय

डॉ. गुलेरिया ने सर्दी-जुकाम के लक्षण होने पर घर से बाहर न निकलने की सलाह दी, ताकि संक्रमण अन्य लोगों में न फैले। उन्होंने मास्क पहनने, नियमित हाथ धोने और खांसते समय मुंह ढकने को आवश्यक बताया, जिससे वायरस वातावरण में न फैले।

मानसून में बढ़ते मामले: आईसीएमआर का डेटा

भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) के आँकड़ों के अनुसार, मानसून के मौसम में एच1एन1 के मामले हर वर्ष बढ़ते हैं। डॉ. गुलेरिया ने बताया कि इस वर्ष भी यही प्रवृत्ति देखी जा रही है, जैसा कि पिछले वर्ष भी हुआ था। विशेषज्ञों के अनुसार, समय पर लक्षण पहचानकर उचित उपचार लेने से स्थिति को आसानी से नियंत्रित किया जा सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह एक अहम सवाल को अनुत्तरित छोड़ता है — क्या स्वास्थ्य तंत्र उन कमजोर वर्गों तक पहुंचने के लिए तैयार है जिन्हें वे स्वयं 'हाई रिस्क' बता रहे हैं? ICMR का डेटा हर मानसून में यही तस्वीर दिखाता है, फिर भी सार्वजनिक स्वास्थ्य जागरूकता अभियान प्रतिक्रियात्मक रहते हैं, न कि निवारक। एच1एन1 वैक्सीन उपलब्धता और उच्च जोखिम समूहों तक इसकी पहुंच पर कोई स्पष्ट सरकारी संचार अभी भी अनुपस्थित है।
RashtraPress
22 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एच1एन1 (स्वाइन फ्लू) क्या है और यह कैसे फैलता है?
एच1एन1 इन्फ्लुएंजा वायरस के एक प्रकार से होने वाला संक्रामक बुखार है, जो खांसने, छींकने या संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आने से फैलता है। डॉ. रणदीप गुलेरिया के अनुसार, पिछली महामारियों के कारण भारतीय आबादी में इसके विरुद्ध प्रतिरोधक क्षमता पहले से मौजूद है।
एच1एन1 के लक्षण कौन से हैं और कब डॉक्टर को दिखाएं?
बुखार, नजला, खांसी, जुकाम, सिरदर्द और उल्टी एच1एन1 के सामान्य लक्षण हैं जो चार से पाँच दिन में ठीक हो जाते हैं। यदि सांस लेने में तकलीफ, छाती में दर्द या ऑक्सीजन स्तर में गिरावट हो, तो तुरंत चिकित्सक से संपर्क करें क्योंकि यह निमोनिया का संकेत हो सकता है।
बच्चों में एच1एन1 के लक्षण कैसे पहचानें?
बच्चों में सुस्ती, निष्क्रियता और खाना न खाना एच1एन1 के प्रमुख संकेत हो सकते हैं। डॉ. गुलेरिया ने कहा कि ऐसे लक्षण दिखते ही अभिभावकों को बिना देर किए बच्चे को डॉक्टर के पास ले जाना चाहिए।
एच1एन1 से बचाव के लिए क्या करें?
मास्क पहनें, नियमित रूप से हाथ धोएं और खांसते समय मुंह ढकें। लक्षण होने पर घर से बाहर न निकलें ताकि संक्रमण अन्य लोगों में न फैले।
किन लोगों को एच1एन1 से सबसे अधिक खतरा है?
डॉ. गुलेरिया के अनुसार, बहुत कम या बहुत अधिक उम्र के लोग और कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता वाले व्यक्ति सबसे अधिक जोखिम में हैं। ऐसे लोगों में गंभीर निमोनिया, शुगर स्तर में वृद्धि या हृदय विफलता जैसी जटिलताएं हो सकती हैं।
राष्ट्र प्रेस
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